केन्द्रीय वेतन आयोग के 22-23 जून के लखनऊ दौरे से पहले योगी सरकार सक्रिय; सचिवालय और राज्य कर्मचारियों के शीर्ष नेता सौंपेंगे अपनी संस्तुतियां।
लखनऊ, 09 जून, 2026:
देश में आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के गठन और उसकी बढ़ती सक्रियता के बीच उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनरों के वेतन-भत्तों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश शासन के वित्त (वेतन आयोग) अनुभाग-2 द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, आगामी 10 जून 2026 को अपराह्न 02:00 बजे लखनऊ स्थित सचिवालय के नवीन भवन के 'पारिजात सभाकक्ष-84' में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।
इस बैठक की अध्यक्षता शासन के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाएगी, जिसमें उत्तर प्रदेश के तमाम शीर्ष कर्मचारी संगठनों, सचिवालय यूनियनों और महासंघों के पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 22 और 23 जून 2026 को आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के प्रस्तावित लखनऊ आगमन से पहले राज्य के कर्मचारियों का मजबूत पक्ष और महत्वपूर्ण सुझाव तैयार करना है।
18 बिंदुओं की प्रश्नावली पर होगा मुख्य मंथन
शासन द्वारा बुलाई गई इस बैठक का मूल एजेंडा भारत सरकार (केंद्रीय वेतन आयोग) द्वारा जारी की गई 18 प्रश्नों की व्यापक प्रश्नावली है। यह प्रश्नावली वेतनमानों के निर्धारण, भत्तों, पेंशनरों के आर्थिक हितों, निजी क्षेत्र के मुकाबले सरकारी क्षेत्र के वेतन संतुलन (होरिजॉन्टल एवं वर्टिकल रिलेटिविटी), और फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर केंद्रित है। पूर्व में 10 मार्च 2026 को ही वित्त विभाग द्वारा यह प्रश्नावली सभी संघों को उपलब्ध करा दी गई थी, जिस पर अब अंतिम राय और लिखित सुझाव मांगे गए हैं। प्रत्येक आमंत्रित संगठन से अधिकतम दो प्रतिनिधियों को अपने ठोस तर्कों और प्रस्तावों के साथ प्रतिभाग करने के निर्देश विशेष सचिव पुष्पराज द्वारा दिए गए हैं।
केंद्रीय आयोग का लखनऊ दौरा बेहद अहम
आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के सदस्य सचिव पंकज जैन द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल को भेजे गए अर्धशासकीय पत्र के अनुसार, आयोग देश के विभिन्न हिस्सों के हितधारकों से जमीनी फीडबैक ले रहा है। इसी क्रम में आयोग 22 और 23 जून 2026 को लखनऊ में डेरा डालेगा। आयोग इस दौरान न केवल कर्मचारी संघों से मिलेगा, बल्कि राज्य सरकार के साथ भी बैठक कर पिछले वेतन आयोगों के वित्तीय प्रभाव (Fiscal Impact), सरकारी सेवाओं में बेहतरीन प्रतिभाओं को आकर्षित करने, कार्यशैली में जवाबदेही व दक्षता बढ़ाने और नए वेतनमानों के बजटीय भार पर विस्तृत विमर्श करेगा।
बैठक में शामिल होने वाले प्रमुख संगठन और उनके प्रतिनिधि
इस अहम बैठक में प्रदेश के लगभग सभी बड़े संघों को आमंत्रित किया गया है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- उ०प्र० सचिवालय राजपत्रित अधिकारी संघ: श्री शिव गोपाल सिंह (अध्यक्ष)
- उ०प्र० सचिवालय संघ: श्री अर्जुन देव भारती (अध्यक्ष)
- राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद: श्री जे०एन० तिवारी, इं० हरिकिशोर तिवारी, श्री सुरेश कुमार रावत, श्री एस०पी० तिवारी एवं श्री संजीव पाण्डेय (संबद्ध विभिन्न गुट/परिषद)
- उ०प्र० सरकार स्टेनोग्राफर्स महासंघ: श्री ज्ञान प्रकाश वर्मा (प्रान्तीय अध्यक्ष)
- उत्तर प्रदेशीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ: श्री रामराज दूबे एवं श्री हरिशरण मिश्र
- उ०प्र० फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विस एसोसिएशन: श्री संदीप कुमार पाण्डेय, श्री जे०पी० पाण्डेय, श्री कृतार्थ सिंह एवं श्री दिवाकर सिंह
- कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा उ०प्र०: श्री वी०पी० मिश्र (अध्यक्ष)
- उ०प्र० डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ: इं० एन०डी० द्विवेदी एवं इं० हृदय नारायण मिश्र
- उ०प्र० सांख्यिकीय सेवा परिसंघ: श्री उग्रसेन सिंह (अध्यक्ष)
- उ०प्र० राज्य कर्मचारी महासंघ: श्री कमल अग्रवाल, श्री राम लाल यादव एवं श्री अजय सिंह
- राजकीय वाहन चालक महासंघ: श्री रिजवान अहमद सिद्दीकी (अध्यक्ष)
कर्मचारियों की निगाहें फिटमेंट फैक्टर और भत्तों पर
उत्तर प्रदेश के करीब 16 लाख सरकारी कर्मचारियों और 12 लाख से अधिक पेंशनरों के लिए यह कवायद बेहद मायने रखती है, क्योंकि राज्य सरकार आमतौर पर केंद्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों को ही कुछ संशोधनों के साथ राज्य में लागू करती है। कर्मचारी संगठनों की मुख्य मांग है कि इस बार न्यूनतम वेतन में सम्मानजनक वृद्धि की जाए और फिटमेंट फैक्टर को तार्किक रूप से बढ़ाया जाए, ताकि बढ़ती महंगाई के दौर में कर्मचारियों को राहत मिल सके। 10 जून की बैठक के माध्यम से राज्य के कर्मचारी नेता अपनी संयुक्त रणनीति और मसौदा तैयार कर सीधे केंद्रीय आयोग के समक्ष मजबूती से अपनी बात रख सकेंगे।


