Type Here to Get Search Results !

TET अनिवार्यता पर सभी रिव्यू याचिकाएं खारिज, सेवारत शिक्षकों को टीईटी से राहत नहीं, देखें संपूर्ण ऑर्डर

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली / लखनऊ । माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने देश में शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी सभी पुनर्विचार याचिकाओं (Review Petitions) को सिरे से खारिज कर दिया है। हालांकि, सेवा में बने रहने के लिए संघर्ष कर रहे शिक्षकों को कोर्ट से एक बड़ी राहत जरूर मिली है; सुप्रीम कोर्ट ने आवश्यक योग्यता हासिल करने की समय-सीमा को एक वर्ष के लिए आगे बढ़ा दिया है।

supreme-court-of-india-judgment-on-tet-mandatory-qualification

​पुराना आदेश बहाल, सेवारत शिक्षकों को टीईटी से स्थायी राहत नहीं

​जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि स्कूलों में पढ़ाने के लिए टीईटी (TET) की अनिवार्यता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सेवारत शिक्षकों (In-service Teachers) को इस परीक्षा को पास करने से कोई स्थायी छूट या राहत नहीं दी गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 के अपने पुराने आदेश को पूरी तरह बहाल रखा है।

​सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश पत्र में मुख्य रूप से 5 बिंदुओं को रेखांकित किया है:

  1. ​रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) दाखिल करने की अनुमति प्रदान की जाती है।
  2. ​याचिका दाखिल करने में हुई देरी को कोर्ट द्वारा माफ (Condoned) किया जाता है।
  3. ​माननीय जस्टिस दीपांकर दत्ता ने अपनी और माननीय जस्टिस मनमोहन की पीठ की तरफ से यह रिपोर्टेबल (नजीर बनने योग्य) फैसला सुनाया।
  4. ​रिकॉर्ड पर रखे गए हस्ताक्षरित रिपोर्टेबल निर्णय के नियमों के तहत सभी पुनर्विचार याचिकाएं खारिज की जाती हैं।
  5. ​मामले से जुड़ी अन्य सभी लंबित अंतरिम अर्जियों (Interlocutory Applications) का भी इसी के साथ निपटारा किया जाता है।

​2027 की जगह अब 31 अगस्त 2028 तक का समय

​शिक्षकों की व्यावहारिक दिक्कतों, परीक्षा के आयोजन में लगने वाले समय और सीमित संसाधनों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने समय-सीमा में बदलाव किया है। कोर्ट ने 'अंजुमन मामले' के पैराग्राफ 217 में दिए गए समय को संशोधित कर दिया है।

​पहले सेवारत शिक्षकों को टीईटी योग्यता हासिल करने के लिए 2 वर्ष का समय दिया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 3 वर्ष (Three Years) कर दिया गया है। कोर्ट के इस संशोधन के बाद अब सेवारत शिक्षकों को 31 अगस्त 2027 की बजाय 31 अगस्त 2028 तक टीईटी परीक्षा पास करनी होगी। यदि तय समय-सीमा के भीतर शिक्षक यह योग्यता हासिल नहीं करते हैं, तो उनकी सेवा पर संकट आ सकता है।

​अधिकारियों को परीक्षा जल्द कराने के निर्देश

​अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी माना कि संबंधित प्राधिकरणों और विभागों को जल्द से जल्द टीईटी परीक्षा का आयोजन कराना चाहिए ताकि शिक्षकों को अपनी योग्यता साबित करने का पूरा और निष्पक्ष मौका मिल सके। 33 पन्नों का यह विस्तृत कानूनी आदेश अब सार्वजनिक कर दिया गया है और संबंधित पक्षों के लिए इसे डाउनलोड करने का लिंक भी जारी किया गया है।

​यह फैसला उन हजारों शिक्षकों के भविष्य को तय करने वाला है जो बिना टीईटी पास किए काफी समय से शिक्षण कार्य से जुड़े हुए थे। अब उनके पास अपनी नौकरी सुरक्षित करने के लिए अगस्त 2028 तक का अंतिम अवसर शेष है।

(विशेष सहयोग: अरुण कुमार मिश्र, प्रतापगढ़ एवं निर्भय सिंह, लखनऊ)

📥 संपूर्ण ऑर्डर की PDF डाउनलोड करें 
📌 प्रिंट करने हेतु यहाँ से आधिकारिक PDF सुरक्षित करें।