Type Here to Get Search Results !

शिक्षा सेवकों और तालीमी मरकज के दायित्वों का विस्तार: अब बच्चों की 75% उपस्थिति सुनिश्चित करना होगा प्राथमिक लक्ष्य

Sir Ji Ki Pathshala

महादलित, दलित, अल्पसंख्यक एवं अति पिछड़ा वर्ग के समुदायों में शिक्षा की अलख जगाने के उद्देश्य से शिक्षा सेवकों और तालीमी मरकज के दायित्वों में व्यापक विस्तार किया गया है। अब इनकी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाते हुए बच्चों की शिक्षा और विद्यालय में उनकी उपस्थिति पर विशेष जोर दिया गया है।

​जन शिक्षा के अपर सचिव सह निदेशक द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) को जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, शिक्षा सेवकों को अब अपने कार्यक्षेत्र में छह से 14 वर्ष तक के बच्चों की नियमित विद्यालय उपस्थिति को 75 प्रतिशत तक सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्हें अपने क्षेत्र में उन बच्चों की पहचान करनी होगी जो नियमित विद्यालय नहीं आते हैं, और उन्हें स्कूल से जोड़ने का कार्य करना होगा। इसके अलावा, विद्यालय के शुरुआती दो घंटों के दौरान बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने में वे सक्रिय सहयोग प्रदान करेंगे।

शिक्षा सेवक और साक्षरता अभियान

​शिक्षा सेवकों के लिए निर्धारित नई कार्ययोजना में शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक दोनों प्रकार की जिम्मेदारियां शामिल हैं। स्कूल अवधि शुरू होने से पहले बच्चों के लिए कोचिंग और काउंसिलिंग की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, यदि विद्यालय में किसी कारणवश शिक्षक अनुपस्थित रहते हैं, तो ऐसी स्थिति में कक्षा एक और दो का संचालन भी शिक्षा सेवकों द्वारा किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मध्याह्न भोजन योजना, अन्य गैर-शैक्षणिक गतिविधियों तथा बच्चों के स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम में भी शिक्षा सेवकों का सहयोग विद्यालय प्रशासन को प्राप्त होगा।

​साक्षरता अभियान को गति देने के लिए भी एक विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसके तहत शिक्षा सेवक प्रतिदिन दोपहर में एक घंटे 15 से 45 वर्ष आयु वर्ग की असाक्षर महिलाओं को साक्षर बनाने का कार्य करेंगे। साथ ही, टोले में संपर्क अभियान चलाकर वे लोगों को शिक्षा और सामाजिक सुधार के प्रति जागरूक भी करेंगे।

​इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि शिक्षा सेवकों को सौंपी गई इन नई जिम्मेदारियों से न केवल विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि साक्षरता अभियान भी जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनेगा। शासन ने इन निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया है। 

Top Post Ad

Bottom Post Ad