उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के सरकारी शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए 'कैशलेस चिकित्सा योजना' की शुरुआत स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बिना किसी वित्तीय तनाव के बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है। वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत स्टेट हेल्थ कार्ड बनाने और आवेदन करने की प्रक्रिया पूरे प्रदेश में तेजी से चल रही है।
चूंकि यह एक डिजिटल और बेहद संवेदनशील प्रक्रिया है, इसलिए आवेदन करते समय थोड़ी सी भी लापरवाही या अधूरी जानकारी आपके फॉर्म को रिजेक्ट (निरस्त) करा सकती है। विभाग द्वारा समय-समय पर इसके नियमों में बदलाव और स्पष्टीकरण जारी किए जाते हैं। यदि आप भी इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन करने जा रहे हैं, तो फॉर्म सबमिट करने से पहले नीचे दी गई 6 सबसे महत्वपूर्ण बातों और तकनीकी नियमों को अच्छी तरह समझ लें आपके लिए इस योजना से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को संकलित कर एक विस्तृत गाइड नीचे दी जा रही है:
1. आधार कार्ड में वर्तमान पता (Address) होना अनिवार्य
यदि आप या आपके परिवार के किसी भी सदस्य के आधार कार्ड पर उत्तर प्रदेश से बाहर का स्थाई पता दर्ज है, तो वर्तमान स्थिति में आप आवेदन नहीं कर पाएंगे।
- क्या करें? आवेदन करने से पहले अपने आधार कार्ड में उत्तर प्रदेश का वर्तमान पता अपडेट करवाएं। पता संशोधित होने के बाद ही पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया शुरू करें।
2. पहले से हेल्थ स्कीम लेने वाले आवेदकों के लिए विकल्प
ऐसे शिक्षक या कर्मचारी जिन्होंने पहले किसी प्राइवेट कंपनी से कोई हेल्थ इंश्योरेंस या स्कीम ले रखी थी, पोर्टल पर उनका स्टेटस 'ऑलरेडी अप्लाइड' (Already Applied) दिखा सकता है।
- ऐसे आवेदकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप फॉर्म में 'एडिट' (Edit) के विकल्प पर जाकर अपनी अधूरी या नई सूचनाओं को अपडेट करके फॉर्म को सफलतापूर्वक सबमिट कर सकते हैं।
3. आश्रितों (Dependents) के लिए आधार के नियम
योजना का लाभ लेने के लिए परिवार के सभी सदस्यों (पत्नी और बच्चों) का आधार कार्ड होना अनिवार्य है।
- यदि आधार नहीं बना है: आप अभी उनके बिना आवेदन कर सकते हैं। बाद में आधार कार्ड बन जाने पर 'ऐड डिपेंडेंट' (Add Dependent) विकल्प का उपयोग करके उन्हें जोड़ सकते हैं।
- 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे: यदि बच्चे की उम्र 5 साल से कम है और उसका आधार नहीं बना है, तो उसे मां की आईडी (ID) के आधार पर ही कैशलेस इलाज का लाभ मिलता रहेगा।
4. वर्किंग कपल्स (पति-पत्नी दोनों शिक्षक होने पर) के लिए सलाह
यदि किसी परिवार में पति और पत्नी दोनों ही बेसिक या माध्यमिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं, तो उन्हें एक ही फॉर्म में आश्रित बनने के बजाय दोनों को अलग-अलग आवेदन करना चाहिए। अलग-अलग आवेदन करने से दोनों को योजना का स्वतंत्र और अतिरिक्त लाभ मिल सकेगा।
5. विवाहित महिला शिक्षकों के लिए माता-पिता और सास-ससुर को जोड़ने के नियम
- माता-पिता का नाम: विवाहित महिला शिक्षक अपने मायके के माता-पिता का नाम आश्रित के रूप में नहीं जोड़ सकती हैं।
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सास-ससुर को जोड़ने की शर्तें: सास-ससुर को आश्रित (Dependent) के रूप में केवल तभी जोड़ा जा सकता है जब:
- महिला का पति कहीं कार्यरत न हो।
- सास-ससुर किसी भी प्रकार के पेंशनभोगी या वेतनभोगी न हों।
- उनकी मासिक आय निर्धारित सीमा से कम हो।
6. शिक्षणेत्तर कर्मचारियों (बाबू और चतुर्थ श्रेणी कर्मी) के लिए अपडेट
फिलहाल पोर्टल पर मुख्य रूप से शिक्षकों के लिए विकल्प सुचारू रूप से काम कर रहे हैं। बाबू (लिपिक वर्ग) या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी साथियों के लिए आवेदन का स्पष्ट विकल्प अभी लाइव नहीं हुआ है।
- उम्मीद है कि विभाग द्वारा जल्द ही पोर्टल को अपडेट कर इनके लिए भी विकल्प खोल दिया जाएगा, जिसके बाद ही ये साथी आवेदन कर सकेंगे। तब तक कृपया प्रतीक्षा करें।


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