शाहजहांपुर, संवाददाता। शाहजहांपुर में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) दिव्या गुप्ता की कुर्सी आखिरकार उनके कार्यालय में फैले व्यापक भ्रष्टाचार के कारण चली गई। रविवार की रात शासन स्तर से उनका स्थानांतरण (ट्रांसफर) कर दिया गया। इस कार्रवाई के पीछे शाहजहांपुर के जिलाधिकारी (DM) धर्मेंद्र प्रताप सिंह का एक बेहद गोपनीय और सख्त पत्र था, जो उन्होंने कार्रवाई से ठीक दो दिन पहले शासन और बेसिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक को भेजा था।
जिलाधिकारी ने अपने पत्र के माध्यम से शासन को आगाह किया था कि कार्यालय की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। उन्हें यह गंभीर आशंका थी कि यहां व्याप्त भारी भ्रष्टाचार के चलते किसी भी दिन स्वयं बीएसए भी विजिलेंस या एंटी करप्शन (निगरानी) टीम के जाल में फंस सकती हैं। डीएम का मानना था कि यदि ऐसी कोई घटना होती है, तो इससे न केवल शिक्षा विभाग बल्कि पूरे जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश शासन की छवि धूमिल होगी। इसी प्रशासनिक साख को बचाने के लिए उन्होंने दिव्या गुप्ता का ट्रांसफर करना अत्यंत आवश्यक बताया था, जिसके ठीक दो दिन बाद शासन ने उन पर कार्रवाई कर दी।
शिक्षक नेताओं को साधने की भी चर्चा
विभागीय गलियारों में यह बात काफी समय से चर्चा का विषय बनी हुई थी कि अपनी कमियों और कार्यालय की अनियमितताओं को छिपाने के लिए बीएसए कुछ चुनिंदा शिक्षक नेताओं को अपने साथ लेकर चलने लगी थीं। इस पक्षपातपूर्ण कार्यशैली की वजह से अन्य शिक्षक संगठनों और आम शिक्षकों के बीच भारी असंतोष और नाराजगी व्याप्त थी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कार्यालय की महत्वपूर्ण सूचनाएं और नीतियां केवल कुछ सीमित और चहेते लोगों तक ही साझा की जाती थीं, जिससे बाकी संगठन पूरी तरह उपेक्षित महसूस कर रहे थे।
वित्त मंत्री के निर्देश भी पड़ गए थे हल्के
कार्यालय में चल रही मनमानी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां तैनात एक खास बाबू (लिपिक) के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं। यह मामला इतना गंभीर हो गया था कि उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री ने स्वयं जिलाधिकारी को फोन कर उस विवादित बाबू का पटल बदलने (सीट चेंज करने) का निर्देश दिया था। परंतु, मंत्री स्तर से सीधे निर्देश आने के बावजूद एक महीना बीत जाने तक भी उस बाबू का पटल नहीं बदला जा सका, जो प्रशासनिक ढर्रे और बीएसए की हठधर्मिता को दर्शाता है।
एंटी करप्शन के रडार पर थीं बीएसए
कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, दफ्तर में जारी लगातार अवैध वसूली को लेकर एंटी करप्शन टीम काफी सक्रिय थी। टीम द्वारा स्वयं बीएसए को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ने का एक पूरा गोपनीय प्लान तैयार किया जा चुका था। जब इस संभावित ट्रैप (जाल) की जानकारी जिलाधिकारी को हुई, तो उन्होंने किसी भी बड़ी फजीहत से बचने के लिए तत्काल शासन को पत्र लिखकर उन्हें पद से हटाने की सिफारिश की। चर्चा है कि इस कार्यालय में बाबुओं से लेकर डीसी (जिला समन्वयकों) तक ने कथित रूप से करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति बना रखी है, जिसकी अब उच्च स्तरीय जांच की मांग उठने लगी है।
📰 साइड-स्टोरीज़ और मुख्य बिंदु:
1. कार्रवाई पर शिक्षक संघों ने जताई खुशी
बीएसए के हटाए जाने की खबर मिलते ही विभिन्न शिक्षक संगठनों के नेताओं ने राहत की सांस ली है और इस फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त की है:
- यूटा शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष विनीत गंगवार ने कहा कि "बीएसए का ट्रांसफर होना पूरी तरह से शिक्षक हित में है। इससे कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार पर नकेल कसी जा सकेगी और नए अधिकारी के आने से परिस्थितियां बदलेंगी।"
- प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष मुनीश मिश्रा ने स्पष्ट तौर पर कहा कि "शिक्षकों को बेवजह परेशान कर भ्रष्टाचार करने वालों पर की गई यह कार्रवाई अत्यंत सराहनीय है।"
2. पांच महीने में चार कर्मचारी रंगे हाथों पकड़े गए
यह दफ्तर भ्रष्टाचार का इस कदर केंद्र बन चुका था कि पिछले महज पांच महीनों के भीतर एंटी करप्शन टीम ने एक के बाद एक कुल चार विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है:
- 22 दिसंबर 2025: कलान के खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) सतीश कुमार मिश्रा एवं एआरपी सुशील कुमार सिंह को घूस लेते पकड़ा गया था।
- 20 अप्रैल 2026: मिड-डे मील (MDM) के जिला समन्वयक निश्चय सिंह और कंप्यूटर ऑपरेटर अरुण को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।



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