शिक्षकों के लिए बड़ी खबर! अन्तर्जनपदीय ट्रांसफर नीति में हुआ बड़ा बदलाव, पति/पत्नी को नहीं मिलेगा यह लाभ! देखें नया आदेश
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषदीय स्कूलों में कार्यरत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के अंतर्जनपदीय स्थानांतरण (Inter-District Transfer) को लेकर बेसिक शिक्षा परिषद ने एक बेहद महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग द्वारा पूर्व में जारी किए गए आवेदन फॉर्म में एक बड़ी लिपिकीय (टाइपिंग) त्रुटि हो गई थी, जिसे अब सचिव बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा पूरी तरह संशोधित कर नया आधिकारिक आदेश और आवेदन प्रारूप जारी कर दिया गया है।
क्या हुआ है बदलाव? (पति/पत्नी के आधार पर अब लाभ नहीं)
बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा पूर्व में जारी आवेदन फॉर्म के बिंदु संख्या 19 में गंभीर बीमारियों (कैंसर और डायलिसिस) के आधार पर स्थानांतरण के लिए पात्रता का दायरा गलती से (स्वयं / पति या पत्नी / अविवाहित पुत्र / पुत्री) अंकित हो गया था।
नए संशोधित आदेश के अनुसार, अब इस नियम को केवल (स्वयं / अविवाहित पुत्र / पुत्री) तक ही सीमित कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि किसी शिक्षक या शिक्षिका के पति अथवा पत्नी कैंसर या डायलिसिस जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, तो वे इस विशेष श्रेणी के तहत प्राथमिकता या अतिरिक्त भारांक का दावा नहीं कर पाएंगे। यह लाभ अब केवल तभी मिलेगा जब बीमारी स्वयं शिक्षक को हो या उनके अविवाहित बच्चों को हो।
इन 4 परिस्थितियों में ही मिलेगा ट्रांसफर का विशेष लाभ:
संशोधित फॉर्म के अनुसार, अब केवल निम्नलिखित चार श्रेणियों के अंतर्गत ही विशेष प्राथमिकता या भारांक का दावा किया जा सकेगा:
- दिव्यांग शिक्षक/शिक्षिका: स्वयं, पति/पत्नी या अविवाहित बच्चों के न्यूनतम 40% दिव्यांग होने पर मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) का प्रमाण पत्र अनिवार्य है।
- कैंसर से पीड़ित होने पर: केवल स्वयं या अविवाहित पुत्र/पुत्री के पीड़ित होने पर ही लाभ मिलेगा। इसके लिए सरकारी अस्पताल का प्रमाण पत्र या प्राइवेट इलाज होने पर सक्षम सरकारी डॉक्टर द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित सर्टिफिकेट जरूरी है।
- डायलिसिस पर होने पर: केवल स्वयं या अविवाहित पुत्र/पुत्री के डायलिसिस पर होने की स्थिति में ही आवेदन मान्य किया जाएगा।
- परिषदीय शिक्षक दंपति (Spouse Case): यदि पति और पत्नी दोनों ही परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक हैं, तो विवाह प्रमाण पत्र/सेवा पुस्तिका की प्रति और नियुक्ति प्राधिकारी का प्रमाण पत्र लगाना होगा।
महत्वपूर्ण नोट: यदि कोई शिक्षक अपने अविवाहित पुत्र या पुत्री की गंभीर बीमारी के आधार पर ट्रांसफर का लाभ लेना चाहता है, तो उसे ₹100 के स्टाम्प पेपर पर साक्ष्यों सहित शपथ पत्र (Affidavit) देना अनिवार्य कर दिया गया है।
फर्जी जानकारी या तथ्य छिपाने पर सीधे FIR की चेतावनी
बेसिक शिक्षा परिषद ने इस बार आवेदन फॉर्म के अंत में दिए गए 'घोषणा पत्र' को और भी सख्त कर दिया है। प्रत्येक आवेदक को यह शपथपूर्वक घोषणा करनी होगी कि उनके द्वारा दी गई सभी जानकारियां पूरी तरह सत्य हैं। यदि जांच के दौरान कोई भी दस्तावेज फर्जी, अधूरा या गलत पाया जाता है, अथवा कोई तथ्य छिपाया गया मिलता है, तो न केवल शिक्षक का आवेदन निरस्त किया जाएगा, बल्कि उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ सीधे आपराधिक मुकदमा (FIR) भी दर्ज कराया जाएगा।
क्या करें शिक्षक?
जो भी शिक्षक इस सत्र में एक जिले से दूसरे जिले में ट्रांसफर के लिए आवेदन कर रहे हैं, वे ध्यान रखें कि वे पुराने त्रुटिपूर्ण फॉर्म का उपयोग बिल्कुल न करें। परिषद द्वारा जारी नए संशोधित आवेदन प्रारूप को भरकर ही अपने स्कूल के इंचार्ज/प्रधानाध्यापक, खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) से सत्यापित कराएं। ऑनलाइन आवेदन के संबंध में अंतिम और सर्वमान्य निर्णय शासन का ही होगा। ओ


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