व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने निदेशक प्रशिक्षण का नया पद सृजित कर दिया है। इस पद पर अब विशेष सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। शासन की ओर से इसके संबंध में आदेश भी जारी कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इस फैसले से प्रशिक्षण निदेशालय के कामकाज में तेजी आएगी और विभागीय योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सकेगा।
शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब तक प्रशिक्षण एवं सेवायोजन विभाग में अपर निदेशक (प्रशासन) का जो पद पीसीएस अधिकारी स्तर का था, उसे समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर विशेष सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी को निदेशक प्रशिक्षण बनाया जाएगा। इससे विभाग को उच्च स्तर का प्रशासनिक नेतृत्व मिलेगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
वर्तमान में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के विशेष सचिव अभिषेक सिंह कार्यवाहक निदेशक प्रशिक्षण का दायित्व संभाल रहे हैं। नए पद के सृजन के बाद जल्द ही पूर्णकालिक निदेशक प्रशिक्षण की नियुक्ति किए जाने की संभावना है, जिससे विभाग का संचालन नियमित और व्यवस्थित ढंग से हो सकेगा।
गौरतलब है कि लगभग डेढ़ वर्ष पहले राज्य सरकार ने प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय को दो अलग-अलग भागों में विभाजित करने का निर्णय लिया था। इसके बाद सेवायोजन निदेशालय को श्रम एवं सेवायोजन विभाग के अधीन कर दिया गया, जबकि प्रशिक्षण निदेशालय को व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के अधीन संचालित किया जा रहा है। हालांकि, दोनों निदेशालयों के कर्मचारियों और प्रशासनिक व्यवस्था का पूर्ण बंटवारा अभी तक नहीं हो पाया है।
सरकार का मानना है कि पूर्णकालिक निदेशक प्रशिक्षण की नियुक्ति के बाद दोनों निदेशालयों के कर्मचारियों और संसाधनों का बंटवारा व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। इससे विभागीय कार्यों में स्पष्टता आएगी, प्रशासनिक समन्वय बेहतर होगा और प्रशिक्षण से जुड़ी योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
विशेष सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी को निदेशक प्रशिक्षण बनाए जाने का यह निर्णय राज्य की कौशल विकास एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल विभाग की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन, निगरानी और नीति निर्माण में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिलने की उम्मीद है।


