यूपी के माध्यमिक शिक्षकों के लिए बड़ी राहत: पुरानी अर्हताओं के आधार पर ही होगी पदोन्नति, अड़चनें दूर
उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत हजारों सहायक अध्यापकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से चली आ रही पदोन्नति की अड़चनें अब शासन के नए निर्णय के बाद समाप्त हो गई हैं। माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक से प्रवक्ता पद पर पदोन्नति के लिए अब पुरानी शैक्षिक अर्हताओं को ही मान्य कर दिया गया है, जिससे उन शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है जो नियमों में बदलाव के कारण असमंजस की स्थिति में थे।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब यूपी बोर्ड ने नौ सितंबर 2025 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीडी) भर्ती के लिए नियमों में संशोधन किया था। इस संशोधन के लागू होने के बाद से ही हाईस्कूल के सहायक अध्यापकों की इंटरमीडिएट प्रवक्ता पद पर पदोन्नति को लेकर व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हो गई थीं। नई अर्हताओं के कारण कई शिक्षक अपनी पात्रता को लेकर चिंता में थे, जिसके चलते पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी।
शिक्षक संगठनों और संबंधित पक्षों की चिंताओं को देखते हुए, यूपी बोर्ड ने शासन को नियमों में आवश्यक संशोधन करने का प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव पर त्वरित कार्यवाही करते हुए शासन ने 18 जून 2026 को अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के बाद अब स्पष्ट कर दिया गया है कि जिन सहायक अध्यापकों की नियुक्ति नौ सितंबर 2025 के शासनादेश से पूर्व हुई थी, वे पूर्व में प्रचलित व्यवस्था और अर्हताओं के आधार पर ही प्रवक्ता पद पर पदोन्नति के लिए पूरी तरह से योग्य माने जाएंगे।
शासन के इस फैसले से अब उन सभी शिक्षकों के लिए पदोन्नति का मार्ग साफ हो गया है, जो नियमों में हुए बदलाव के कारण फंसी हुई पदोन्नति की प्रक्रिया से परेशान थे। चूंकि इन शिक्षकों की नियुक्ति पुराने नियमों और शर्तों के आधार पर की गई थी, इसलिए उनकी पदोन्नति की व्यवस्था को वर्तमान प्रावधानों के साथ जोड़ दिया गया है। शिक्षा विभाग के जानकारों का मानना है कि इस कदम से न केवल वर्षों से लंबित पड़ी पदोन्नतियों में तेजी आएगी, बल्कि स्कूलों में रिक्त चल रहे प्रवक्ता के पदों को भी जल्द भरा जा सकेगा, जिससे शैक्षिक वातावरण में सुधार होगा।
अब इस संशोधन के बाद, माध्यमिक शिक्षा विभाग में पदोन्नति की प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ सकेगी, जिससे अध्यापकों के मनोबल में वृद्धि होगी और प्रशासनिक स्तर पर भी कार्यप्रणाली सरल हो जाएगी।


