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कौशल प्रशिक्षण के बाद 90 दिन में नौकरी, यूपी सरकार का बड़ा फैसला

Sir Ji Ki Pathshala

कौशल प्रशिक्षण के बाद 90 दिन में नौकरी दिलाने की तैयारी, प्लेसमेंट नहीं कराने वाली कंपनियों पर होगी कार्रवाई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने कौशल विकास कार्यक्रम को अधिक प्रभावी और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब कौशल प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को 90 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया है। यदि प्रशिक्षण देने वाली संस्था या कंपनी निर्धारित अवधि में प्रशिक्षित युवाओं का प्लेसमेंट कराने में विफल रहती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रशिक्षण केवल प्रमाणपत्र तक सीमित न रहे, बल्कि युवाओं को समयबद्ध रोजगार भी मिले।

कौशल प्रशिक्षण पूरा होने के 90 दिन के भीतर नौकरी, यूपी सरकार का नया नियम

उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने प्रशिक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए नई निगरानी व्यवस्था लागू की है। इसके तहत प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। मिशन मुख्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से प्रतिदिन प्रशिक्षण केंद्रों की रिपोर्ट की समीक्षा की जा रही है, ताकि कहीं भी अनियमितता मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

प्रशिक्षण केंद्रों पर पढ़ाई की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इससे प्रशिक्षण की वास्तविक स्थिति पर नजर रखना आसान हुआ है और फर्जी उपस्थिति या अन्य गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगी है। जिन संस्थाओं के खिलाफ लगातार शिकायतें या अनियमितताएं सामने आ रही हैं, उन्हें चिन्हित कर मिशन से बाहर किया जा रहा है। वहीं छोटी-मोटी कमियां मिलने पर संबंधित संस्थानों के प्रशिक्षण बैच कम किए जा रहे हैं और उन्हें सुधार के लिए चेतावनी भी दी जा रही है।

युवाओं के रोजगार की निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित 'कौशल दर्पण' डैशबोर्ड का भी उपयोग किया जा रहा है। इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से जिलों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर प्रत्येक प्रशिक्षण प्रदाता संस्था के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जा रहा है। इसके अलावा प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं के रोजगार की स्थिति पर एक वर्ष तक नजर रखी जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें स्थायी रोजगार मिल रहा है या नहीं।

आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल युवाओं के लिए प्रतिदिन आठ घंटे का प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही उपस्थिति को लेकर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं। प्रशिक्षणार्थियों को कम से कम 70 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज करानी होगी। निर्धारित उपस्थिति पूरी करने वाले युवाओं को ही रोजगार मेलों में भाग लेने और नौकरी के अवसर प्राप्त करने का मौका मिलेगा।

उत्तर प्रदेश सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से कौशल विकास कार्यक्रम की गुणवत्ता में सुधार होगा, प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं की जवाबदेही बढ़ेगी और युवाओं को समयबद्ध एवं बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने में सफलता मिलेगी। इससे प्रदेश के अधिक से अधिक युवा कौशल प्रशिक्षण के बाद आत्मनिर्भर बन सकेंगे और उद्योगों को भी प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा।