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150 से कम नामांकन वाले स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को 'सरप्लस' मानने पर हाईकोर्ट की रोक संबंधी पुराना ऑर्डर

Sir Ji Ki Pathshala

पुराना कोर्ट आदेश: 150 से कम नामांकन वाले विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को 'सरप्लस' मानने पर हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक (केवल संदर्भ हेतु)

नोट: यह हाईकोर्ट का पुराना अंतरिम आदेश है, जिसे केवल पाठकों की जानकारी और संदर्भ के उद्देश्य से साझा किया जा रहा है। यह आदेश वर्तमान समायोजन प्रक्रिया या वर्तमान कानूनी स्थिति का अंतिम निर्णय नहीं है। किसी भी कार्रवाई से पहले नवीनतम न्यायालय या शासनादेश का अवश्य अवलोकन करें।

प्रयागराज: बेसिक शिक्षा विभाग में प्रधानाध्यापकों के समायोजन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2024 में एक अंतरिम आदेश पारित किया था। इस आदेश में अदालत ने 16 अगस्त 2024 को जारी शासनादेश के उस प्रावधान पर रोक लगा दी थी, जिसके तहत 150 से कम नामांकन वाले प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को 'सरप्लस' (अतिरिक्त) मानकर उनके स्थानांतरण अथवा समायोजन की प्रक्रिया अपनाई जानी थी।

उस समय कई प्रधानाध्यापकों ने इस शासनादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाओं में कहा गया था कि केवल छात्र संख्या के आधार पर किसी प्रधानाध्यापक को सरप्लस घोषित करना उचित नहीं है और यह सेवा नियमों के अनुरूप भी नहीं है।

मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर विचार करते हुए संबंधित प्रावधान पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि अंतिम निर्णय होने तक 150 से कम नामांकन वाले विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को सरप्लस मानकर उनके विरुद्ध स्थानांतरण या समायोजन की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

यह आदेश उस समय संबंधित प्रधानाध्यापकों के लिए राहत लेकर आया था। हालांकि यह केवल एक अंतरिम आदेश था और मामले का अंतिम निर्णय बाद की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर था।

वर्तमान समय में बेसिक शिक्षा विभाग में समायोजन और स्थानांतरण से संबंधित नई प्रक्रियाएं एवं शासनादेश लागू हो सकते हैं। इसलिए इस पुराने आदेश को वर्तमान व्यवस्था का आधार मानना उचित नहीं होगा। यदि किसी अभ्यर्थी, शिक्षक या प्रधानाध्यापक को वर्तमान नियमों या समायोजन प्रक्रिया की जानकारी चाहिए, तो उन्हें नवीनतम शासनादेश, विभागीय निर्देश या न्यायालय के ताजा आदेशों का अध्ययन करना चाहिए।

यह पुराना कोर्ट आदेश केवल संदर्भ और अभिलेखीय (Reference) उद्देश्य से साझा किया जा रहा है, ताकि पाठक उस समय की न्यायिक कार्यवाही और आदेश को समझ सकें।

150 से कम नामांकन वाले विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों पर हाईकोर्ट का पुराना अंतरिम आदेश