Type Here to Get Search Results !

उत्तर प्रदेश राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025: चयन प्रक्रिया, पात्रता व समय सारिणी जारी

Sir Ji Ki Pathshala

उत्तर प्रदेश राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025: परिषदीय शिक्षकों के चयन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश, अर्हता एवं समय सारिणी जारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बुनियादी शिक्षा ढांचे को सुदृढ़ बनाने और उत्कृष्ट शैक्षणिक नेतृत्व देने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने के उद्देश्य से शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश द्वारा 'राज्य अध्यापक पुरस्कार वर्ष 2025' के चयन की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। शिक्षा निदेशक (बेसिक) श्री अनिल भूषण चतुर्थेदी द्वारा समस्त जनपदों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को जारी पत्र के अनुसार, शासन के आदेश संख्या-321/अरसठ-4-2026 दिनांक 03 जून, 2026 के अनुपालन में चयन प्रक्रिया, नियमावली और विस्तृत समय सारिणी निर्धारित कर दी गई है।

राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025 उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग शासनादेश

​इस प्रतिष्ठित पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूलों में कार्यरत उन सर्वोत्तम शिक्षकों के अनुपम योगदान को प्रोत्साहित करना है, जिन्होंने अपनी अटूट प्रतिबद्धता, कठोर परिश्रम और नवाचारों के माध्यम से न केवल विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता को एक नया आयाम दिया है, बल्कि अपने विद्यार्थियों के जीवन को भी समृद्धशाली और दिशावान बनाया है। पुरस्कार के लिए योग्य शिक्षक 'प्रेरणा' वेब पोर्टल (www.prernaup.in) के माध्यम से केवल ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकेंगे।

​1. महत्वपूर्ण तिथियाँ एवं समय सारिणी (Timeline)

​राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025 के सुचारू और पारदर्शी संपादन के लिए शासन द्वारा एक निश्चित समय सीमा तय की गई है, जिसके प्रमुख चरण निम्नवत् हैं:

  • ऑनलाइन आवेदन की अवधि (07 जून, 2026 से 30 जून, 2026 के मध्य): इस अवधि में 'प्रेरणा' वेब पोर्टल को लाइव किया जाएगा, जहाँ सभी इच्छुक और पात्र अध्यापक/अध्यापिकाएँ अपना विस्तृत प्रार्थना-पत्र और साक्ष्य ऑनलाइन प्रेषित कर सकेंगे।

  • जनपद स्तर पर परीक्षण एवं अग्रेषण (01 जुलाई, 2026 से 20 जुलाई, 2026 के मध्य): इस चरण में जनपद चयन समिति द्वारा शिक्षकों के प्राप्त आवेदनों का अभिलेखीय आधार पर गहन परीक्षण और भौतिक सत्यापन किया जाएगा। शिक्षकों के मूल्यांकन, सतर्कता और सत्यनिष्ठा की जांच के उपरान्त प्रत्येक जनपद से अधिकतम 3 श्रेष्ठ शिक्षकों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा और उनके सतर्कता एवं सत्यनिष्ठा प्रमाण-पत्र (Vigilance Clearance & Integrity Certificate) सहित उनके आवेदनों को पोर्टल के माध्यम से राज्य चयन समिति को अग्रेषित किया जाएगा।

  • राज्य स्तर पर मूल्यांकन एवं चयन (01 अगस्त, 2026 से 14 अगस्त, 2026 के मध्य): इस अंतिम चरण में जनपद चयन समिति द्वारा अग्रेषित शिक्षकों के आवेदन पत्रों का राज्य चयन समिति द्वारा पुनः बारीकी से परीक्षण एवं मूल्यांकन किया जाएगा। इस दौरान शिक्षकों के प्रस्तुतीकरण और साक्षात्कार के आधार पर अंतिम रूप से चयन कर पुरस्कार की संस्तुति शासन को प्रेषित की जाएगी।

​2. आवेदन हेतु अनिवार्य अर्हताएं एवं शर्तें (Eligibility Criteria)

​पुरस्कार की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए शिक्षा विभाग ने सख्त मानदंड निर्धारित किए हैं। केवल वही शिक्षक आवेदन के पात्र होंगे जो निम्नलिखित शर्तों को पूर्ण करते हों:

  • पद एवं संस्थान: उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित परिषदीय प्राथमिक / उच्च प्राथमिक विद्यालयों तथा अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूलों में कार्यरत केवल नियमित (Regular) अध्यापक और अध्यापिकाएं ही आवेदन के पात्र हैं।

  • न्यूनतम सेवा अवधि: केवल नियमित रूप से कार्यरत ऐसे अध्यापक/अध्यापिकाएं आवेदन हेतु अर्ह होंगे जिन्होंने न्यूनतम 15 वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली हो और सेवानिवृत्त (Retirement) होने में 05 वर्ष से कम की अवधि शेष न बची हो।

  • न्यूनतम छात्र नामांकन: शिक्षक के विद्यालय में छात्र-छात्राओं की संख्या मानक के अनुरूप होनी चाहिए:
    • ​प्राथमिक विद्यालयों (Primary Schools) में न्यूनतम 150 छात्र-छात्राएं होने अनिवार्य हैं।
    • ​उच्च प्राथमिक विद्यालयों (Upper Primary Schools) में न्यूनतम 105 छात्र-छात्राएं होने अनिवार्य हैं।
    • ​कम्पोजिट विद्यालयों (Composite Schools) में न्यूनतम 255 छात्र-छात्राएं नामांकित होने अनिवार्य हैं।

    हैं।

    • विभागीय छवि एवं रिकॉर्ड: शिक्षक के सेवा अभिलेख उत्कृष्ट श्रेणी के होने चाहिए। किसी भी प्रकार का वृहदण्ड (Major Penalty) प्राप्त अध्यापक आवेदन के लिए सर्वथा अनर्ह माना जाएगा।

    • सामाजिक एवं व्यावसायिक छवि: शिक्षक किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत ट्यूशन (Private Tuition) कार्य में संलिप्त न हो। स्थानीय समुदाय में उनकी छवि बेदाग और सम्मानजनक होनी चाहिए तथा समाज, अभिभावकों व विद्यार्थियों को विद्यालय विकास के लिए निरंतर उत्प्रेरित करने का कार्य किया गया हो।

    विशेष प्रतिबंध (Who cannot apply): संविदा शिक्षक, शिक्षा मित्र, अंशकालिक अनुदेशक, अवकाश प्राप्त / सेवानिवृत्त शिक्षक इस पुरस्कार के लिए पात्र नहीं हैं। इसके साथ ही शैक्षिक प्रशासक, विद्यालय निरीक्षक तथा शिक्षक प्रशिक्षण प्रदान करने वाली संस्थाओं के प्रशिक्षक भी आवेदन नहीं कर सकते। जो शिक्षक पूर्व में राज्य या राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं, वे पुनः आवेदन के लिए पात्र नहीं होंगे।

    ​3. मूल्यांकन के मुख्य विचारणीय बिंदु एवं अभिनव प्रयोग

    ​शिक्षकों का चयन मात्र वरिष्ठता के आधार पर न होकर उनके द्वारा किए गए वास्तविक और धरातलीय सुधारों के आधार पर किया जाएगा। इसके अंतर्गत निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:

    1. नामांकन वृद्धि एवं ड्रॉप-आउट नियंत्रण: शिक्षक द्वारा तैनाती के वर्तमान एवं पूर्व विद्यालयों में विगत 15 वर्षों में छात्र नामांकन बढ़ाने और ड्रॉप-आउट (पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों) की दर को घटाने के लिए किए गए उपाय। इसका सत्यापन UDISE डेटा के साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

    1. नियमित उपस्थिति का सत्यापन: शिक्षक की विद्यालय में नियमित उपस्थिति अनिवार्य है। इसके लिए विद्यालय प्रबन्ध समिति (SMC) के अध्यक्ष द्वारा प्रदत्त तथा संबंधित खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) या जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र आवेदन के साथ संलग्न करना होगा।

    1. डिजिटल एवं आधुनिक प्रशिक्षण (Diksha App): शैक्षिक सत्र 2025-26 में शिक्षक द्वारा 'दीक्षा' (DIKSHA) पोर्टल पर राज्य स्तर से जारी समस्त अनिवार्य प्रशिक्षणों को पूर्ण किया गया हो तथा उन तकनीकों का प्रयोग वास्तविक कक्षा-शिक्षण में प्रभावी ढंग से किया जा रहा हो।

    1. टीचिंग लर्निंग मटेरियल (TLM) एवं नवाचार: शिक्षण को अधिक प्रभावशाली और सुरुचिपूर्ण बनाने के लिए शिक्षक द्वारा किए गए अभिनव प्रयोग, जैसे- आईसीटी (ICT) का उपयोग, आनंददायक सीखने की तकनीक (Joyful Learning), कम लागत या शून्य लागत वाली शिक्षण सामग्री (Low-cost TLM) का विकास एवं दैनिक शिक्षण गतिविधियों में उनका अनुप्रयोग।

    1. निपुण भारत मिशन एवं अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं: 'निपुण भारत मिशन' के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए किए गए कक्षावार प्रयास, नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा, विद्याज्ञान स्कूल प्रवेश परीक्षा और राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा (NMMS) में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं की संख्या। इसके अतिरिक्त, इंस्पायर अवार्ड (Inspire Award) के तहत विज्ञान प्रदर्शनी में राज्य स्तर पर छात्रों की प्रतिभागिता सुनिश्चित कराना।

    1. शत-प्रतिशत डिजिटलाइजेशन: विद्यालय में प्रचलित समस्त पंजिकाओं (Registers) को शत-प्रतिशत ऑनलाइन/डिजिटल रूप में अपडेट रखने में शिक्षक का योगदान।

    ​4. त्रि-स्तरीय मूल्यांकन मैट्रिक्स (Evaluation Matrix)

    ​आवेदकों का मूल्यांकन पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष रखने के लिए 'मूल्यांकन मैट्रिक्स' को कुल 100 अंकों के अधिभार (Weightage) के साथ तीन भागों में विभाजित किया गया है:

    • भाग 1: वस्तुनिष्ठ मानक — भार: 40 अंक: इसके अंतर्गत शिक्षक को प्रत्येक वस्तुनिष्ठ मानक (जैसे अकादमिक रिकॉर्ड, सेवा अवधि, छात्र नामांकन, विद्यालय की भौतिक अवसंरचना में सुधार आदि) के सापेक्ष अंक प्रदान किए जाएंगे।

    • भाग 2: प्रदर्शन आधारित / कार्यपरक मानक — भार: 40 अंक: इसके तहत शिक्षक द्वारा किए गए नवाचारों, शिक्षण विधियों, दीक्षा ऐप के प्रयोग, समुदाय के सहयोग से विद्यालय का कायाकल्प और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों के चयन जैसे कार्य-परक मानकों के आधार पर अंक दिए जाएंगे।

    • भाग 3: प्रस्तुतीकरण एवं साक्षात्कार — भार: 20 अंक: शॉर्टलिस्ट किए गए शिक्षकों को राज्य चयन समिति के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर अपने उत्कृष्ट कार्यों का डिजिटल/भौतिक प्रस्तुतीकरण देना होगा तथा साक्षात्कार का सामना करना होगा।

    ​5. चयन समितियों का गठन एवं उत्तरदायित्व

    ​चयन प्रक्रिया को दो स्तरों (जनपद एवं राज्य) पर सुदृढ़ प्रशासनिक समितियों द्वारा नियंत्रित किया जाएगा:

    ​अ. जनपदीय चयन समिति (District Selection Committee)

    ​प्रत्येक जनपद में प्राप्त होने वाले आवेदनों की प्रथम स्तर पर जांच और भौतिक सत्यापन के लिए इस समिति का गठन किया गया है:

    • अध्यक्ष: प्राचार्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET)

    • सदस्य सचिव: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA)

    • सदस्य: जनपद का वरिष्ठतम खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO)

    • सदस्य: जिलाधिकारी (DM) द्वारा नामित जनपद स्तर का एक शिक्षाविद्

    मुख्य कार्य: सत्यापन समितियों का गठन करके आवेदक द्वारा उपलब्ध कराए गए तथ्यों का भौतिक सत्यापन करना, मूल्यांकन मैट्रिक्स के अनुसार अंक देना और कड़ाई से जांच के बाद केवल अधिकतम 03 श्रेष्ठ शिक्षकों को शॉर्टलिस्ट करके उनके सतर्कता एवं सत्यनिष्ठा प्रमाण-पत्र सहित उनके आवेदन राज्य समिति को पोर्टल के माध्यम से अग्रेषित करना।

    ​ब. राज्य चयन समिति (State Selection Committee)

    ​अंतिम रूप से पुरस्कार की संस्तुति करने के लिए राज्य स्तर पर उच्च स्तरीय समिति क्रियाशील होगी:

    • अध्यक्ष: महानिदेशक, school Education, उत्तर प्रदेश

    • सदस्य सचिव: शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश, लखनऊ

    • सदस्य: निदेशक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उ०प्र०

    • सदस्य: उप शिक्षा निदेशक (प्राइमरी), शिविर कार्यालय, शिक्षा निदेशक (बेसिक), लखनऊ

    • सदस्य: महानिदेशक, स्कूल शिक्षा द्वारा नामित शिक्षा के क्षेत्र का एक शिक्षाविद्

    मुख्य कार्य: जनपद स्तर से प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों का पुनः परीक्षण व मूल्यांकन करना, शिक्षकों के साक्षात्कार एवं प्रस्तुतीकरण का संपादन करना तथा आवेदनों व साक्षात्कार के आधार पर प्रत्येक जनपद से एक सर्वश्रेष्ठ अध्यापक/अध्यापिका को राज्य अध्यापक पुरस्कार प्रदान किए जाने हेतु अंतिम संस्तुति उत्तर प्रदेश शासन को प्रेषित करना।

    ​6. महत्वपूर्ण निर्देश एवं कानूनी घोषणाएं

    ​शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने स्पष्ट किया है कि कोई भी आवेदन ऑफलाइन या डाक के माध्यम से स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रत्येक आवेदक शिक्षक को अपने ऑनलाइन आवेदन के साथ एक विस्तृत 'ऑनलाइन पोर्टफोलियो' (Online Portfolio) अपलोड करना अनिवार्य होगा, जिसमें उनके उत्कृष्ट कार्यों से संबंधित अभिलेख, टूल्स, गतिविधियों की सूचना, वीडियो, फोटोग्राफ और फील्ड भ्रमण की आख्या शामिल होनी चाहिए।

    ​इसके साथ ही, प्रत्येक शिक्षक को ऑनलाइन आवेदन में स्व-घोषणा (Self-Declaration) देनी होगी कि उनके द्वारा दी गई सभी सूचनाएं पूर्णतः सत्य और विश्वसनीय हैं। यदि भविष्य में किसी भी स्तर पर कोई डेटा या दावा भ्रामक या असत्य पाया जाता है, तो न केवल उनका चयन निरस्त किया जाएगा, अपितु उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कानूनी कार्यवाही भी सुनिश्चित की जाएगी। समिति को यह भी ध्यान रखना होगा कि नामित शिक्षक किसी शासकीय धनराशि के गबन, शासन या प्रशासन के विरुद्ध आंदोलन हेतु प्रेरित करने, जेल में निरुद्ध रहने या विभागीय/विधिक/आपराधिक/सतर्कता जांच जैसी प्रक्रियाओं में संलिप्त न रहा हो。

    ​उत्तर प्रदेश शासन के इस ऐतिहासिक कदम से निश्चित रूप से जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे कर्मठ शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा प्रणाली में एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धात्मक माहौल का निर्माण होगा।