प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग में कार्यरत लाखों शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं कल्याणकारी निर्णय लिया है। सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के अंतर्गत नियोक्ता (शासन) के हिस्से के योगदान हेतु 5.45 अरब रुपये (545 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम धनराशि को एकमुश्त स्वीकृति प्रदान कर दी है। शिक्षा निदेशालय, प्रयागराज द्वारा इस संबंध में आधिकारिक वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। सरकार के इस कदम से उन सहस्रों शिक्षकों और कर्मचारियों की बड़ी चिंता दूर हो गई है, जिनका एनपीएस का पैसा बजट के अभाव में विगत कुछ समय से लंबित था।
यह संपूर्ण व्यवस्था क्या है, इस बजट से कर्मचारियों को क्या लाभ प्राप्त होगा और यह धनराशि उनके खातों में किस प्रकार पहुंचेगी, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
एनपीएस अंशदान का गणित: क्यों अनिवार्य था यह बजटीय आवंटन?
उत्तर प्रदेश में 1 अप्रैल 2005 अथवा उसके पश्चात नियुक्त हुए सभी शासकीय शिक्षकों, प्राध्यापकों और विद्यालयी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) के स्थान पर राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) लागू की गई थी। इस नई व्यवस्था के अंतर्गत कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य और सेवानिवृत्ति (Retirement) के पश्चात के व्ययों के लिए एक कॉर्पस (Fund) तैयार किया जाता है। इस कोष में धनराशि जमा होने का एक निश्चित नियम है:
- कर्मचारी की हिस्सेदारी: प्रति माह शिक्षक या कर्मचारी के मूल वेतन (Basic Salary) और महंगाई भत्ते (DA) को मिलाकर जो धनराशि निर्मित होती है, उसका 10 प्रतिशत हिस्सा उनके वेतन से काट लिया जाता है।
- शासकीय हिस्सेदारी: नियमानुसार, जितनी धनराशि कर्मचारी के वेतन से कटती है, राज्य सरकार अपनी ओर से उसमें 14 प्रतिशत की अतिरिक्त राशि मिलाकर कर्मचारी के विशिष्ट पेंशन खाते में जमा करती है।
विगत कई महीनों से प्रदेश के विभिन्न जनपदों से यह शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि कर्मचारियों के वेतन से तो 10% की कटौती प्रति माह नियमित रूप से हो रही है, परंतु शासन की ओर से मिलने वाला 14% का अंशदान बजट की अनुपलब्धता अथवा तकनीकी व्यवधानों के कारण समय पर जमा नहीं हो पा रहा था। इसके चलते शिक्षकों के पेंशन खाते का ग्राफ रुक गया था। शिक्षक संगठन निरंतर सरकार से इस बकाए को जारी करने की मांग कर रहे थे। इसी समस्या का स्थायी समाधान करते हुए शासन ने अब 5.45 अरब रुपये का विशाल बजट एक साथ अवमुक्त (Release) कर दिया है।
लाभार्थी श्रेणियाँ: किन संवर्गों को प्राप्त होगा वित्तीय लाभ?
शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस 545 करोड़ रुपये के बजट का लाभ मुख्य रूप से तीन श्रेणियों के कर्मचारियों को प्राप्त होगा:
- परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक: राज्य के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक (Primary) और उच्च प्राथमिक (Junior High School) विद्यालयों में कार्यरत समस्त शिक्षक।
- अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) स्कूलों के शिक्षक: ऐसे माध्यमिक विद्यालय (Inter Colleges) जो निजी प्रबंधतंत्र द्वारा संचालित हैं परंतु उन्हें सरकार द्वारा शत-प्रतिशत आर्थिक सहायता या वेतन प्राप्त होता है, उनके शिक्षक एवं प्रधानाचार्य।
- शिक्षणेत्तर कर्मचारी (नॉन-टीचिंग स्टाफ): विद्यालयों एवं विभागीय कार्यालयों में कार्यरत कनिष्ठ व वरिष्ठ सहायक (बाबू), कंप्यूटर ऑपरेटर, प्रयोगशाला सहायक (लैब असिस्टेंट) एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (परिचारक)।
प्रान (PRAN) खाते में सीधे हस्तांतरण: बजट डायवर्जन पर शासन की सख्त रोक
सरकार द्वारा जारी की गई यह धनराशि किसी भी कर्मचारी को न तो नकद (Cash) दी जाएगी और न ही उनके सामान्य बचत बैंक खाते (Saving Bank Account) में प्रेषित की जाएगी। यह संपूर्ण राशि सीधे कर्मचारियों के PRAN (Permanent Retirement Account Number) खाते में डिजिटल माध्यम से स्थानांतरित की जाएगी। प्रान नंबर प्रत्येक उस कर्मचारी को आवंटित होता है जो एनपीएस का हिस्सा है, और इस खाते का प्रबंधन सीधे एनएसडीएल (NSDL) जैसी केंद्रीय संस्थाएं करती हैं।
शिक्षा निदेशालय ने इस बजट को जारी करने के साथ ही समस्त जनपदों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA), जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) तथा वित्त एवं लेखाधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि:
- इस राशि का उपयोग केवल और केवल एनपीएस के शासकीय अंशदान को चुकाने के लिए ही किया जाएगा।
- इस बजट को किसी अन्य मद (जैसे वेतन, एरियर या रख-रखाव) में डायवर्ट (अन्यत्र खर्च) नहीं किया जा सकता।
- यदि किसी जनपद में इस धनराशि को स्थानांतरित करने में शिथिलता या विलंब पाया गया, तो वहां के संबंधित वित्त अधिकारी के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया: चक्रवृद्धि ब्याज के नुकसान से मिलेगी मुक्ति
सरकार के इस त्वरित निर्णय पर विभिन्न शिक्षक संघों और कर्मचारी संगठनों ने हर्ष व्यक्त किया है और सरकार के प्रति आभार ज्ञापित किया है। शिक्षक प्रतिनिधियों का कहना है कि पेंशन की धनराशि विलंब से जमा होने के कारण कर्मचारियों को दोहरा नुकसान हो रहा था।
पहला नुकसान यह कि धनराशि अकाउंट में न होने से वह शेयर बाजार या सरकारी बांड्स में निवेश नहीं हो पा रही थी, जिससे मिलने वाले लाभांश (Return) का नुकसान हो रहा था। दूसरा, देरी से पैसा जमा होने पर कंपाउंड इंटरेस्ट (चक्रवृद्धि ब्याज) का लाभ भी नहीं मिल पा रहा था। अब जब 5.45 अरब रुपये का बैकलॉग एक साथ क्लियर होगा, तो कर्मचारियों के खातों में पुरानी विसंगति दूर हो जाएगी और उनका भविष्य अधिक सुरक्षित व सुदृढ़ हो सकेगा।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जनपद स्तर पर कागजी और तकनीकी प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। आगामी दो सप्ताह (10 से 15 दिनों) के भीतर यह धनराशि सभी पात्र शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रान खातों में परिलक्षित (Reflect) होना प्रारंभ हो जाएगी।


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