परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर एक बार फिर आंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है। 12 जुलाई 2026 से देशव्यापी विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत विभिन्न राज्यों में सांसदों को ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार से टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की जाएगी।
Teachers Federation of India के अध्यक्ष Dr. Dinesh Chandra Sharma ने बताया कि यह अभियान 12 जुलाई से 18 जुलाई 2026 तक चलेगा। इस दौरान देशभर के सांसदों को ज्ञापन सौंपा जाएगा, जबकि ज्ञापन की एक प्रति प्रधानमंत्री को भी भेजी जाएगी।
फेडरेशन का कहना है कि वर्ष 2011 में Right to Education Act> (आरटीई) लागू होने से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाना चाहिए। संगठन का दावा है कि ऐसे लगभग 1.86 लाख शिक्षक हैं, जो आरटीई लागू होने से पहले सेवा में आ चुके थे और लंबे समय से विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
संगठन की मुख्य मांग है कि केंद्र सरकार आरटीई अधिनियम में आवश्यक संशोधन कर पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट प्रदान करे। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर बाद में लागू किए गए प्रावधानों को लागू करना उचित नहीं है।
टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने सभी संबंधित संगठनों और शिक्षकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। अब शिक्षकों की निगाहें केंद्र सरकार के अगले निर्णय पर टिकी हैं कि टीईटी से छूट की इस मांग पर क्या कदम उठाया जाता है।


