फैमिली यूनिट 5 करने की मांग तेज, क्या कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में होगा बड़ा इजाफा?
नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच लगातार चर्चाएं जारी हैं। फिटमेंट फैक्टर के साथ-साथ अब 'फैमिली यूनिट' का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान समय की जरूरतों को देखते हुए फैमिली यूनिट को 3 से बढ़ाकर 5 किया जाना चाहिए। यदि यह मांग स्वीकार होती है, तो न्यूनतम बेसिक वेतन में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।
क्या होती है फैमिली यूनिट?
फैमिली यूनिट वह मानक है, जिसके आधार पर वेतन आयोग यह तय करता है कि एक कर्मचारी और उसके परिवार के न्यूनतम जीवन-यापन के लिए कितनी आय आवश्यक है। 7वें वेतन आयोग में फैमिली यूनिट 3 मानी गई थी, जिसमें कर्मचारी, जीवनसाथी और दो बच्चों को आधार बनाया गया था।
हालांकि कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि आज के समय में अधिकांश कर्मचारियों पर माता-पिता और अन्य आश्रित सदस्यों की जिम्मेदारी भी होती है। ऐसे में वर्तमान फैमिली यूनिट वास्तविक परिस्थितियों को पूरी तरह नहीं दर्शाती।
क्यों बढ़ रही है फैमिली यूनिट बढ़ाने की मांग?
पिछले कुछ वर्षों में महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और दैनिक जरूरतों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ा है। कर्मचारियों का कहना है कि परिवार का खर्च पहले की तुलना में काफी अधिक हो गया है। इसलिए नई वेतन संरचना तय करते समय परिवार के वास्तविक आकार को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
बेसिक वेतन पर कितना पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फैमिली यूनिट बढ़ाई जाती है, तो न्यूनतम वेतन तय करने का पूरा गणित बदल सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि 7वें वेतन आयोग में फैमिली यूनिट अधिक मानी गई होती, तो 18,000 रुपये की जगह न्यूनतम बेसिक वेतन लगभग 27,600 रुपये तक हो सकता था। यानी करीब 9,000 रुपये का अंतर देखने को मिलता।
अब यदि 8वां वेतन आयोग फैमिली यूनिट बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में पहले से अधिक बढ़ोतरी संभव हो सकती है।
अभी नहीं हुआ कोई अंतिम फैसला
फिलहाल फैमिली यूनिट को 5 करने पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। यह कर्मचारी संगठनों की मांग है, जिस पर 8वां वेतन आयोग विचार कर सकता है। अंतिम सिफारिशें और सरकार का निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कर्मचारियों के वेतन में कितना इजाफा होगा।
यदि यह मांग मंजूर होती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी, भत्तों और पेंशन पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।


