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प्री-प्राइमरी शिक्षा के अंतर्गत को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष के बच्चों हेतु शैक्षिक सामग्री वितरण के संबंध में।

Sir Ji Ki Pathshala

उत्तर प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा महानिदेशालय एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय (समग्र शिक्षा) ने राज्य के बुनियादी शिक्षा ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुपालन में, प्रदेश के समस्त परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों के परिसर में संचालित (Co-located) आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में नामांकित 3 से 6 वर्ष के नौनिहालों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई खेल-आधारित एवं बाल-केंद्रित पाठ्यपुस्तकों तथा शिक्षण सामग्रियों का वितरण शुरू कर दिया गया है।

UP Pre-primary education books distribution 2026

​राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (SCERT) द्वारा विकसित इन विशिष्ट अभ्यास पुस्तिकाओं और शिक्षण टूल्स का उद्देश्य बच्चों में भाषा, अंकीय दक्षता (न्यूमरेसी) तथा रचनात्मक कला-क्राफ्ट कौशल का विकास करना है।

​1. आयु-संगत शिक्षण सामग्री का विस्तृत वर्गीकरण

​विभिन्न आयुवर्ग के बच्चों की विकासात्मक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भाषा, अंकीय दक्षता तथा कला एवं क्राफ्ट के विकास हेतु निम्नलिखित सामग्रियां वितरित की जा रही हैं:

  • चहक-1 (कार्यपुस्तिका): यह पुस्तक 3 से 4 वर्ष के बच्चों के शुरुआती भाषाई और मानसिक विकास के लिए तैयार की गई है।
  • चहक-2 (कार्यपुस्तिका): इसे 4 से 5 वर्ष के बच्चों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
  • चहक-3 (कार्यपुस्तिका): यह 5 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए प्री-स्कूल स्तर की अंतिम अभ्यास पुस्तिका है।
  • कदम (अभ्यास पुस्तिका): 5 से 6 वर्ष के बच्चों में प्रारंभिक अंकीय दक्षता (मैथमेटिकल स्किल्स) के विकास हेतु यह विशेष रूप से उपयोगी है।
  • कलांकुर (कला एवं क्राफ्ट): 3 से 6 वर्ष के सभी बच्चों के भीतर रचनात्मक और कलात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए इसे डिजाइन किया गया है।
  • बालवाटिका हस्तपुस्तिका: प्रत्येक बालवाटिका या को-लोकेटेड केंद्र के लिए 01 शिक्षक गाइड (टीचर मैनुअल) प्रदान की जा रही है।
  • होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड (HPC): 3 से 6 वर्ष के बच्चों के सर्वांगीण विकास और उनकी प्रगति को ट्रैक करने के लिए यह कार्ड दिया जा रहा है।
  • तालिका (हिन्दी एवं गणित): बुनियादी शिक्षण स्तर की प्रगति आंकने के लिए प्रत्येक केंद्र को 02 विशिष्ट तालिकाएं मिलेंगी।
  • बिग बुक (12 प्रकार की कहानियाँ): बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए प्रत्येक केंद्र हेतु 12 बड़ी सचित्र पुस्तकों का एक पूरा सेट दिया जा रहा है।

​2. गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु 'रैंडम सैंपलिंग' व्यवस्था

​वितरण प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता न हो, इसके लिए एक सख्त त्रि-स्तरीय सत्यापन प्रणाली लागू की गई है:
    • जनपद स्तर पर मिलान: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और जिला समन्वयक (प्रशिक्षण) आपूर्ति प्राप्त होते ही पाठ्यपुस्तकों की भांति निर्धारित संख्या से इसका सावधानीपूर्वक मिलान करेंगे।
    • दोहरे सैंपल का चयन: प्राप्त सामग्री में से रैंडम आधार पर प्रत्येक पुस्तक के दो-दो सैंपल चुने जाएंगे। इन सैंपल्स को पुस्तकों की प्राप्ति के 5 दिनों के भीतर संबंधित मंडल के 'मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक)' कार्यालय को भेजा जाएगा।
    • राज्य स्तर पर प्रेषण: मण्डलीय कार्यालय इन सामग्रियों की रैंडम सैंपलिंग कर दो सेट 'राज्य परियोजना कार्यालय, लखनऊ (प्री-प्राइमरी यूनिट)' को अंतिम सत्यापन हेतु प्रेषित करेगा। इस कार्य में नोडल एस.आर.जी. (SRG) का सहयोग लिया जाएगा।
    • ब्लॉक स्तर पर प्रेषण: जनपद स्तर पर पुस्तकों की मुख्य आपूर्ति प्राप्त होने के अधिकतम 1 सप्ताह (7 दिवस) के भीतर उन्हें विकास खंड स्तर पर अनिवार्य रूप से उपलब्ध करा दिया जाना चाहिए।

​3. पारदर्शी ब्लॉक एवं विद्यालय स्तरीय वितरण व्यवस्था

​विकास खंड (ब्लॉक) स्तर पर सामग्रियों का जमीनी वितरण सुचारू रूप से संचालित करने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को मुख्य नोडल अधिकारी बनाया गया है।
    • वास्तविक छात्र संख्या के आधार पर वितरण: खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) अपने ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले नोडल ए.आर.पी. (ARP) को नामित करेंगे। वे आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की वर्तमान वास्तविक संख्या के अनुसार विवरण चार्ट तैयार कर वितरण सुनिश्चित कराएंगे।
    • स्टॉक रजिस्टर में अंकन: संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापक या इंचार्ज अध्यापक इन पुस्तकों को सामान्य पाठ्यपुस्तकों की भांति ही अपने विद्यालय के स्टॉक रजिस्टर में दर्ज करेंगे और इसे आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को ससमय प्राप्त कराएंगे। इसके लिए BEO द्वारा प्रधानाध्यापकों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे।
    • भौतिक सत्यापन अनिवार्य: जनपद स्तर पर वितरण पूर्ण होने का 'प्रमाण पत्र' जारी करने से पहले यह अनिवार्य है कि जिला समन्वयक (प्रशिक्षण)/निपुण सेल द्वारा जनपद के न्यूनतम 20 को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक भौतिक निरीक्षण कर सत्यापन कर लिया गया हो।

​4. 'किताब वितरण ऐप' (Kitab Vitran App) द्वारा डिजिटल मॉनिटरिंग

​इस पूरे अभियान की पारदर्शिता एवं समयबद्धता बनाए रखने के लिए 'किताब वितरण ऐप' (Kitab Vitran App) के माध्यम से रीयल-टाइम ट्रैकिंग अनिवार्य की गई है। सामग्री प्राप्त होने के अधिकतम 3 दिन के भीतर इसे ऐप पर दर्ज करना होगा।

    ​क) लॉगिन आधारित स्कैनिंग (BSA, BEO एवं प्रधानाध्यापकों हेतु)

    • ऐप डाउनलोड: सभी प्रधानाध्यापकों और संबंधित अधिकारियों को अपने एंड्रॉइड या आईओएस डिवाइस पर ऐप डाउनलोड करना होगा।
    • लॉगिन प्रक्रिया: विभाग द्वारा प्रदत्त यूजरनेम और पासवर्ड से लॉगिन करना होगा। विद्यालय स्तर पर प्रधानाध्यापक अपने स्कूल का UDISE कोड यूजरनेम के रूप में उपयोग करेंगे (पासवर्ड: loca + UDISE कोड के पहले 4 अंक)।
    • स्कैनिंग विधि: प्रत्येक शैक्षणिक सामग्री के अंतिम कवर पृष्ठ (Back Cover) पर एक विशिष्ट QR कोड अंकित है। ऐप के माध्यम से केवल एक प्रति का क्यूआर कोड स्कैन कर प्राप्त कुल प्रतियों की संख्या दर्ज कर फॉर्म सबमिट करना होगा।

    ​ख) बिना लॉगिन के स्कैनिंग (निरीक्षण अधिकारियों हेतु)

    ​सहयोगात्मक पर्यवेक्षण (Supportive Supervision) के तहत जब भी ARP, SRG, डाइट मेंटर या जिला समन्वयक किसी स्कूल का भ्रमण करेंगे, तो वे बिना लॉगिन किए भी सीधे ऐप के होमपेज पर सबसे नीचे दिए गए "स्कैन QR कोड" के विकल्प को चुनेंगे। वहां वे निरीक्षणकर्ता का नाम, विद्यालय का UDISE कोड और उपलब्ध सामग्री की संख्या दर्ज कर फॉर्म सबमिट कर सकेंगे।

​5. अधिकारियों के लिए समय-सारणी एवं महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व

    ​राज्य परियोजना निदेशक (समग्र शिक्षा) कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में किसी भी स्तर पर शिथिलता क्षम्य नहीं होगी।

    • व्हाट्सएप आधारित मॉनिटरिंग: BSA द्वारा विभागीय व्हाट्सएप समूह के माध्यम से साझा किये गए डेटा का उपयोग करके सभी विद्यालयों की स्थिति मॉनिटर की जायेगी। जिन विद्यालयों में स्कैनिंग लंबित होगी, उनके नाम चिन्हित कर BEO द्वारा अनुपालन कराया जायेगा।
    • प्रेरणा पोर्टल पर अपलोडिंग: जुलाई माह में अभ्यास पुस्तिकाओं हेतु प्रेषित डेटा कैप्चर फॉर्मेट (DCF) को प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करने का मुख्य दायित्व जिला समन्वयक (प्रशिक्षण)/निपुण का होगा।
    • प्रमाण-पत्र प्रेषण: सामग्रियां प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर निर्धारित प्रारूप पर हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र राज्य परियोजना कार्यालय को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
​उत्तर प्रदेश सरकार का यह तकनीकी और सुव्यवस्थित प्रयास निश्चित रूप से बुनियादी शिक्षा (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरेसी - FLN) के लक्ष्यों को प्राप्त करने और राज्य के सरकारी शिक्षा तंत्र को आधुनिक व सुलभ बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
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