गोवंश भूसा दान मामले में बैकफुट पर शिक्षा विभाग, 'अनिवार्य' आदेश को किया 'स्वैच्छिक'
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के नवाबगंज विकास क्षेत्र में प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों के शिक्षकों से निराश्रित गोवंश के लिए भूसा दान लेने के मामले में शिक्षा विभाग को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं। खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय द्वारा पूर्व में जारी किए गए कड़े और दंडात्मक चेतावनी वाले आदेश में अब आंशिक संशोधन कर दिया गया है। विभाग ने साफ किया है कि भूसा दान पूरी तरह से स्वैच्छिक है और इसके लिए किसी पर कोई दबाव नहीं बनाया जाएगा।
पिछले आदेश में दी गई थी विभागीय कार्रवाई की चेतावनी
इससे पहले, कार्यालय खंड शिक्षा अधिकारी, नवाबगंज द्वारा दिनांक 22.05.2026 को एक पत्र (पत्रांक- 175-78/2026-27) जारी किया गया था। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिलाधिकारी, बरेली के निर्देशों का हवाला देते हुए इस आदेश में विकास क्षेत्र नवाबगंज के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों को 46 किलोग्राम प्रति विद्यालय की दर से भूसा दान करने का कड़ा निर्देश दिया गया था।
इतना ही नहीं, इस कार्य को एक सप्ताह के भीतर पूरा कर रसीद कार्यालय में जमा करने के लिए कहा गया था। आदेश के अंत में साफ चेतावनी दी गई थी कि "शिथिलता बरतने वालों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी, जिसका उत्तरदायित्व स्वयं संबंधित का होगा।" इस कड़े रुख के बाद शिक्षक समुदाय और संबंधित हलकों में इस अनिवार्य कोटे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
नए संशोधन पत्र में दी राहत, दबाव हटाने की बात कबूली
मामले की संवेदनशीलता और संभवतः बढ़ते विरोध को देखते हुए खंड शिक्षा अधिकारी, नवाबगंज द्वारा दिनांक 25.05.2026 को एक नया 'आंशिक संशोधित पत्र' (पत्रांक- 189-सी/2026-27) जारी किया गया है।
इस नए पत्र में पिछले आदेश (दिनांक 22.05.2026) का स्पष्ट जिक्र करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी ने सूचित किया है कि: "उक्त के सम्बन्ध में आंशिक संशोधन करते हुए अवगत कराया जाना है कि निराश्रित/बेसहारा गौवंश के भरण पोषण हेतु भूसा दान स्वैच्छिक है, इसमें किसी प्रकार का जोर दबाव नहीं है।"


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