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IRDAI New Rules: तय समय में होगा बीमा क्लेम का भुगतान, नहीं तो रुकेगा CEO का बोनस

Sir Ji Ki Pathshala

बीमा ग्राहकों को बड़ी राहत: तय समय में करना होगा दावों का भुगतान, लापरवाही पर रुकेगा बड़ी कंपनियों के CEO का बोनस

नई दिल्ली: बीमा कंपनियों द्वारा क्लेम (दावा) भुगतान में होने वाली देरी और ग्राहकों को दफ्तरों के चक्कर कटवाने के दिन अब लदने वाले हैं। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। नए निर्देशों के तहत न सिर्फ दावों के निपटान के लिए एक सख्त समय-सीमा तय की गई है, बल्कि लापरवाही बरतने पर कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों (MD और CEO) की जेब पर भी सीधी गाज गिरेगी।

IRDAI new rules for insurance claim settlement in Hindi

​🕒 तीन चरणों में देनी होगी रिपोर्ट, 7 दिन में बदलेगा नॉमिनी

​इरडा के नए नियमों के अनुसार, अब बीमा कंपनियों को दावा आवेदन प्राप्त होने के बाद एक निश्चित समय-सीमा के भीतर उसका निपटान करना अनिवार्य होगा। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कंपनियों को तीन चरणों में ब्यौरा देना होगा:

  • दावा ट्रैकिंग: कंपनियों के लिए अब हर 15, 30 और 60 दिन के अंदर दावा निपटान से जुड़ा अपडेटेड ब्यौरा मुहैया कराना लाजिमी कर दिया गया है।
  • प्रोफाइल अपडेट: यदि कोई ग्राहक अपनी पॉलिसी में पता या नॉमिनी (नामांकित व्यक्ति) बदलवाना चाहता है, तो इस प्रक्रिया को महज 7 दिनों के भीतर पूरा करना होगा।

​💼 MD और CEO की जवाबदेही तय: प्रदर्शन से जुड़ेगा वेतन-बोनस

​अक्सर देखा जाता है कि बीमा कंपनियां क्लेम पास करने में ग्राहकों को परेशान करती हैं, जिसकी वजह से नियामक के पास शिकायतों का अंबार लगा हुआ था। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए इरडा ने कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन की जवाबदेही तय कर दी है:

बोनस और वेरिएबल पे पर लगेगी रोक: अब बीमा कंपनियों के एमडी (MD), सीईओ (CEO) और अन्य बड़े अधिकारियों को मिलने वाला बोनस और अतिरिक्त वेतन (वेरिएबल पे) इस बात पर निर्भर करेगा कि उनकी कंपनी ग्राहकों को कितनी त्वरित और पारदर्शी सेवा दे रही है।

  • 50% वेटेज परफॉर्मेंस का: अधिकारियों के सालाना परफॉर्मेंस को आंकने के लिए कुल 50 फीसदी नंबर (वेटेज) इस बात पर तय होंगे कि कंपनी ने बीमा विनियामक द्वारा निर्धारित मानकों का कितना पालन किया है।
  • वेबसाइट पर जानकारी छुपाना पड़ेगा भारी: अगर कंपनियां अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर दावों और नियमों से जुड़ी पूरी जानकारी सही और स्पष्ट तरीके से नहीं दिखाती हैं, तो उनके बड़े अधिकारियों के बोनस और वेरिएबल पे को तुरंत रोका जा सकता है।

​🎯 क्यों पड़ी नए नियमों की जरूरत?

​दरअसल, इरडा के पास लंबे समय से ऐसी शिकायतें आ रही थीं कि क्लेम के समय बीमा कंपनियां नियमों का हवाला देकर ग्राहकों को बार-बार चक्कर कटवाती हैं। नए नियमों का सीधा उद्देश्य बीमा सेक्टर में पारदर्शिता लाना और ग्राहकों के भरोसे को मजबूत करना है। अब जब गाज सीधे बड़े अधिकारियों के वेतन पर गिरेगी, तो कंपनियों के भीतर वर्क कल्चर सुधरने और दावों के जल्द निपटान की उम्मीद जताई जा रही है।