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विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) के पुनर्गठन को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश, 30 नवंबर तक पूरी होगी प्रक्रिया

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में विद्यालय प्रबंध समिति (School Management Committee-SMC) के पुनर्गठन को लेकर राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश में SMC के गठन, सदस्यों की संरचना, जिम्मेदारियों, उप-समितियों, विद्यालय विकास योजना और विद्यालय स्तर पर समिति की भूमिका को विस्तार से बताया गया है। यह प्रक्रिया विद्यालयों में अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी को मजबूत करने तथा बच्चों के लिए बेहतर शैक्षिक वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

SMC पुनर्गठन 2026

निर्देशों के अनुसार विद्यालय प्रबंध समिति केवल औपचारिक समिति नहीं होगी, बल्कि विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था, सुविधाओं, सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, समावेशी शिक्षा और विद्यालय विकास से जुड़े कई विषयों में सहयोग और निगरानी की भूमिका निभाएगी।

30 नवंबर 2026 तक पूरा होगा SMC का पुनर्गठन

जारी निर्देश के अनुसार विद्यालय प्रबंध समितियों का पुनर्गठन 30 नवंबर 2026 तक पूरा कराया जाना है। आदेश में वर्तमान समितियों के कार्यकाल तथा नई समिति के गठन की प्रक्रिया के संबंध में समयसीमा निर्धारित की गई है। विद्यालय स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समिति का पुनर्गठन कराया जाएगा।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि समिति के पुनर्गठन के बाद सदस्यों को उनकी जिम्मेदारियों और विद्यालय से संबंधित कार्यों की जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि समिति अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभा सके।

SMC में 15 सदस्य होंगे, अभिभावकों की रहेगी प्रमुख भागीदारी

निर्देशों में विद्यालय प्रबंध समिति में कुल 15 सदस्य होने की व्यवस्था बताई गई है। समिति में अभिभावकों की प्रमुख भागीदारी रहेगी। साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा वंचित समूहों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रावधान रखा गया है।

समिति की संरचना इस प्रकार रखी गई है कि विद्यालय से जुड़े अभिभावक और समुदाय के प्रतिनिधि विद्यालय के विकास तथा बच्चों की शिक्षा से संबंधित विषयों में अपनी सहभागिता निभा सकें। समिति की बैठकों और गतिविधियों के माध्यम से विद्यालय की आवश्यकताओं पर चर्चा कर संबंधित विषयों पर सहयोग किया जा सकेगा।

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SMC की जिम्मेदारियां क्या होंगी?

SMC का मुख्य उद्देश्य विद्यालय में सामुदायिक सहभागिता बढ़ाना और बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए सहयोग करना है। निर्देशों में समिति की कई जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से—

  • विद्यालय विकास योजना तैयार करने में सहयोग।
  • बच्चों की उपस्थिति और नामांकन पर ध्यान देना।
  • विद्यालय में सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में सहयोग।
  • शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए सुझाव देना।
  • विद्यालय में उपलब्ध संसाधनों और सुविधाओं की निगरानी।
  • दिव्यांग एवं वंचित बच्चों की शिक्षा में सहयोग।
  • स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता से जुड़े कार्यों में सहभागिता।

इसके अलावा समिति विद्यालय की शैक्षिक गतिविधियों और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं पर भी ध्यान देगी। बच्चों की नियमित उपस्थिति, विद्यालय छोड़ने की स्थिति, सीखने के स्तर और विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित विषयों को समिति के स्तर पर उठाया जा सकता है।

बच्चों की उपस्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता पर रहेगा जोर

SMC को बच्चों की नियमित उपस्थिति और विद्यालय से जुड़े शैक्षिक वातावरण को बेहतर बनाने में सहयोग करना है। समिति विद्यालय में बच्चों की भागीदारी, सीखने के अवसर और शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े विषयों पर चर्चा कर आवश्यक सुझाव दे सकती है।

निर्देशों में समावेशी शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। दिव्यांग बच्चों, वंचित समूहों तथा अन्य जरूरतमंद विद्यार्थियों को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने और उनके लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में समिति की भूमिका तय की गई है।

सुरक्षित, स्वच्छ और बाल-अनुकूल विद्यालय पर जोर

विद्यालय प्रबंध समिति विद्यालय परिसर में सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में भी सहयोग करेगी। विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं, पेयजल, स्वच्छता, शौचालय, भवन सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर समिति नजर रख सकेगी।

बाल सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी समिति को संवेदनशील भूमिका निभानी होगी। इसका उद्देश्य विद्यालय में बच्चों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने में विद्यालय तथा समुदाय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

विद्यालय विकास योजना में भी SMC की महत्वपूर्ण भूमिका

निर्देशों में विद्यालय विकास योजना (School Development Plan) को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। समिति विद्यालय की वास्तविक आवश्यकताओं के आधार पर विकास योजना तैयार करने में सहयोग करेगी। योजना में नामांकन, अधिगम सुधार, आधारभूत सुविधाएं, डिजिटल शिक्षा, खेल, पुस्तकालय, पेयजल, स्वच्छता और अन्य विद्यालयी जरूरतों को शामिल किया जा सकता है।

विद्यालय विकास योजना के माध्यम से विद्यालय की प्राथमिक आवश्यकताओं को चिन्हित कर उनके समाधान की दिशा में काम किया जाएगा। समिति विद्यालय की उपलब्ध सुविधाओं और कमियों पर चर्चा कर विकास से जुड़े प्रस्ताव तैयार करने में सहयोग करेगी।

SMC के अंतर्गत उप-समितियों का भी गठन

SMC के कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए विभिन्न उप-समितियों के गठन का प्रावधान भी किया गया है। निर्देशों में शैक्षिक गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाएं, बाल सुरक्षा एवं स्वच्छता जैसी गतिविधियों से संबंधित उप-समितियों की व्यवस्था बताई गई है।

उप-समितियों के माध्यम से अलग-अलग विषयों पर व्यवस्थित तरीके से काम करने में मदद मिलेगी। इससे विद्यालय की जरूरतों की पहचान, निगरानी और संबंधित गतिविधियों में सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा दिया जा सकेगा।

स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता पर भी निगरानी

SMC को विद्यालय में स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता से जुड़े विषयों में भी सहयोग करना होगा। साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल, विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और पोषण से संबंधित व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में समिति की सहभागिता महत्वपूर्ण होगी।

निर्देशों में विद्यालय को बच्चों के लिए स्वस्थ और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। समिति आवश्यक विषयों को विद्यालय स्तर पर उठाकर उनके समाधान के लिए संबंधित लोगों के साथ समन्वय कर सकती है।

दिव्यांग और वंचित बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान

SMC की भूमिका समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने में भी निर्धारित की गई है। समिति दिव्यांग बच्चों, वंचित समूहों और अन्य जरूरतमंद विद्यार्थियों की विद्यालयी शिक्षा में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सहयोग करेगी।

विद्यालय में सभी बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराने तथा किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित न रहने देने की दिशा में सामुदायिक सहभागिता को मजबूत किया जाएगा।

विद्यालय की सुविधाओं और संसाधनों की निगरानी

समिति विद्यालय में उपलब्ध संसाधनों और सुविधाओं की स्थिति पर भी नजर रखेगी। भवन, कक्षाएं, फर्नीचर, पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, खेल सामग्री तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं से जुड़े विषयों को विद्यालय विकास के संदर्भ में देखा जाएगा।

यदि किसी सुविधा में सुधार की आवश्यकता है तो समिति उसे विद्यालय विकास योजना में प्राथमिकता के साथ शामिल करने के लिए सुझाव दे सकती है।

स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

SMC के माध्यम से विद्यालय और स्थानीय समुदाय के बीच संबंध को मजबूत करने का भी प्रयास किया जाएगा। अभिभावकों और समुदाय की सहभागिता से विद्यालय की आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से समझने तथा बच्चों की शिक्षा के लिए सहयोग जुटाने में मदद मिल सकती है।

SMC की बैठक और जिम्मेदारियों का पालन

समिति के सदस्यों को निर्धारित जिम्मेदारियों के अनुसार विद्यालय से जुड़े विषयों पर सक्रिय भागीदारी करनी होगी। विद्यालय की समस्याओं, विद्यार्थियों की जरूरतों, शैक्षिक गुणवत्ता और विकास कार्यों पर चर्चा कर आवश्यक सुझाव दिए जा सकेंगे।

30 नवंबर तक पूरी करनी होगी प्रक्रिया

निर्देश के अनुसार SMC पुनर्गठन की प्रक्रिया 30 नवंबर 2026 तक पूरी की जानी है। इसके बाद गठित नई समिति विद्यालय स्तर पर निर्धारित जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगी। विद्यालय प्रबंध समिति के प्रभावी संचालन के लिए समिति के सदस्यों को उनके दायित्वों की जानकारी देना और विद्यालय के विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण रहेगा।

कुल मिलाकर, नए निर्देशों के तहत विद्यालय प्रबंध समिति को विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता, बच्चों की उपस्थिति, सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पोषण, समावेशी शिक्षा, विद्यालय विकास योजना और सामुदायिक सहभागिता में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। 30 नवंबर 2026 तक SMC के पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी की जानी है। नई समितियों के माध्यम से विद्यालय और अभिभावकों के बीच समन्वय मजबूत करने तथा विद्यालय के समग्र विकास में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

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