लखनऊ, 29 मई 2026
उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कम्पोजिट विद्यालयों के कायाकल्प और बेहतर संचालन के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना के तहत, महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट की 50 प्रतिशत धनराशि के रूप में ₹22,669.2250 लाख (करीब ₹226.69 करोड़) का भारी-भरकम बजट जारी कर दिया गया है। राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी द्वारा प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश और वरीयता क्रम जारी कर दिए गए हैं।
5 श्रेणियों में नामांकन के आधार पर मिलेगा बजट
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रदेश के विद्यालयों को उनके छात्र नामांकन (Enrollment) के आधार पर 5 प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है:
- 01 से 30 छात्र: ₹10,000 के अंतर्गत ग्राण्ट।
- 31 से 100 छात्र: ₹25,000 के अंतर्गत ग्राण्ट।
- 101 से 250 छात्र: ₹50,000 के अंतर्गत ग्राण्ट।
- 251 से 1000 छात्र: ₹75,000 के अंतर्गत ग्राण्ट।
- 1000 से अधिक छात्र: ₹1,00,000 के अंतर्गत ग्राण्ट।
50% प्रथम किश्त के रूप में जारी राशि
धनराशि हस्तान्तरण और उपभोग के कड़े नियम
- एक सप्ताह की समयसीमा: जारी आदेश के मुताबिक, यह धनराशि एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से विद्यालय प्रबन्ध समिति (SMC) के बैंक खातों में ट्रांसफर करनी होगी।
- संयुक्त संचालन: खाते से धनराशि का आहरण SMC के अध्यक्ष और सदस्य सचिव (प्रधानाध्यापक) के संयुक्त हस्ताक्षरों द्वारा ही किया जा सकेगा।
- डिजिटल पारदर्शिता (प्रेणा पोर्टल): क्रय की जाने वाली सामग्री के बिल-वाउचर और स्कूल में कराए जाने वाले कार्यों के 'कार्य से पहले' तथा 'कार्य के बाद' के फोटो प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
- दीवार पर अंकन: विद्यालय की मुख्य दृश्यमान दीवार पर वर्षवार और मदवार खर्च की गई धनराशि का विवरण पेंट कराना होगा ताकि जनसामान्य को इसकी जानकारी रहे।
कार्यों का वरीयता क्रम: इन चीज़ों पर खर्च होगी ग्राण्ट
आवंटित धनराशि का उपभोग विद्यालय प्रबन्ध समिति के अनुमोदन के बाद निम्नलिखित प्राथमिकताओं के आधार पर किया जाएगा:
1. स्वच्छता अभियान (न्यूनतम 10% अनिवार्य आरक्षित)
कुल स्वीकृत धनराशि का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा केवल स्वच्छता कार्यों पर खर्च होगा। इसके तहत टॉयलेट क्लीनर, फिनायल, साबुन, चूना, झाडू, डस्टिंग क्लॉथ, नेलकटर, हैण्डवॉश और सैनिटाइजर जैसी सामग्रियां वर्षभर उपलब्ध रहनी चाहिए। टॉयलेट यूनिट के साथ कवर्ड डस्टबिन का होना अनिवार्य है।
2. डिजिटल शिक्षा: टैबलेट्स के लिए इंटरनेट व सिम बिल
प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को दिए जा रहे टैबलेट्स के सुचारू संचालन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में लगने वाले सिम कार्ड और इंटरनेट प्रीपेड बिल का भुगतान इसी ग्राण्ट से किया जाएगा।
3. 'निपुण भारत' लोगो और पेंटिंग कार्य
स्कूल की सबसे प्रमुख दीवार पर 'निपुण भारत' का लोगो (Logo) अनिवार्य रूप से पेंट कराया जाएगा। इसका आकार आयताकार (45 सेमी चौड़ा और 60 सेमी ऊँचा) तय किया गया है। इसके अलावा स्कूलों को बाहर से सफेद रंग (प्राथमिक के लिए हरी पट्टी और उच्च प्राथमिक के लिए लाल पट्टी) में ही रंगवाना होगा।
4. इन्फ्रास्ट्रक्चर और क्लासरूम का आधुनिकीकरण
- शौचालय व पेयजल: अक्रियाशील शौचालय, यूरिनल पॉट और टाइलीकरण के अधूरे कार्यों को प्राथमिकता पर ठीक कराया जाएगा। हैण्डपम्प या सबमर्सिबल पम्प के पास पक्का प्लेटफार्म और सोख्ता-गड्ढा बनाना अनिवार्य है।
- व्हाइट/ग्रीन बोर्ड व कक्षा टाइलीकरण: प्रत्येक कक्षा में उच्च गुणवत्ता वाले व्हाइट या ग्रीन बोर्ड लगाए जाएंगे। ₹75,000 या अधिक ग्राण्ट पाने वाले स्कूलों में बजट बचने पर कक्षाओं का टाइलीकरण भी कराया जा सकेगा।
- स्मार्ट क्लास की सुरक्षा: जिन स्कूलों में स्मार्ट क्लास और ICT Lab हैं, वहां सुरक्षा के लिए लोहे के दरवाजे, खिड़कियों पर मजबूत ग्रिल और डबल इंटरलॉकिंग (दोहरे ताले) की व्यवस्था की जाएगी।
- कूलर और आरओ (RO) वाटर: 100 से अधिक नामांकन वाले बड़े स्कूलों में यदि बजट बचता है, तो SMC की अनुमति से कूलर और आरओ वाटर कूलर स्थापित किए जा सकते हैं।
स्वास्थ्य सुरक्षा: फर्स्ट-एड बॉक्स में रहेंगी ये जीवनरक्षक दवाएं
महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश की सलाह पर स्कूलों के प्राथमिक उपचार बॉक्स (First-Aid Box) को भी अपग्रेड किया जाएगा। चिकित्सा किट में मुख्य रूप से निम्नलिखित सामग्रियां शामिल रहेंगी:
- ओआरएस (ORS) पाउडर, पैरासिटामोल सिरप, ओन्डम सिरप, मेट्रोजिल सिरप, डिक्लोमाइन सिरप।
- टैबलेट ओफ़्लॉक्सासिन (Ofloxacin 100 mg), बीटाडिन ऑइंटमेंट, डिक्लोफेनाक जेल।
- रुई, मेडिकल टेप, क्रेप बैंडेज, त्रिकोणीय बैंडेज, स्प्लिंट (Splint), थर्मामीटर, कैंची और दस्ताने।
विशेष नोट: चिकित्सा विभाग के निर्देशों के अनुसार, बच्चों को कोई भी दवा देने से पहले किसी एमबीबीएस (MBBS) चिकित्सक की सलाह लेना बेहद अनिवार्य है। साथ ही दवाओं की एक्सपायरी डेट का मिलान नियमित रूप से किया जाएगा।
गड़बड़ी करने पर होगी 'गबन' की कार्रवाई
वित्तीय नियमों में किसी भी तरह की लापरवाही को रोकने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है:
- एक कार्य, एक मद: एक ही कार्य के लिए दो अलग-अलग मदों से पैसा निकालना वित्तीय धोखाधड़ी माना जाएगा और इसे सीधे गबन की श्रेणी में रखते हुए दंडात्मक कार्यवाही होगी।
- BSI प्रमाणित सामग्री: खरीदी जाने वाली सभी वस्तुएं भारतीय मानक ब्यूरो (BSI) से प्रमाणित और यथासंभव GST पंजीकृत फर्मों से ही कोटेशन/निविदा प्रक्रिया के तहत ली जाएंगी।
- रैंडम चेकिंग: खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) अपने ब्लॉक के कम से कम 20% स्कूलों की औचक जांच करेंगे। वहीं, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी हर महीने कम से कम 5 शिक्षण दिवसों में विभिन्न स्कूलों का पर्यवेक्षण करेंगे।
- जिलाधिकारी स्तर पर जांच: प्रत्येक विकास खंड में जिलाधिकारी के अनुमोदन से दो सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित कर रैंडम आधार पर 20-20 विद्यालयों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा और इसकी रिपोर्ट राज्य परियोजना कार्यालय को भेजी जाएगी।
इस व्यापक बजट और सख्त गाइडलाइंस से उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों की न केवल सूरत बदलेगी, बल्कि ग्रामीण और शहरी अंचलों के बच्चों को साफ-सुथरा, सुरक्षित और डिजिटल रूप से संपन्न शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।


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