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आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों पर सख्ती, एक-दो भर्ती में नहीं खर्च कर सकेंगे पूरी 5 लाख रुपये की राशि

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (साचीज) अब ऐसी व्यवस्था लागू करने जा रही है, जिससे कोई भी निजी अस्पताल एक या दो बार मरीज को भर्ती कर योजना के तहत मिलने वाली पूरी पांच लाख रुपये की वार्षिक उपचार राशि खर्च नहीं कर सकेगा। सरकार का उद्देश्य योजना के बजट का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना और पात्र लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है।

प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन हाल के दिनों में मिली शिकायतों और जांच के दौरान कई निजी अस्पतालों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि कुछ अस्पताल मरीजों को बार-बार भर्ती दिखाकर या अनावश्यक उपचार देकर आयुष्मान योजना की राशि तेजी से खर्च कर रहे हैं। इससे न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि जरूरतमंद मरीजों के हित भी प्रभावित हो रहे हैं।

आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों पर सख्ती, नए नियम लागू

इन्हीं अनियमितताओं को रोकने के लिए राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने निजी अस्पतालों को उनकी कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड के आधार पर तीन श्रेणियों में विभाजित करने का निर्णय लिया है। इनमें बी और सी श्रेणी के अस्पतालों की विशेष निगरानी की जाएगी। इन अस्पतालों के इलाज, भर्ती, बिलिंग और क्लेम की नियमित समीक्षा होगी तथा संदिग्ध मामलों की गहन जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ अस्पतालों में बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के सर्जरी की गई और मरीजों को अधिक समय तक आईसीयू में भर्ती दिखाकर अतिरिक्त भुगतान का दावा किया गया। कई मामलों में अस्पतालों के पास आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं होने के बावजूद आईसीयू के नाम पर बिलिंग की गई। वहीं कुछ अस्पतालों में गंभीर सर्जरी के लिए जरूरी आधुनिक उपकरण और विशेषज्ञ चिकित्सक भी उपलब्ध नहीं थे, फिर भी बाहर से चिकित्सकों को बुलाकर ऑपरेशन किए गए और योजना के तहत भुगतान का दावा किया गया।

सरकार का मानना है कि अस्पतालों की श्रेणीवार निगरानी, क्लेम की सघन जांच और डिजिटल सत्यापन व्यवस्था लागू होने से फर्जी बिलिंग, अनावश्यक भर्ती और उपचार में होने वाली गड़बड़ियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। इससे आयुष्मान योजना के बजट का सही उपयोग सुनिश्चित होगा और वास्तविक जरूरतमंद मरीजों को बेहतर तथा पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आयुष्मान योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। इसलिए किसी भी अस्पताल द्वारा नियमों का उल्लंघन या योजना का दुरुपयोग किए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद निजी अस्पतालों की जवाबदेही भी पहले की तुलना में अधिक बढ़ जाएगी और लाभार्थियों को अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद है।

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