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परिषदीय स्कूलों की पेयरिंग पर सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मुहर: संशोधित नियमों के साथ अब आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों के पेयरिंग (युग्मन) को लेकर लंबे समय से चला आ रहा कानूनी विवाद अब पूरी तरह समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के निर्णय को बरकरार रखा है। इस फैसले के बाद राज्य सरकार के लिए कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के विलय और पेयरिंग का रास्ता साफ हो गया है।

Primary School Merger and Pairing Process Uttar Pradesh

​क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

​23 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि पेयरिंग प्रक्रिया बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन कर रही है। कोर्ट के इस रुख से अब राज्य सरकार की संशोधित नीति पर मुहर लग गई है।

​सरकार ने पेयरिंग के नियमों में क्या किया संशोधन?

​विवाद के दौरान राज्य सरकार ने अपनी नीति का पुनर्मूल्यांकन किया और अगस्त 2025 में विस्तृत परिपत्र जारी किया। संशोधित नियमों के अनुसार, पेयरिंग के लिए दो मुख्य मानक निर्धारित किए गए हैं:

  • छात्र संख्या: केवल उन्हीं विद्यालयों की पेयरिंग की जाएगी जहाँ छात्र संख्या 50 से कम है।
  • भौगोलिक दूरी: संबंधित विद्यालयों के बीच की दूरी एक किलोमीटर से कम होनी अनिवार्य है।

​सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 13 अक्टूबर 2025 के आदेश के अनुसार, यह नई नीति पूरी तरह से शिक्षा का अधिकार (RTE) के मानकों के अनुरूप लागू की जा रही है।

👉 इसे भी पढ़ें: School Merger Case: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रखा बरकरार, एसएलपी (SLP) खारिज

​विवाद की पृष्ठभूमि: सीतापुर से शुरू हुई कानूनी जंग

​इस पूरे विवाद की शुरुआत सीतापुर में कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक विद्यालयों को नजदीकी स्कूलों से जोड़ने की प्रशासनिक प्रक्रिया से हुई थी। इसके खिलाफ छात्र और अभिभावक हाईकोर्ट पहुंचे थे।

  1. प्रारंभिक सुनवाई: एकल पीठ ने शुरू में याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
  2. खंडपीठ का हस्तक्षेप: मामला लखनऊ खंडपीठ पहुंचा, जहाँ 24 जुलाई 2025 को 'यथास्थिति' का निर्देश दिया गया।
  3. हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय: सरकार द्वारा नियमों में सुधार के बाद, 17 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में सभी पेयरिंग इन्हीं संशोधित दिशा-निर्देशों के आधार पर की जानी चाहिए।

​अब आगे क्या होगा?

​सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग बिना किसी कानूनी अड़चन के उन स्कूलों की पेयरिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेगा जो निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार करना है।

​"सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब 50 से कम छात्र संख्या और एक किमी से कम दूरी वाले स्कूलों की पेयरिंग में कोई बाधा शेष नहीं रही है।"