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UPTET 2026 यूपीटेट 2026 के प्रोविजनल Answer Key के विवादित प्रश्न और ऑनलाइन आपत्ति

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET 2026) की प्रारंभिक उत्तर कुंजी जारी होने के बाद अभ्यर्थियों ने कई प्रश्नों पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों और परीक्षार्थियों का दावा है कि कुछ प्रश्नों के उत्तर मानक पुस्तकों, अधिनियमों और प्रामाणिक स्रोतों से मेल नहीं खाते। इसी कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी ऑनलाइन माध्यम से अपनी आपत्तियां आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।

UPTET 2026 यूपीटेट 2026 के प्रोविजनल आंसर-की के विवादित प्रश्न और ऑनलाइन आपत्ति

आयोग ने भी अभ्यर्थियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर साक्ष्यों सहित ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया है। यदि विशेषज्ञ समिति जांच के दौरान किसी प्रश्न या उत्तर को गलत पाती है, तो संबंधित प्रश्न को संशोधित या निरस्त किया जा सकता है।

संस्कृत के ऊष्म वर्ण वाले प्रश्न पर विवाद

प्राथमिक स्तर की दूसरी पाली में संस्कृत द्वितीय भाषा के प्रश्नपत्र में ऊष्म वर्ण से संबंधित एक प्रश्न विवाद का विषय बना हुआ है।

आयोग द्वारा जारी उत्तर कुंजी में इस प्रश्न का उत्तर 'न' माना गया है। जबकि अभ्यर्थियों का कहना है कि संस्कृत व्याकरण के अनुसार 'श, ष, स और ह' ऊष्म वर्ण होते हैं क्योंकि इनके उच्चारण के समय मुख से गर्म वायु निकलती है। अभ्यर्थियों के अनुसार इस प्रश्न का सही उत्तर 'ष' होना चाहिए।

आपदा प्रबंधन की परिभाषा पर भी आपत्ति

तीन जुलाई को आयोजित जूनियर स्तर की परीक्षा के प्रश्न संख्या 146 पर भी बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज की गई हैं।

उत्तर कुंजी में आयोग ने विकल्प (ए) को सही माना है, जबकि अभ्यर्थियों का कहना है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 2(डी) तथा UNDRR की मानक परिभाषा के अनुसार सही उत्तर विकल्प (सी) होना चाहिए।

अभ्यर्थियों का तर्क है कि विकल्प (ए) सामान्य आपातकालीन स्थिति का वर्णन करता है जिसे स्थानीय संसाधनों से नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि विकल्प (सी) आपदा की वास्तविक कानूनी परिभाषा से मेल खाता है।

तत्सम-तद्भव प्रश्न पर विशेषज्ञों की अलग राय

जूनियर स्तर की प्रथम पाली के हिंदी प्रश्नपत्र में तत्सम-तद्भव युग्म से संबंधित प्रश्न भी विवादों में है।

आयोग ने उत्तर कुंजी में 'माता–मां' को सही उत्तर माना है।

वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि मानक हिंदी व्याकरण और प्रतिष्ठित शब्दकोशों के अनुसार 'अग्नि–आग' तथा 'अक्षि–आंख' भी प्रमाणित तत्सम-तद्भव युग्म हैं। ऐसे में या तो दोनों विकल्पों को सही माना जाए अथवा प्रश्न को निरस्त किया जाए।

मुहावरे के अर्थ वाले प्रश्न पर भी विवाद

जूनियर स्तर की प्रथम पाली के हिंदी प्रश्नपत्र के प्रश्न संख्या 53 में 'एक आंख से देखना' मुहावरे का अर्थ पूछा गया था।

उत्तर कुंजी में आयोग ने इसका उत्तर 'अंधाधुंध करना' दिया है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि राजपाल हिंदी मुहावरा एवं लोकोक्ति कोश तथा हरदेव बाहरी कृत बृहत् हिंदी मुहावरा कोश के अनुसार इस मुहावरे का सही अर्थ 'सभी के साथ समान व्यवहार करना या पक्षपात न करना' होता है। इसलिए सही उत्तर विकल्प (सी) होना चाहिए।

कब तक दर्ज करा सकते हैं आपत्ति?

आयोग ने उत्तर कुंजी पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए 14 जुलाई 2026 की रात 12:00 बजे तक का समय निर्धारित किया है। निर्धारित समय के बाद किसी भी प्रकार की आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी।

सभी आपत्तियां केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार की जाएंगी। ऑफलाइन आवेदन या ईमेल के माध्यम से भेजी गई आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा।

आपत्ति दर्ज करते समय रखें इन बातों का ध्यान

  • प्रत्येक आपत्ति के साथ मानक पुस्तक, अधिनियम या आधिकारिक स्रोत का स्पष्ट प्रमाण संलग्न करें।
  • केवल तथ्यात्मक एवं प्रमाणित आपत्तियां ही दर्ज करें।
  • अंतिम समय का इंतजार न करें, क्योंकि वेबसाइट पर अधिक ट्रैफिक होने से तकनीकी समस्या आ सकती है।
  • आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ने के बाद ही आपत्ति दर्ज करें।

गलत प्रश्न पाए जाने पर क्या होगा?

यदि विशेषज्ञ समिति की समीक्षा में किसी प्रश्न या उत्तर कुंजी में त्रुटि पाई जाती है, तो आयोग संबंधित प्रश्न का उत्तर संशोधित कर सकता है या आवश्यकता पड़ने पर प्रश्न को निरस्त भी कर सकता है। ऐसे निर्णय का लाभ सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से दिया जाएगा।

अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

जिन अभ्यर्थियों को उत्तर कुंजी के किसी प्रश्न पर आपत्ति है, वे 14 जुलाई 2026 की रात 12 बजे से पहले अपने प्रामाणिक साक्ष्यों के साथ ऑनलाइन आपत्ति अवश्य दर्ज करा दें। समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी प्रकार का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।