लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा कराए गए टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिस (TLP) सर्वे ने सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर किए हैं। सर्वे के अनुसार, कक्षा में बच्चों का लगभग 26 प्रतिशत समय बिना किसी प्रभावी शिक्षण गतिविधि के ही बीत जाता है, जिससे वास्तविक अधिगम (Learning) का समय काफी कम हो जाता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यदि कक्षा में बच्चों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाई जाए और शिक्षण पद्धति को अधिक विद्यार्थी-केंद्रित बनाया जाए, तो सीखने के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
200 विद्यालयों और 13 हजार बच्चों पर किया गया अध्ययन
यह सर्वे प्रदेश के बहराइच, मिर्जापुर, रायबरेली और बरेली जनपदों के 200 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में किया गया। अध्ययन के दौरान कक्षा 1 और 2 की 40 मिनट की कक्षाओं का गहन अवलोकन किया गया। प्रत्येक तीन मिनट के अंतराल पर पांच-पांच विद्यार्थियों की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया गया, जिसके आधार पर लगभग 13,000 बच्चों के सीखने के व्यवहार और कक्षा में उनकी सहभागिता का विश्लेषण किया गया।
कक्षा में बच्चों का समय कैसे बीतता है?
सर्वे के अनुसार बच्चों का सबसे अधिक समय ब्लैकबोर्ड, पाठ्यपुस्तक या सहपाठियों को देखकर लिखने में व्यतीत होता है। इसके अलावा वे सामूहिक रूप से उत्तर देने, अभ्यास पुस्तिका पूरी करने और शिक्षक को सुनने जैसी गतिविधियों में भी समय लगाते हैं। हालांकि सबसे चिंताजनक तथ्य यह सामने आया कि करीब 26 प्रतिशत समय बच्चों का ऐसी गतिविधियों में बीत जाता है, जिनका प्रभावी शिक्षण या सीखने से सीधा संबंध नहीं होता। यही कारण है कि वास्तविक अधिगम का समय अपेक्षाकृत कम रह जाता है।
रिपोर्ट में सुधार के लिए दिए गए महत्वपूर्ण सुझाव
टीएलपी सर्वे रिपोर्ट में विद्यालयों में विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण (Student-Centric Learning) को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। रिपोर्ट का मानना है कि बच्चों को केवल सुनने या लिखने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें चर्चा, गतिविधियों और समूह कार्य में अधिक शामिल किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही बहुस्तरीय (Multigrade) कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देने की भी सिफारिश की गई है, ताकि एक ही कक्षा में अलग-अलग स्तर के विद्यार्थियों को प्रभावी ढंग से पढ़ाया जा सके। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कक्षा का अधिकतम समय सीखने की गतिविधियों में लगाया जाए, जिससे बच्चों के अधिगम परिणाम बेहतर हो सकें।
सीखने की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में पहल
बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि सरकारी विद्यालयों में केवल विद्यालयी उपस्थिति बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कक्षा में प्रभावी शिक्षण समय बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है। यदि शिक्षण प्रक्रिया को अधिक सहभागितापूर्ण बनाया जाए और बच्चों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए, तो सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।
टीएलपी सर्वे की यह रिपोर्ट विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि भविष्य की शैक्षिक रणनीतियों में केवल नामांकन और उपस्थिति ही नहीं, बल्कि कक्षा में वास्तविक सीखने के समय और शिक्षण की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देना होगा। इससे न केवल बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि सरकारी विद्यालयों के शैक्षिक परिणामों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।


