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सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को सलाह: कक्षा 9 से नहीं, कक्षा 5 या 6 से शुरू हो तीसरी भाषा

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मौखिक रूप से सुझाव दिया है कि छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक बोझ डालने से बचने के लिए तीसरी भाषा की पढ़ाई कक्षा 9 से शुरू न की जाए। अदालत ने कहा कि यदि सरकार नई भाषा लागू करना चाहती है तो इसकी शुरुआत कक्षा 5 या 6 से करना अधिक उचित होगा, ताकि बच्चे धीरे-धीरे भाषा सीख सकें।

गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि कक्षा 9 में छात्रों पर पहले से ही पढ़ाई का दबाव काफी बढ़ जाता है। ऐसे में नई भाषा जोड़ने से विद्यार्थियों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अदालत का मानना है कि छोटी कक्षाओं में भाषा सीखना अपेक्षाकृत आसान होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कक्षा 9 के बजाय कक्षा 5 या 6 से तीसरी भाषा शुरू करने की सलाह दी।

न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि यदि तीसरी भाषा को शिक्षा प्रणाली में शामिल करना है तो इसे कक्षा 5 या 6 से शुरू करने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे छात्रों को भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और उन पर अनावश्यक शैक्षणिक दबाव भी नहीं पड़ेगा।

अदालत ने टिप्पणी की कि कम उम्र के बच्चे नई भाषाओं को अधिक सहजता से सीखते हैं। यदि तीसरी भाषा की शुरुआत प्राथमिक या उच्च प्राथमिक स्तर से की जाए तो छात्र उसे बेहतर ढंग से समझ और अपनाने में सक्षम होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षा से जुड़े किसी भी निर्णय में छात्रों के हित और उनकी सीखने की क्षमता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। भाषा नीति लागू करते समय विद्यार्थियों के मानसिक और शैक्षणिक दबाव को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद तीसरी भाषा के मुद्दे पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई भाषा की शुरुआत शुरुआती कक्षाओं से करने पर विद्यार्थियों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है, जबकि उच्च कक्षाओं में इसे लागू करने से अतिरिक्त दबाव पैदा होने की आशंका रहती है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को केवल मौखिक सुझाव दिया है कि तीसरी भाषा लागू करने के लिए कक्षा 9 के बजाय कक्षा 5 या 6 को प्राथमिकता दी जाए।

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