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मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना: आश्रितों को लेकर भ्रम दूर करें, जानें कौन होगा पात्र और किसे नहीं मिलेगा लाभ

Sir Ji Ki Pathshala

उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना परिषदीय शिक्षकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। योजना के क्रियान्वयन के साथ ही शिक्षकों के बीच सबसे अधिक सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि आश्रित (Dependent) के रूप में किन्हें जोड़ा जा सकता है और किन परिस्थितियों में आवेदन करना उचित होगा।

मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना में आश्रित जोड़ने के नियम

इसी विषय पर शिक्षकों के बीच साझा किए जा रहे मार्गदर्शन के आधार पर विभिन्न परिस्थितियों को समझना आवश्यक है। हालांकि अंतिम निर्णय शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही मान्य होगा।

केस-1: पति-पत्नी दोनों परिषदीय शिक्षक हों

यदि पति और पत्नी दोनों ही बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत परिषदीय शिक्षक हैं, तो दोनों को अलग-अलग आवेदन करना चाहिए। इससे दोनों को अलग-अलग कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ प्राप्त हो सकेगा।

ऐसी स्थिति में बच्चों का नाम पति या पत्नी, किसी एक के आवेदन में आश्रित के रूप में जोड़ना पर्याप्त होगा। इससे दोनों योजनाओं का अलग-अलग लाभ लेने की संभावना बनी रहती है।

केस-2: पति या पत्नी किसी अन्य सरकारी विभाग में कार्यरत हों

यदि पति या पत्नी में से कोई एक अन्य सरकारी विभाग में कार्यरत है और उसके पास पहले से CGHS, राज्य कर्मचारी स्वास्थ्य योजना अथवा पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना जैसी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध है, तो सामान्यतः मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस योजना में अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं मानी जा रही है।

ऐसी स्थिति में पहले से उपलब्ध सरकारी स्वास्थ्य योजना का लाभ जारी रखा जा सकता है।

केस-3: एक परिषदीय शिक्षक और दूसरा निजी क्षेत्र में कार्यरत हो

यदि पति या पत्नी में से एक परिषदीय शिक्षक है और दूसरा निजी संस्था में कार्यरत है, तो यह देखना आवश्यक होगा कि वह व्यक्ति आश्रित की पात्रता पूरी करता है या नहीं।

यदि निजी क्षेत्र में कार्यरत व्यक्ति की मासिक आय ₹3500 से अधिक है अथवा वह आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करता है, तो सामान्यतः उसे आश्रित की श्रेणी में शामिल नहीं किया जाएगा। इसलिए ऐसे व्यक्ति का नाम आश्रित के रूप में जोड़ना उचित नहीं माना जा रहा है।

केस-4: माता या पिता पेंशनधारक हों

यदि माता या पिता में से कोई एक पेंशन प्राप्त कर रहा है और पेंशन की राशि निर्धारित सीमा से अधिक है, तो ऐसी स्थिति में दोनों को आश्रित की श्रेणी में शामिल करना संभव नहीं होगा।

पेंशनधारक व्यक्ति स्वयं आय प्राप्त कर रहा होता है, इसलिए वह आश्रित की पात्रता से बाहर माना जा सकता है।

यदि पहले से निजी हेल्थ इंश्योरेंस है तो क्या करें?

जिन शिक्षकों की पहले से निजी स्वास्थ्य बीमा (Private Health Insurance Policy) चल रही है, उनके लिए फिलहाल उस पॉलिसी को बंद करने की आवश्यकता नहीं है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि निजी स्वास्थ्य बीमा जारी रखते हुए मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना में भी आवेदन किया जा सकता है। इससे भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर दोनों विकल्प उपलब्ध रहेंगे।

जिनका पहले से आयुष्मान कार्ड बना है

यदि किसी शिक्षक या पात्र सदस्य का पहले से आयुष्मान भारत कार्ड बना हुआ है, तो दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

आवेदन से पहले इन बातों का रखें विशेष ध्यान

स्थिति क्या करें
पति-पत्नी दोनों परिषदीय शिक्षक दोनों अलग-अलग आवेदन करें, बच्चों को किसी एक के साथ जोड़ें
दूसरे सरकारी विभाग में CGHS/राज्य कर्मचारी योजना का लाभ सामान्यतः अलग आवेदन की आवश्यकता नहीं
पति/पत्नी निजी नौकरी में एवं आय ₹3500 से अधिक आश्रित के रूप में शामिल न करें
माता या पिता पेंशनधारक सामान्यतः आश्रित की श्रेणी में शामिल नहीं होंगे
निजी हेल्थ इंश्योरेंस पहले से है पॉलिसी जारी रखें और योजना में भी आवेदन करें
पहले से आयुष्मान कार्ड बना है दोबारा आवेदन न करें

महत्वपूर्ण सूचना

उपरोक्त जानकारी शिक्षकों के बीच साझा किए जा रहे मार्गदर्शन पर आधारित है। मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के संबंध में अंतिम एवं आधिकारिक निर्णय शासनादेश, विभागीय दिशा-निर्देश तथा संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी आदेशों के अनुसार ही मान्य होगा। आवेदन करने से पहले नवीनतम शासनादेश अवश्य देखें।