माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने शैक्षिक सत्र 2026-27 में छात्रों, छात्राओं, शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की ऑनलाइन दैनिक उपस्थिति को लेकर सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को सख्त निर्देश जारी किए हैं। परिषद ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों में प्रतिदिन ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य है और इसका शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।
परिषद के अपर सचिव (प्रशासन) सत्येन्द्र कुमार सिंह द्वारा 8 जुलाई 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि परिषद के अंतर्गत संचालित सभी विद्यालयों में वेब पोर्टल एवं मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था पहले से लागू है। इसके संबंध में पूर्व में भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि 31 मार्च 2026 को प्रवेश, पंजीकरण एवं ऑनलाइन उपस्थिति के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए गए थे। इसके बाद 3 जुलाई 2026 को विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था की नियमित समीक्षा एवं अनुश्रवण करने के निर्देश भी दिए गए थे, ताकि सभी विद्यालयों में उपस्थिति समय से दर्ज हो सके। इसके बावजूद परिषद ने पाया है कि कई जनपदों में बार-बार निर्देश दिए जाने के बाद भी सभी विद्यालयों द्वारा नियमित रूप से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं की जा रही है। परिषद ने इसे जिला स्तर पर निगरानी में शिथिलता माना है और इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं।
आदेश में सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने जनपद के माध्यमिक विद्यालयों की नियमित निगरानी करें तथा यह सुनिश्चित कराएं कि प्रत्येक विद्यालय में छात्रों, शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की ऑनलाइन दैनिक उपस्थिति शत-प्रतिशत दर्ज की जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
इस आदेश की प्रतिलिपि शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), संयुक्त शिक्षा निदेशकों तथा संबंधित मंडलीय अधिकारियों को भी भेजी गई है। उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था का सतत अनुश्रवण करते हुए निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है।
इस नए निर्देश के बाद प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था पर निगरानी और अधिक कड़ी होने की संभावना है। परिषद का उद्देश्य विद्यालयों में पारदर्शिता बढ़ाना, नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।


