उत्तर प्रदेश अध्यापक पात्रता परीक्षा (TET) के पेपर और उत्तर कुंजी को लेकर उठे विवादों का समाधान करने के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा को लेकर छात्रों द्वारा जताई जा रही आपत्तियों को अब गंभीरता से लिया जाएगा और इसकी पूरी प्रक्रिया विषय विशेषज्ञों की देखरेख में संपन्न होगी।
परीक्षा में अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए आयोग विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग इस पर निर्णय लेगा कि आगे की कार्यवाही क्या होगी। यदि विशेषज्ञों की जांच में प्रश्नों में त्रुटि पाई जाती है, तो आयोग संभवतः मूल्यांकन पद्धति में बदलाव कर सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि 150 प्रश्नों में से कुछ प्रश्न गलत निकलते हैं, तो मूल्यांकन कुल अंकों की संख्या घटाकर किया जा सकता है या फिर उन गलत प्रश्नों पर सभी अभ्यर्थियों को अंक देने का निर्णय भी लिया जा सकता है।
परीक्षा की विशालता और अभ्यर्थियों की संख्या को देखते हुए प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। परीक्षा से जुड़ी मुख्य जानकारी इस प्रकार है:
- कुल परीक्षार्थी: प्रदेश भर में कुल 17,70,714 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए।
- परीक्षा आयोजन: यह परीक्षा 2, 3 और 4 जुलाई को प्रदेश के 60 जिलों में 955 केंद्रों पर संपन्न हुई।
- ओएमआर स्कैनिंग: ओएमआर शीट की स्कैनिंग का कार्य 20 जुलाई 2026 तक पूरा होने की संभावना है।
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विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रतियोगी छात्र प्रतिनिधिमंडल और उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने उत्तर कुंजी में त्रुटियों का दावा किया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि बाल मनोविज्ञान, हिंदी, संस्कृत, गणित और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों के करीब 15 प्रश्नों के उत्तर गलत दिए गए हैं। प्रतियोगी छात्र प्रतिनिधिमंडल के शीतला प्रसाद ओझा ने विशेष रूप से 2 जुलाई की परीक्षा में कई प्रश्नों को विवादित बताया है, जबकि बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव ने भी समान रूप से उत्तर कुंजी में सुधार की मांग की है।
फिलहाल, लाखों अभ्यर्थी अब विषय विशेषज्ञों की रिपोर्ट और आयोग के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं, जो उनके परीक्षा परिणाम की दिशा तय करेगा।


