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68500 शिक्षक भर्ती 2018: OBC को 5% छूट पर आयोग का बड़ा फैसला, संशोधित परिणाम की सिफारिश

Sir Ji Ki Pathshala

68500 सहायक अध्यापक भर्ती 2018: OBC अभ्यर्थियों को 5% अर्हता छूट पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का बड़ा फैसला, संशोधित परिणाम जारी करने की दोबारा संस्तुति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 68500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2018 से जुड़े अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) अभ्यर्थियों के लिए एक बार फिर महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने इस भर्ती से संबंधित वाद संख्या-96-शि0उ0-2019 में सुनवाई करते हुए अपने पूर्व निर्णय को पुनः बरकरार रखा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि OBC अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत अर्हता अंक (Qualifying Marks) की छूट दिया जाना पूरी तरह विधिसम्मत एवं संवैधानिक है।

68500 सहायक अध्यापक भर्ती 2018 में OBC अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत अर्हता छूट पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का निर्णय

आयोग ने शासन को अपनी पूर्व संस्तुति के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करते हुए संशोधित परीक्षा परिणाम जारी करने तथा पात्र अभ्यर्थियों की सूची आयोग को उपलब्ध कराने की सिफारिश की है। आयोग के इस फैसले से कई वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हजारों अभ्यर्थियों में एक बार फिर उम्मीद जगी है।

16 जून 2026 की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की 16 जून 2026 को आयोजित बैठक में इस मामले पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। आयोग ने उपलब्ध अभिलेखों, शासन द्वारा प्रस्तुत तथ्यों, न्यायालयों के आदेशों तथा संबंधित कानूनी प्रावधानों का परीक्षण करने के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि आयोग द्वारा 5 जनवरी 2022 को दी गई संस्तुति आज भी पूरी तरह प्रभावी है और उसमें किसी प्रकार के संशोधन की आवश्यकता नहीं है।

आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि पूर्व में की गई संस्तुति विधिसम्मत थी और वर्तमान परिस्थितियों में भी उसे लागू किया जाना चाहिए।

OBC अभ्यर्थियों को 40 प्रतिशत अंक पर माना जाए उत्तीर्ण

आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की अधिसूचना तथा उत्तर प्रदेश की आरक्षण व्यवस्था के अनुसार OBC वर्ग के अभ्यर्थियों को अर्हता अंक में 5 प्रतिशत की छूट मिलनी चाहिए।

इसी आधार पर आयोग ने संस्तुति की है कि 68500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2018 में OBC अभ्यर्थियों को 150 अंकों में 60 अंक (40 प्रतिशत) प्राप्त होने पर उत्तीर्ण घोषित किया जाए।

आयोग ने यह भी कहा कि इसी आधार पर परीक्षा परिणाम में आवश्यक संशोधन कर पात्र अभ्यर्थियों की सूची आयोग को भेजी जाए।

अन्य शिक्षक भर्तियों में भी मिल चुकी है यही छूट

आयोग ने अपने आदेश में इस बात पर विशेष जोर दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अन्य कई शिक्षक भर्तियों में OBC अभ्यर्थियों को यही सुविधा प्रदान की थी।

इन भर्तियों में प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • 69000 सहायक अध्यापक भर्ती
  • जूनियर (एडेड) सहायक अध्यापक भर्ती
  • सहायक अध्यापक भर्ती-2021

इन सभी भर्तियों में OBC अभ्यर्थियों को अर्हता अंक में 5 प्रतिशत की छूट प्रदान की गई थी।

आयोग का मानना है कि जब समान परिस्थितियों वाली अन्य भर्तियों में यह लाभ दिया जा चुका है, तब केवल 68500 भर्ती-2018 के अभ्यर्थियों को इससे वंचित रखना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का दिया हवाला

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपने निर्णय में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) तथा अनुच्छेद 16 (सरकारी सेवाओं में समान अवसर का अधिकार) का भी उल्लेख किया है।

आयोग ने कहा कि समान परिस्थितियों वाले OBC अभ्यर्थियों के साथ अलग-अलग व्यवहार करना संविधान की मूल भावना के विपरीत होगा। यदि अन्य शिक्षक भर्तियों में अर्हता छूट प्रदान की गई है तो 68500 भर्ती के अभ्यर्थियों को इससे वंचित रखना समानता के सिद्धांत का उल्लंघन माना जाएगा।

कोई न्यायिक रोक नहीं मिली

आयोग ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए सभी अभिलेखों तथा विभिन्न न्यायालयों के आदेशों का परीक्षण करने के बाद ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया जिससे यह साबित हो कि OBC अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत अर्हता छूट देने पर किसी न्यायालय द्वारा रोक लगाई गई है।

आयोग के अनुसार वर्तमान समय में ऐसी कोई कानूनी बाधा नहीं है जो इस संस्तुति के क्रियान्वयन में अवरोध उत्पन्न करती हो।

अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की सिफारिश

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने केवल अर्हता छूट की संस्तुति ही नहीं दोहराई, बल्कि अपने पूर्व आदेशों का समयबद्ध पालन न होने पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।

आयोग ने कहा कि 5 जनवरी 2022 की संस्तुति तथा उसके अनुपालन संबंधी पत्रों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, जिससे अभ्यर्थियों को अनावश्यक रूप से वर्षों तक प्रतीक्षा करनी पड़ी।

आयोग ने शासन से ऐसे अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई किए जाने की भी सिफारिश की है, जिन्होंने आरक्षण अधिनियम के अनुरूप समयबद्ध कार्रवाई नहीं की।

वर्षों से संघर्ष कर रहे अभ्यर्थियों को मिली नई उम्मीद

68500 सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़े OBC अभ्यर्थी पिछले कई वर्षों से अर्हता छूट की मांग को लेकर विभिन्न मंचों पर संघर्ष कर रहे हैं। आयोग के इस नवीनतम निर्णय ने उन अभ्यर्थियों को एक बार फिर उम्मीद दी है कि अब उनके मामले में सकारात्मक निर्णय लिया जा सकता है।

यदि शासन आयोग की संस्तुति पर कार्रवाई करता है, तो बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी पात्र हो सकते हैं जिन्हें पहले अर्हता अंक के कारण सफल नहीं माना गया था।

अभ्यर्थी पक्ष ने किया स्वागत

इस मामले की पैरवी कर रहे अभ्यर्थी तूफ़ान सिंह ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि आयोग ने लगातार दूसरी बार OBC अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों को स्वीकार किया है।

उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि आयोग की संस्तुतियों को शीघ्र लागू करते हुए संशोधित परीक्षा परिणाम जारी किया जाए तथा पात्र अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की दिशा में तत्काल कार्रवाई की जाए।

आगे क्या हो सकता है?

आयोग का निर्णय अपने आप में महत्वपूर्ण है, लेकिन अंतिम प्रशासनिक कार्रवाई राज्य सरकार और संबंधित विभाग के स्तर पर ही होगी। यदि शासन आयोग की संस्तुतियों को स्वीकार करते हुए आवश्यक आदेश जारी करता है, तो संशोधित परिणाम जारी करने और पात्र अभ्यर्थियों को आगे की चयन प्रक्रिया में शामिल करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।

हालांकि, यदि इस मामले में कोई न्यायिक प्रक्रिया लंबित होती है या भविष्य में न्यायालय से कोई नया आदेश आता है, तो आगे की कार्रवाई उसी के अनुरूप की जाएगी।

निष्कर्ष

68500 सहायक अध्यापक भर्ती-2018 के OBC अभ्यर्थियों के लिए राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग ने दूसरी बार स्पष्ट किया है कि OBC वर्ग को 5 प्रतिशत अर्हता अंक की छूट मिलनी चाहिए और इसके अनुरूप परीक्षा परिणाम संशोधित किया जाना चाहिए। अब प्रदेश के हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आयोग की संस्तुति को लागू किया जाता है, तो वर्षों से लंबित इस विवाद के समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा।


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