यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने वाले करोड़ों उपयोगकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) जल्द ही एक ऐसी नई सुविधा पेश करने जा रहा है, जिसके बाद ग्राहकों को अपने सभी यूपीआई ऑटो-पे यानी ई-मैंडेट भुगतान किसी भी एक यूपीआई ऐप पर एक साथ दिखाई देंगे। अभी तक की व्यवस्था के अनुसार, यदि किसी उपयोगकर्ता ने अलग-अलग यूपीआई ऐप्स का उपयोग करके अपने बिजली बिल, ओटीटी सब्सक्रिप्शन या कर्ज की ईएमआई के लिए ऑटो-पे सेट किया है, तो उन्हें उसकी स्थिति जांचने के लिए हर बार संबंधित ऐप पर ही जाना पड़ता है।
इस नई सुविधा के लागू होने के बाद ग्राहकों को यह परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। एनपीसीआई ने सभी भुगतान सेवा प्रदाता कंपनियों को अपने सिस्टम में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने के निर्देश दिए हैं ताकि सभी ई-मैंडेट को एक ही स्थान पर प्रदर्शित किया जा सके। इससे ग्राहकों को अपना वित्तीय प्रबंधन करने में काफी आसानी होगी।
इस फीचर के आने से सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि ग्राहक आसानी से यह देख सकेंगे कि कौन-कौन से ऑटो-पे भुगतान अभी सक्रिय हैं और किस ऐप से कितनी राशि काटी जा रही है। इससे न केवल मासिक खर्चों पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी, बल्कि गलतियों से होने वाले दोहरे भुगतान या अनजाने में किए गए भुगतानों से भी बचा जा सकेगा। जिन ग्राहकों को यह याद नहीं रहता कि उन्होंने किन सेवाओं के लिए ऑटो-पे की अनुमति दे रखी है, उनके लिए यह एक प्रभावी टूल साबित होगा।
हालांकि, उपयोगकर्ताओं को यह ध्यान रखना होगा कि यह फीचर मुख्य रूप से जानकारी देखने के लिए है। यदि कोई ग्राहक किसी सब्सक्रिप्शन को रद्द करना चाहता है या उसमें कोई बदलाव करना चाहता है, तो उसे उस मूल ऐप पर ही जाना होगा जिसके जरिए उसने पहली बार ऑटो-पे की सुविधा शुरू की थी। सभी ऐप्स ई-मैंडेट की सूची तो दिखाएंगी, लेकिन किसी भी लेनदेन को प्रबंधित या एडिट करने के लिए उपयोगकर्ता को संबंधित ऐप पर रिडायरेक्ट कर दिया जाएगा।
यूपीआई ऑटो-पे के बढ़ते चलन के बीच एनपीसीआई का यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो मई 2026 में शीर्ष 10 बैंकों ने करीब 1.6 अरब ऑटो-पे लेनदेन प्रोसेस किए हैं, जबकि एक साल पहले यह संख्या 57.7 करोड़ थी। ईएमआई, बीमा प्रीमियम, एसआईपी और उपयोगिता बिलों के लिए ऑटो-पे का बढ़ता उपयोग यह दर्शाता है कि भविष्य में यह सुविधा डिजिटल लेनदेन को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाने में मददगार साबित होगी।


