रायबरेली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में खंड शिक्षाधिकारी (BEO) पर हुए जानलेवा हमले की गुत्थी पुलिस ने महज 48 घंटे के अंदर सुलझा ली है। इस पूरी घटना का मास्टरमाइंड कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग का ही एक शिक्षक निकला। आरोपी शिक्षक ने अपनी पत्नी (जो खुद एक शिक्षिका है) के काटे गए दो दिन के वेतन और बाधित वेतन वृद्धि का बदला लेने के लिए BEO पर हमले की यह खौफनाक साजिश रची थी। पुलिस ने आरोपी शिक्षक को हिरासत में ले लिया है और हमले में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो गाड़ी भी बरामद कर ली है।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ था हमला?
मंगलवार दोपहर करीब 3:20 बजे खीरों ब्लॉक के खंड शिक्षाधिकारी मुकेश कुमार अपने एक साथी शिक्षक राजेश कुमार सिंह के साथ सरकारी कार्य से जा रहे थे। बछरावां कोतवाली क्षेत्र के चुर्वा बाईपास पर एक स्कॉर्पियो सवार कुछ बदमाशों ने उनकी बोलेरो गाड़ी को ओवरटेक कर रोक लिया। बदमाशों ने BEO मुकेश कुमार और उनके साथी के साथ बुरी तरह मारपीट की और उनकी गाड़ी को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।
पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की तो सीसीटीवी और प्रत्यक्षदर्शियों के माध्यम से स्कॉर्पियो का नंबर ट्रेस किया गया। जांच में पता चला कि गाड़ी की नंबर प्लेट पर '6' को चालाकी से '8' बना दिया गया था, ताकि वह किसी बाइक का नंबर लगे। इसी नंबर की लीड पर पुलिस खीरों थाना क्षेत्र के सूर्यबक्शखेड़ा निवासी शिक्षक सुशील यादव तक पहुंची। कड़ाई से पूछताछ में सुशील ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। सुशील यादव पूर्व माध्यमिक विद्यालय मानपुर में शिक्षक के पद पर तैनात है। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने घटना में प्रयुक्त स्कॉर्पियो भी बरामद कर ली है, जो उसके किसी रिश्तेदार की बताई जा रही है।
विवाद की असली वजह: पत्नी के 'अग्रिम हस्ताक्षर' की आदत
इस पूरी साजिश के पीछे की कहानी बेहद चौंकाने वाली है। आरोपी शिक्षक सुशील यादव की पत्नी प्रिया यादव सरेनी ब्लॉक के एक स्कूल से स्थानांतरित होकर कंपोजिट विद्यालय अख्तेयारपुर आई थीं। आरोप है कि इस विद्यालय के तत्कालीन इंचार्ज प्रधानाध्यापक शैलेश कुमार रावत ने प्रिया यादव को काफी छूट दे रखी थी, जिसके चलते वह नियमित रूप से विद्यालय नहीं आती थीं।
शैलेश के तबादले के बाद मंजू देवी को विद्यालय का इंचार्ज बनाया गया। मंजू देवी ने अनुशासन सख्ती से लागू किया। इसी बीच BEO को शिकायत मिली कि शिक्षिका प्रिया यादव स्कूल सबसे आखिर में आती हैं और एक दिन पहले ही अगले दिन के लिए उपस्थिति पंजिका (रजिस्टर) में 'अग्रिम हस्ताक्षर' (Advance Signature) कर देती हैं।
ऐसे रुका पत्नी का वेतन
नवंबर 2025 में यह मामला तब गरमाया जब प्रिया यादव ने 15 और 20 नवंबर 2025 के लिए अग्रिम हस्ताक्षर कर दिए। प्रधानाध्यापिका मंजू देवी ने इसे पकड़ लिया और उपस्थिति रजिस्टर पर लाल पेन चलाकर या व्हाइटनर लगाकर टिप्पणी लिख दी। इसके बाद मंजू देवी ने संपदा पोर्टल पर उपस्थिति लॉक करते समय प्रिया यादव को 15 और 20 नवंबर को अनुपस्थित दर्शा दिया। इसके परिणामस्वरूप प्रिया यादव का दो दिन का वेतन कट गया।
बदले की कार्रवाई और BEO पर दबाव
वेतन कटने से तिलमिलाई प्रिया यादव ने अन्य स्टाफ के साथ मिलकर प्रधानाध्यापिका मंजू देवी के खिलाफ एमडीएम (MDM) आदि में गड़बड़ी की झूठी शिकायतें करना शुरू कर दिया। मामला जब जिला बेसिक शिक्षाधिकारी (BSA) के पास पहुंचा, तो उन्होंने इसकी जांच BEO मुकेश कुमार को सौंप दी। जांच में प्रधानाध्यापिका मंजू देवी को क्लीन चिट मिल गई और प्रिया यादव द्वारा अग्रिम हस्ताक्षर करने की बात सच साबित हुई।
इसके बाद शिक्षक पति सुशील यादव ने BEO मुकेश कुमार पर दबाव बनाना शुरू किया कि वह उसकी पत्नी के उन दो दिनों (15 और 20 नवंबर) का मेडिकल लीव (Medical Leave) स्वीकृत कर दें, ताकि काटा गया वेतन वापस मिल जाए और वार्षिक वेतन वृद्धि (Increment) भी बाधित न हो। लेकिन BEO मुकेश कुमार ने साफ इनकार कर दिया, क्योंकि मामला BSA स्तर तक जा चुका था। इसी बात से खुन्नस खाकर सुशील यादव ने BEO पर हमले की साजिश रच डाली।
पूर्व इंचार्ज ने भी दी थी BEO को धमकी
इस मामले में पूर्व इंचार्ज शिक्षक शैलेश कुमार रावत की भूमिका भी संदिग्ध है। बताया जा रहा है कि 24 जून को शैलेश ने भी BEO मुकेश कुमार पर प्रिया यादव का मेडिकल स्वीकृत करने का दबाव बनाया था। जब BEO ने मना किया तो शैलेश ने धमकी भरे लहजे में कहा था कि, "ठीक है, आज के बाद मैं इस संबंध में आपसे कुछ नहीं कहूंगा... बात छोटी है लेकिन आगे बहुत बढ़ेगी और आप तक पहुंचेगी।" पुलिस अब शैलेश की भूमिका की भी जांच कर रही है।
आरोपी शिक्षक का रहा है पुराना आपराधिक इतिहास
शिक्षक सुशील यादव का विवादों से पुराना नाता रहा है। जानकारी के अनुसार, वह पहले भी BEO कार्यालय में तैनात रहे एक बाबू (स्व. गिरीश) को 10-12 लोगों के साथ आकर धमका चुका है। उस समय तत्कालीन खंड शिक्षाधिकारी ने मामले में सुलह समझौता कराकर बात रफा-दफा कर दी थी।
फिलहाल पुलिस ने मास्टरमाइंड सुशील यादव को दबोच लिया है। हमले में शामिल अन्य अज्ञात गुंडों की तलाश में पुलिस बछरावां और आसपास के इलाकों में लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का पर्दाफाश किया जाएगा।



