प्रयागराज: केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की इलाहाबाद पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ केवल आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर उसे सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि विभाग को प्रत्येक मामले के तथ्यों, आरोपों की प्रकृति और मेरिट का मूल्यांकन करना होगा। केवल एफआईआर या लंबित मुकदमे के आधार पर नियुक्ति रद्द करना उचित नहीं है।
यह फैसला मुरादाबाद निवासी हर्षित कुमार की याचिका पर सुनाया गया। CAT की प्रशासनिक सदस्य मंजू पांडे ने उत्तर रेलवे द्वारा हर्षित कुमार की अनुकंपा नियुक्ति रद्द करने के आदेश को निरस्त करते हुए रेलवे को निर्देश दिया कि उसे 10 जनवरी 2022 के आदेश के अनुसार स्टेशन मास्टर के पद पर तत्काल नियुक्ति दी जाए।
कोविड के दौरान पिता का निधन, अनुकंपा नियुक्ति के लिए किया आवेदन
हर्षित कुमार के पिता फकीर चंद उत्तर रेलवे में कार्यरत थे। कोविड-19 महामारी के दौरान उनके निधन के बाद परिवार ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। रेलवे की सलाह पर हर्षित ने बीबीए की पढ़ाई पूरी की और दोबारा आवेदन किया। इसके बाद उसने योग्यता परीक्षा और मेडिकल परीक्षण सफलतापूर्वक पास किया तथा स्टेशन मास्टर (लेवल-6) पद के लिए चयनित हो गया। फरवरी 2022 में उसे प्रशिक्षण के लिए भी भेज दिया गया।
पुलिस सत्यापन में सामने आया पुराना मामला
प्रशिक्षण के दौरान पुलिस सत्यापन में वर्ष 2020 में दर्ज एक परीक्षा अधिनियम और धोखाधड़ी से जुड़े मामले का उल्लेख सामने आया। हालांकि एफआईआर में हर्षित का नाम सीधे तौर पर दर्ज नहीं था। उसका नाम केवल रोल नंबर के आधार पर जोड़ा गया था और उसे परीक्षा में नकल करते हुए भी नहीं पकड़ा गया था। इस मामले में उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत भी मिल चुकी थी।
इसके बावजूद उत्तर रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी और कहा कि जब तक मामला अदालत में लंबित है, तब तक नियुक्ति नहीं दी जा सकती।
CAT ने रेलवे का आदेश किया रद्द
हर्षित कुमार ने रेलवे के इस फैसले को CAT में चुनौती दी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अधिकरण ने पाया कि अभ्यर्थी ने विभाग से कोई तथ्य नहीं छिपाया था। एफआईआर में उसका नाम नहीं था और उसके खिलाफ गंभीर अपराध का प्रत्यक्ष आरोप भी नहीं था। ऐसे में केवल लंबित मुकदमे के आधार पर नियुक्ति रद्द करना कानून के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
CAT ने सुप्रीम कोर्ट के अवतार सिंह बनाम भारत संघ सहित विभिन्न न्यायिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी मामले का लंबित होना दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। कानून के अनुसार जब तक अदालत किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं करती, तब तक उसे निर्दोष माना जाता है।
रेलवे को तुरंत नियुक्ति देने का निर्देश
अधिकरण ने रेलवे को निर्देश दिया कि हर्षित कुमार को स्टेशन मास्टर के पद पर तत्काल नियुक्ति दी जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में लंबित आपराधिक मामले में अदालत का फैसला हर्षित के खिलाफ आता है, तो रेलवे नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।
अभ्यर्थियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यह निर्णय उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके खिलाफ कोई मामला लंबित है लेकिन अभी तक अदालत ने उन्हें दोषी नहीं ठहराया है। CAT ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी विभागों को नियुक्ति से पहले प्रत्येक मामले की परिस्थितियों और आरोपों की गंभीरता का निष्पक्ष मूल्यांकन करना चाहिए, न कि केवल लंबित एफआईआर के आधार पर उम्मीदवार को नौकरी से वंचित करना चाहिए।


