शिक्षा जगत में बड़े सुधार: आईटीआई छात्रों को 12वीं का अवसर और विश्वविद्यालय में नई मूल्यांकन व्यवस्था
उत्तर प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में हाल ही में दो महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं जो छात्रों के भविष्य को नई दिशा देने वाले हैं। एक ओर जहां उन युवाओं के लिए आगे बढ़ने के रास्ते खुल रहे हैं जिन्होंने आईटीआई के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी, वहीं दूसरी ओर उच्च शिक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए एक बेहद प्रभावी मूल्यांकन व्यवस्था लागू की गई है।
राज्य सरकार और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के बीच एक प्रस्तावित समझौते के तहत आईटीआई पास युवाओं को नौकरी के साथ-साथ 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने का अवसर मिलेगा। एनआईओएस के क्षेत्रीय निदेशक संजय कुमार ने इस पहल पर जानकारी देते हुए बताया कि अब तक बड़ी संख्या में छात्र हाईस्कूल के बाद आईटीआई का कोर्स करके रोजगार में लग जाते थे, जिससे उनकी औपचारिक शिक्षा अधूरी रह जाती थी। इस नए एमओयू के बाद सरकार आईटीआई विद्यार्थियों का डेटाबेस तैयार करेगी और उनसे संपर्क कर उन्हें संस्थान के माध्यम से 12वीं की शिक्षा प्रदान की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कौशल प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है, जिससे उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने और करियर में पदोन्नति पाने में आसानी होगी।
दूसरी ओर, प्रयागराज स्थित प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) राज्य विश्वविद्यालय ने परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली में बड़ा फेरबदल करते हुए इसे और अधिक पारदर्शी बनाया है। अब परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट छात्रों को अपनी उत्तरपुस्तिका देखने के लिए विश्वविद्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। नई व्यवस्था के तहत, कोई भी छात्र विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर 300 रुपये का शुल्क जमा करके ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। आवेदन मिलने के तीन से चार दिनों के भीतर संबंधित विषय की स्कैन की गई उत्तरपुस्तिका छात्र के पंजीकृत ई-मेल पते पर भेज दी जाएगी।
इस प्रक्रिया से छात्र स्वयं अपने उत्तरों और प्राप्त अंकों का मिलान कर सकेंगे। यदि किसी छात्र को अंकों के योग में गड़बड़ी या कोई प्रश्न छूट जाने जैसी त्रुटि नजर आती है, तो वह स्क्रूटनी के लिए आवेदन कर सकता है। यदि इसके बाद भी छात्र मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं होता है, तो वह 2500 रुपये शुल्क जमा करके चुनौतीपूर्ण मूल्यांकन (चैलेंज इवैल्यूएशन) के लिए आवेदन करने का विकल्प चुन सकता है। इस व्यवस्था के अंतर्गत उत्तरपुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन दो स्वतंत्र परीक्षकों से कराया जाएगा। यदि इस पुनर्मूल्यांकन में अंकों का अंतर 20 प्रतिशत या उससे अधिक पाया जाता है, तो इसे गंभीर त्रुटि माना जाएगा। ऐसी स्थिति में छात्र को शुल्क का 1500 रुपये वापस कर दिया जाएगा और संबंधित परीक्षक को भविष्य की मूल्यांकन प्रक्रिया से बाहर किया जा सकता है।
कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह ने इस नई व्यवस्था के बारे में स्पष्ट किया कि इसका एकमात्र उद्देश्य मूल्यांकन की गुणवत्ता में सुधार लाना, छात्रों का भरोसा जीतना और उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पूर्ण जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यह दोनों ही कदम प्रदेश के शिक्षा तंत्र को आधुनिक, छात्र-केंद्रित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास साबित हो रहे हैं।


