शिक्षा विभाग की नई गाइडलाइन के अनुसार, अब जिन प्राथमिक विद्यालयों में पहली से पांचवीं कक्षा तक कुल नामांकन 60 या उससे कम है, वहां केवल दो शिक्षक ही तैनात किए जाएंगे। इस व्यवस्था के अंतर्गत इन दो शिक्षकों में एक प्रधानाध्यापक (हेडमास्टर) भी शामिल होंगे, जिसके परिणामस्वरूप शेष शिक्षक पर पांचों कक्षाओं को पढ़ाने का पूरा जिम्मा आ जाएगा।
यह मानक स्थानांतरण प्रक्रिया से लेकर रेशनलाइजेशन के दौरान छात्र-शिक्षक अनुपात को बनाए रखने के लिए निर्धारित किया गया है। इस संबंध में विभाग ने जिलों से रिपोर्ट भी मांगी है, जिसके बाद से शिक्षक और उनके संगठन इस नई नीति का विरोध कर रहे हैं। शिक्षक संघों का कहना है कि जहां एक प्रभारी और एक शिक्षक होंगे, वहां पांच अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों की पढ़ाई कैसे संभव होगी, भले ही बच्चों की संख्या कम क्यों न हो।
इस नई गाइडलाइन का असर मुजफ्फरपुर सहित हर जिले में देखने को मिल रहा है, जहां ऐसे स्कूलों की संख्या बड़ी तादाद में है। जिले में कुल लगभग डेढ़ हजार प्राथमिक स्कूल हैं और हर प्रखंड में ऐसे 20 से 50 स्कूल हैं, जिनमें नामांकित बच्चों की संख्या 60 या उससे कम है। स्थिति यह है कि कुछ प्रखंडों में 10 से 20 ऐसे स्कूल हैं जहां नामांकित बच्चों की संख्या 40 से भी कम है।
आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की संख्या काफी सीमित है। उदाहरण के लिए, गायघाट के प्राथमिक स्कूल कन्या में 57, प्राथमिक स्कूल दुबियाही लक्ष्मी में 50, प्रा.वि. सूर्य नयाटोला में 51 और नया प्रावि जारंगडीह हरिजन टोला में 56 बच्चे नामांकित हैं। वहीं, प्राथमिक विद्यालय हरकौली मुसहर में 40, प्राथमिक विद्यालय मुस्लिम टोला में 41, सुगई पट्टी स्कूल में 42, प्राथमिक विद्यालय भुसरा गर्ल में 41, मीनापुर के प्राथमिक विद्यालय हरिजन में 35 और प्राथमिक विद्यालय बालिका में महज 38 बच्चे ही नामांकित हैं।


