बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक खबर सामने आ रही है, जहाँ शिक्षकों को स्कूलों से गोवंश के लिए भूसा एकत्र करने का फरमान जारी करने वाले नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) सत्यदेव पर गाज गिर गई है। सोशल मीडिया पर पत्र वायरल होने और शिक्षक संगठनों के भारी आक्रोश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने त्वरित और कड़ा एक्शन लिया है। आरोपी बीईओ से तत्काल प्रभाव से चार्ज छीनकर उन्हें जिला मुख्यालय (BSA कार्यालय) से संबद्ध (अटैच) कर दिया गया है।
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| प्रतीकात्मक चित्र |
इस बड़ी कार्रवाई से पूरे शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) विनीता ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी बीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण भी तलब किया है।
क्या था पूरा मामला, क्यों भड़के शिक्षक?
दरअसल, नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारी सत्यदेव ने एक पत्र जारी किया था, जिसमें विद्यालयों के माध्यम से निराश्रित गोवंश पशुओं के लिए भूसा एकत्र करने का निर्देश दिया गया था। जैसे ही यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, वैसे ही शिक्षकों और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इस पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई।
शिक्षक संगठनों का साफ तौर पर कहना था कि: "शिक्षकों का मूल और प्राथमिक दायित्व विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, न कि भूसा इकट्ठा करना। इस तरह के आदेशों से न सिर्फ शिक्षकों के सम्मान को ठेस पहुँचती है, बल्कि शिक्षण कार्य भी प्रभावित होता है।"
बैकफुट पर आया विभाग, विवादित आदेश वापस
मामला तूल पकड़ते ही और शासन स्तर तक गूँजने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग तुरंत बैकफुट पर आ गया। विभाग ने बिना देर किए इस विवादित आदेश को वापस ले लिया और मामले की समीक्षा शुरू कर दी। जिम्मेदारी तय करते हुए त्वरित कार्रवाई की गई, जिससे नाराज शिक्षकों का गुस्सा शांत हो सके।
"आदेश स्वेच्छा का था, दबाव का नहीं" — BSA विनीता
मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) विनीता ने बताया कि:
- नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारी सत्यदेव को जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है और उनसे जवाब मांगा गया है।
- गोवंशीय पशुओं के लिए भूसा दान करने का जो मूल विचार था, वह पूरी तरह 'स्वेच्छा' पर आधारित था। इसमें किसी भी प्रकार का कोई दबाव या अनिवार्यता नहीं थी।
- बीईओ द्वारा पत्र की भाषा और प्रस्तुतीकरण में गड़बड़ी पाई गई, जिसे गंभीरता से लिया गया है।
सभी अधिकारियों को सख्त हिदायत: "मर्यादा में रहकर करें पत्राचार"
इस घटना के बाद बीएसए ने जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों और मातहतों को कड़े लहजे में नसीहत दी है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि:
- भविष्य में कोई भी पत्र या आदेश जारी करते समय विभागीय नियमों और मर्यादित/संयमित भाषा का अक्षरशः पालन किया जाए।
- किसी भी आदेश को जारी करने से पहले उसकी आवश्यकता, वैधानिकता और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव का विशेष ध्यान रखा जाए।
- शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की पढ़ाई की प्राथमिकताओं से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए।
योगी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे अफसर!
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा अत्यंत साफ और जनकल्याणकारी है। सरकार का उद्देश्य निराश्रित गोवंश पशुओं को आश्रय देना और समाज के सहयोग से उनके चारे-भूसे की व्यवस्था करना है। इसी कड़ी में आम जनता से भूसा दान करने का आग्रह किया गया था। लेकिन, अति-उत्साह या संवेदनहीनता के चलते अधिकारियों द्वारा ऐसे आदेश जारी कर दिए जाते हैं, जिससे सरकार की छवि धूमिल होती है।
शिक्षकों ने फैसले का किया स्वागत
विभाग द्वारा विवादित आदेश को तत्काल वापस लेने और दोषी अधिकारी पर त्वरित कार्रवाई किए जाने को शिक्षक संगठनों ने एक सकारात्मक कदम बताया है। शिक्षकों का कहना है कि इस फैसले से यह संदेश गया है कि विभाग अपने कर्मचारियों और शिक्षकों की जायज शिकायतों को गंभीरता से सुन रहा है। यह कार्रवाई केवल एक अधिकारी के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक कड़ा सबक है।




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