नई दिल्ली। आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले करोड़ों करदाताओं के लिए अच्छी खबर है। आयकर विभाग की नई ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग व्यवस्था के कारण अब कई मामलों में इनकम टैक्स रिफंड पहले की तुलना में काफी तेजी से जारी किया जा रहा है। खासकर ऐसे वेतनभोगी (Salary) करदाता, जिनकी आय केवल सैलरी से है और जिन्होंने बिना किसी गलती के ITR दाखिल किया है, उन्हें ई-वेरिफिकेशन के बाद बहुत कम समय में रिफंड मिल रहा है। हालांकि, 24 घंटे में रिफंड मिलना हर करदाता के लिए तय नहीं है।
आयकर विभाग के Centralized Processing Centre (CPC) में रिटर्न की प्रोसेसिंग पूरी तरह डिजिटल और ऑटोमेटेड तरीके से की जा रही है। इससे रिटर्न की जांच और रिफंड जारी करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी तेज हो गई है। यदि ITR में कोई त्रुटि नहीं है, बैंक खाता Pre-Validated है और रिटर्न का समय पर e-Verification कर दिया गया है, तो रिफंड जल्दी मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
रिफंड जल्दी पाने के लिए करदाताओं को ITR भरने से पहले Form 16, AIS और Form 26AS का मिलान कर लेना चाहिए। साथ ही PAN और Aadhaar लिंक होना, सही बैंक खाते की जानकारी देना तथा रिटर्न दाखिल करने के तुरंत बाद e-Verification करना भी बेहद जरूरी है। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से रिफंड में अनावश्यक देरी से बचा जा सकता है।
वर्तमान में वेतनभोगी और सामान्य व्यक्तिगत करदाताओं के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित है, जबकि Non-Audit श्रेणी के व्यवसायों और फर्मों के लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है। समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करने से लेट फीस और अन्य परेशानियों से बचा जा सकता है।
ध्यान रखें कि 24 घंटे में रिफंड मिलने का दावा सभी मामलों पर लागू नहीं होता। रिफंड मिलने का समय आपकी आय, टैक्स रिकॉर्ड, दस्तावेजों के सत्यापन और आयकर विभाग की प्रोसेसिंग पर निर्भर करता है। इसलिए जल्दबाजी में गलत जानकारी भरने के बजाय सही और पूर्ण विवरण के साथ ITR दाखिल करना सबसे बेहतर विकल्प है।


