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टीईटी पास शिक्षामित्रों के समायोजन मामले में सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, यूपी सरकार से मांगा जवाब

Sir Ji Ki Pathshala

टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजन से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद टीईटी पास शिक्षामित्रों को अपने पक्ष में न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

मुख्य बातें

  • ● सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी पास शिक्षामित्रों की एसएलपी पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया।
  • ● मामला सहायक अध्यापक पद पर समायोजन निरस्त किए जाने से जुड़ा है।
  • ● याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे पहले से टीईटी उत्तीर्ण हैं, इसलिए उन्हें अन्य शिक्षामित्रों के समान नहीं माना जा सकता।
  • ● सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूर्व आदेश के अनुसार केवल टीईटी अनुत्तीर्ण शिक्षामित्रों को हटाया जाना था।
  • ● मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त 2026 को होगी।

दरअसल, जुलाई 2017 में सहायक अध्यापक पद पर कार्यरत सभी समायोजित शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त कर दिया गया था। इसमें वे शिक्षामित्र भी शामिल थे जिन्होंने पहले ही शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण कर ली थी। इस निर्णय के विरोध में कई शिक्षामित्रों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 29 जनवरी 2026 को यह कहते हुए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया कि इस विषय पर पहले ही निर्णय दिया जा चुका है।

टीईटी पास शिक्षामित्रों के समायोजन मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करने संबंधी समाचार

हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए शिक्षामित्रों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने 13 जुलाई 2026 को की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एस. पटवालिया ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ताओं को उन शिक्षामित्रों की श्रेणी में रख दिया गया, जिन्हें सेवा से अलग करने का निर्देश दिया गया था, जबकि याचिकाकर्ता स्वयं टीईटी उत्तीर्ण हैं और उनकी स्थिति अलग है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि पूर्व के न्यायिक आदेशों के अनुसार टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को सेवा में बनाए रखा जाना था, जबकि केवल उन शिक्षामित्रों को हटाया जाना था जिन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया और मामले में जवाब तलब किया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण की अगली सुनवाई 27 अगस्त 2026 को निर्धारित की है। अब सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस महत्वपूर्ण मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी।

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