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पी०एम० पोषण / मध्याह्न भोजन योजनान्तर्गत कार्यरत रसोइयों एवं आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में।

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी विद्यालयों में 'पीएम पोषण' (मध्याह्न भोजन) योजना के तहत काम करने वाले लाखों रसोइयों और उनके आश्रित परिवारों के हक में एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला लिया है। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश द्वारा जारी नवीनतम आदेश के अनुसार, अब इन रसोइयों और उनके परिवार के पात्र सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया जाएगा।

​इस कल्याणकारी निर्णय को जमीन पर उतारने के लिए प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSAs) को युद्ध स्तर पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

PM Poshan Rasoiya Cashless Treatment Order 2026

​मध्याह्न भोजन प्राधिकरण द्वारा 09 जून 2026 को एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया। इसमें महानिदेशक, स्कूल शिक्षा के निर्देशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि शासनादेश के अनुरूप ही रसोइयों एवं उनके आश्रित परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

यह फैसला उन हजारों-लाखों रसोइयों के लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आया है, जो बेहद कम मानदेय पर वर्षों से परिषदीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में बच्चों के लिए पूरी निष्ठा से भोजन तैयार करने का कार्य कर रहे हैं। बीमारी के वक्त अब उन्हें इलाज के लिए कर्ज के जाल में नहीं फंसना पड़ेगा।

​कैसे मिलेगा लाभ? (पंजीकरण एवं कार्ड निर्माण प्रक्रिया)

​आदेश के मुताबिक, इस स्वास्थ्य योजना का लाभ उठाने के लिए एक पारदर्शी और डिजिटल प्रक्रिया तय की गई है:

  • ऑनलाइन पंजीकरण: योजना के अंतर्गत कार्यरत रसोइयों एवं उनके परिवार के सदस्यों का डेटा एक निर्धारित सरकारी पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा।
  • सत्यापन (Verification): ऑनलाइन विवरण दर्ज होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा लाभार्थियों की पात्रता का सत्यापन किया जाएगा।
  • डिजिटल हेल्थ कार्ड: सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होते ही पात्र लाभार्थियों के विशेष कार्ड तैयार किए जाएंगे।
  • कैशलेस इलाज: कार्ड बन जाने के बाद रसोईया और उनका परिवार सूचीबद्ध (एम्पैनल्ड) स्वास्थ्य संस्थानों और अस्पतालों में बिना कोई पैसा दिए (कैशलेस) इलाज करा सकेंगे।

​मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता (Top Priority) पर रखने के निर्देश दिए हैं। सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है कि:

  1. ​वे अपने-अपने जिलों के रसोइयों और उनके आश्रितों की सटीक जानकारी समय रहते पोर्टल पर अपलोड कराएं।
  2. ​पंजीकरण और कार्ड बनाने की इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर ढिलाई या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

​सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

​शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से न सिर्फ रसोइयों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी, बल्कि किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में उन पर आने वाला अचानक आर्थिक बोझ पूरी तरह खत्म हो जाएगा। सरकार की इस अनूठी पहल को राज्य में सामाजिक सुरक्षा (Social Security) के दायरे को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर माना जा रहा है।

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