उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों के लिए 'समायोजन' का विषय पिछले काफी समय से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण बना हुआ है, जो सीधे तौर पर हजारों शिक्षकों के कार्यक्षेत्र और भविष्य को प्रभावित करता है। 06 जुलाई 2026 को माननीय उच्च न्यायालय की इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में हुई सुनवाई ने इस कानूनी प्रक्रिया में कई नए और महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट किए हैं। यह सुनवाई न केवल विभाग के लिए डेटा प्रस्तुतीकरण की चुनौतियों को सामने लाती है, बल्कि शिक्षकों के स्थानांतरण और समायोजन पर लगी वर्तमान स्थिति और आगामी समय-सीमा को भी परिभाषित करती है। इस लेख में, हम उक्त सुनवाई का सटीक और विस्तृत सारांश प्रस्तुत कर रहे हैं, जो आपको अदालती निर्देशों और समायोजन से जुड़ी वर्तमान कानूनी स्थिति को समझने में स्पष्टता प्रदान करेगा।
06 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के समायोजन संबंधी मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच और लखनऊ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इन सुनवाइयों का विवरण निम्नलिखित है:
इलाहाबाद हाईकोर्ट (डबल बेंच) के निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान, सरकारी अधिवक्ता द्वारा डेटा सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया। इसे संज्ञान में लेते हुए कोर्ट ने विभाग को पुनः ब्लॉकवार और जिलावार सूची प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। कोर्ट का स्पष्ट कहना है कि सूची आने के बाद ही इस पर बहस की जाएगी। अगली सुनवाई की तिथि 20 जुलाई 2026 नियत की गई है, और तब तक प्रदेश में शिक्षकों के किसी भी प्रकार के समायोजन या स्थानांतरण पर रोक जारी रहेगी।
लखनऊ हाईकोर्ट (सिंगल बेंच) की स्थिति
लखनऊ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में बाराबंकी जिले की सरप्लस सूची से संबंधित याचिका पर सुनवाई हुई। यहाँ पहले से लंबित केस संख्या 274/26 में याचिकाकर्ताओं को राहत मिली हुई है। कोर्ट ने बाराबंकी के सरप्लस याचिकाकर्ताओं को भी इसी मुख्य केस के साथ टैग कर दिया और उन्हें समान राहत प्रदान की है।
पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
नवंबर 2025 के शासनादेश के बाद से शिक्षकों के समायोजन का प्रकरण कानूनी उलझनों में बना हुआ है। इस मामले की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
- विरोधाभासी निर्णय: जहाँ लखनऊ सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए समायोजन पर रोक लगा रखी है, वहीं इलाहाबाद सिंगल बेंच ने समायोजन के पक्ष में अंतिम निर्णय देकर मामला निस्तारित कर दिया था।
- डबल बेंच का हस्तक्षेप: इलाहाबाद सिंगल बेंच के निर्णय के विरुद्ध अपील के बाद, अब डबल बेंच पूरे मामले की निगरानी कर रही है और सरप्लस सूची तैयार करवा रही है।
- समायोजन पर रोक: वर्तमान में दोनों ही न्यायालयों के निर्देशों के परिणामस्वरूप, प्रदेश में समायोजन प्रक्रिया पूरी तरह से रुकी हुई है।
कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार ही अब समायोजन की आगामी प्रक्रिया संभव हो सकेगी। यदि भविष्य में दोनों बेंचों के निर्णयों में अधिक विरोधाभास होता है, तो पूर्णपीठ (Full Bench) के गठन की स्थिति भी बन सकती है, हालांकि फिलहाल इसकी संभावना कम है।


