प्रयागराज | राज्य ब्यूरो: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) द्वारा आयोजित की जाने वाली आगामी शिक्षक भर्तियों और UPTET परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने के लिए प्रतियोगियों ने मोर्चा खोल दिया है। अभ्यर्थियों ने आयोग के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर परीक्षा केंद्रों पर 'रैंडमाइजेशन' (अनियमित क्रम) सीटिंग प्लान लागू करने की पुरजोर मांग की है। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया से सामूहिक नकल और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
क्या है 'रैंडमाइजेशन' सीटिंग प्लान?
प्रतियोगियों का सुझाव है कि परीक्षा कक्ष में एक ही विषय के अभ्यर्थियों को एक साथ बैठाने के बजाय विभिन्न विषयों के अभ्यर्थियों को मिश्रित (Mixed) रूप में बैठाया जाए।
- फायदा: यदि पास बैठे अभ्यर्थी अलग-अलग विषयों के होंगे, तो वे एक-दूसरे की उत्तर कुंजी (Answer Key) का लाभ नहीं उठा पाएंगे।
- मिसाल: विज्ञापन संख्या 51 की परीक्षाओं में इस प्रक्रिया के अभाव के कारण सुचिता पर सवाल उठे थे, जिसे अब सुधारने की मांग की जा रही है।
अभ्यर्थियों की 3 प्रमुख मांगें
1. मिश्रित सीटिंग अरेंजमेंट (Randomization):
असिस्टेंट प्रोफेसर, टीजीटी (TGT), और पीजीटी (PGT)-2022 की परीक्षाओं के साथ-साथ आगामी UPTET में भी नकलरोधी सीटिंग प्लान लागू हो। एक ही कक्ष में एक ही विषय के छात्र सीमित न रहें।
2. ओएमआर (OMR) पर विशेष निगरानी:
प्रतियोगी छात्र दिनेश यादव, सुनील कुमार और पीएस परिहार सहित अन्य ने मांग की है कि यदि कोई अभ्यर्थी ओएमआर शीट में 40 प्रतिशत से कम प्रश्न हल करता है, तो कक्ष निरीक्षक (Invigilator) उस पर विशेष नजर रखें। अक्सर खाली ओएमआर छोड़ने के मामलों में बाद में हेराफेरी की आशंका बनी रहती है।
3. त्रुटिरहित और विवाद मुक्त प्रश्न पत्र:
टीजीटी-पीजीटी 2016 और 2021 की परीक्षाओं का हवाला देते हुए अभ्यर्थियों ने कहा कि विवादित प्रश्नों के कारण भर्ती प्रक्रिया न्यायालय में फंस जाती है। इसलिए, अनुभवी विशेषज्ञों से ही पाठ्यक्रम आधारित और सटीक प्रश्न पत्र तैयार कराए जाएं।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
अभ्यर्थियों का कहना है कि पुरानी भर्तियों में विवादित प्रश्नों और चयन प्रक्रिया में हुई देरी ने हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटका दिया है। अब जबकि UPTET के आवेदन लिए जा रहे हैं और टीजीटी-पीजीटी-2022 की परीक्षा तिथियां घोषित हैं, ऐसे में आयोग को परीक्षा की शुचिता (Integrity) सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
शिक्षा सेवा चयन आयोग के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह लाखों अभ्यर्थियों के विश्वास को कैसे कायम रखता है। रैंडमाइजेशन जैसी आधुनिक और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाना प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और योग्य उम्मीदवारों के हित में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है।


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