उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित शिक्षक समायोजन (सरप्लस शिक्षक समायोजन) मामले में 6 जुलाई 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से 3 जुलाई 2026 को आदेश जारी किया गया है।
जारी आदेश के अनुसार, विशेष अपील संख्या-398/2026 (सौरभ कुमार सिंह एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य) की सुनवाई के दौरान माननीय उच्च न्यायालय ने विभाग से जनपदवार विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसी के अनुपालन में सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को तत्काल आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
शासन ने सभी जिलों से चार अलग-अलग प्रारूपों में जानकारी मांगी है। इनमें प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्वीकृत पद, वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों की संख्या, छात्रों की वास्तविक संख्या, आरटीई मानकों के अनुसार आवश्यक शिक्षकों की संख्या तथा सरप्लस शिक्षकों का पूरा विवरण शामिल है। इसके अतिरिक्त शून्य शिक्षक तथा एकल शिक्षक वाले विद्यालयों का भी अलग से विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी जनपद यह जानकारी 4 जुलाई 2026 को शाम 4:00 बजे तक निर्धारित ई-मेल पर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं, ताकि 6 जुलाई को हाईकोर्ट में विभाग की ओर से तथ्यात्मक एवं अद्यतन जानकारी प्रस्तुत की जा सके।
इसके साथ ही 3 जुलाई 2026 को शाम 7:30 बजे अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सभी संबंधित अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें समायोजन मामले की सुनवाई को लेकर रणनीति एवं आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को बैठक में सभी आवश्यक आंकड़ों के साथ समय से उपस्थित रहने के निर्देश भी दिए गए।
माना जा रहा है कि हाईकोर्ट द्वारा मांगी गई विद्यालयवार और शिक्षकवार जानकारी शिक्षक समायोजन मामले की आगामी सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऐसे में सभी जिलों में युद्धस्तर पर आंकड़े जुटाने और उनका सत्यापन करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
6 जुलाई 2026 को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर प्रदेश के हजारों शिक्षकों की नजरें टिकी हुई हैं। इस सुनवाई में विभाग द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले आंकड़े और न्यायालय की आगामी टिप्पणियां समायोजन प्रक्रिया की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती हैं।


