नई दिल्ली। देश में फार्मेसी शिक्षा और फार्मासिस्ट बनने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नेशनल फार्मेसी कमीशन (NPC) बिल, 2026 का संशोधित मसौदा जारी किया है। इस प्रस्तावित कानून के लागू होने के बाद बी.फार्मा (B.Pharm) या डिप्लोमा इन फार्मेसी (D.Pharm) करने वाले छात्रों को सीधे फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकरण नहीं मिलेगा। अब उन्हें राष्ट्रीय एग्जिट टेस्ट (National Exit Test-Pharmacy) पास करना अनिवार्य होगा।
सरकार का प्रस्ताव है कि मौजूदा फार्मेसी एक्ट, 1948 को समाप्त कर उसकी जगह नेशनल फार्मेसी कमीशन का गठन किया जाए। इसका उद्देश्य देशभर में फार्मेसी शिक्षा के लिए एक समान मानक लागू करना, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और योग्य फार्मासिस्ट तैयार करना है।
वर्तमान व्यवस्था में फार्मेसी की पढ़ाई पूरी करने के बाद राज्य फार्मेसी परिषद में पंजीकरण कराकर फार्मासिस्ट के रूप में कार्य किया जा सकता है। लेकिन नया कानून लागू होने के बाद यह व्यवस्था बदल जाएगी। छात्रों को पहले राष्ट्रीय एग्जिट टेस्ट पास करना होगा, तभी उन्हें पंजीकरण मिलेगा और वे फार्मासिस्ट के रूप में कार्य कर सकेंगे।
सरकार ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि यही राष्ट्रीय एग्जिट टेस्ट भविष्य में पीजी फार्मेसी (Post Graduate Pharmacy) पाठ्यक्रमों में प्रवेश का आधार भी बनेगा। इससे पूरे देश में प्रवेश और पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और एक समान हो सकेगी।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि पहले जारी मसौदे पर प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद संशोधित ड्राफ्ट तैयार किया गया है। अब इस संशोधित मसौदे पर 31 जुलाई 2026 तक छात्रों, शिक्षकों, विशेषज्ञों, शिक्षण संस्थानों और आम नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम विधेयक तैयार किया जाएगा।
यदि यह कानून लागू होता है तो देशभर के लाखों फार्मेसी छात्रों के लिए फार्मासिस्ट बनने की प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी। केवल डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में सफल होना भी आवश्यक होगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से फार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी और देश को अधिक प्रशिक्षित एवं योग्य फार्मासिस्ट मिल सकेंगे।


