लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही योगी सरकार ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है। बच्चों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के सभी जनपदों में स्कूली वाहनों की फिटनेस जांच का विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि आगामी 1 अप्रैल से 15 अप्रैल के मध्य विशेष अभियान चलाकर प्रत्येक स्कूली वाहन की गहनता से जांच की जाए।
सड़क सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अक्सर देखा जाता है कि गर्मी की छुट्टियों के बाद या नए सत्र की शुरुआत में कई स्कूलों द्वारा पुराने और अनफिट वाहनों का संचालन किया जाता है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वही वाहन सड़कों पर चलें जो तकनीकी रूप से पूरी तरह दुरुस्त हों और जिनमें सुरक्षा के सभी मानक (जैसे अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स, पैनिक बटन आदि) मौजूद हों।
डिजिटल निगरानी: इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मानीटरिंग पोर्टल
इस बार प्रशासन ने पुरानी व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं। अब स्कूली वाहनों की निगरानी केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है। मुख्य सचिव ने 'इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मानीटरिंग पोर्टल' पर जोर देते हुए कहा कि सभी स्कूलों को अपने वाहनों का संपूर्ण विवरण इस पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज कराना होगा।
इस पोर्टल की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- रीयल-टाइम ट्रैकिंग: पोर्टल के माध्यम से स्कूली बसों और अन्य वाहनों की रीयल-टाइम लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: डिजिटल होने से वाहनों की फिटनेस स्थिति, बीमा और परमिट की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी।
- ऑटोमेटेड अलर्ट सिस्टम: यदि किसी वाहन की फिटनेस की अवधि समाप्त होने वाली होगी, तो पोर्टल संबंधित स्कूल और परिवहन विभाग को स्वतः ही अलर्ट भेज देगा।
सख्त कार्रवाई की चेतावनी
अभियान के दौरान यदि कोई भी स्कूली वाहन अनफिट पाया जाता है या पोर्टल पर विवरण दर्ज नहीं मिलता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि पोर्टल से अलर्ट भेजे जाने के बावजूद यदि फिटनेस नहीं कराई जाती है, तो वाहन का चालान करने के साथ-साथ उसका पंजीकरण भी निरस्त किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को निर्देशित किया गया है कि वे स्कूल संचालकों के साथ बैठक करें और उन्हें इस नई डिजिटल प्रणाली और सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक करें।
निष्कर्ष
प्रशासन की यह पहल न केवल सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में सहायक होगी, बल्कि अभिभावकों के मन में भी विश्वास पैदा करेगी। 15 दिनों का यह सघन अभियान उत्तर प्रदेश की परिवहन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सुधार साबित हो सकता है। स्कूलों को अब न केवल अपनी शिक्षा की गुणवत्ता, बल्कि अपने वाहनों की फिटनेस पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।


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