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यूपी सरकार की बड़ी सौगात, अब ग्राम सचिवालय में बैठेंगे लेखपाल, 1 जुलाई से लागू होगी नई व्यवस्था

Sir Ji Ki Pathshala

​उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र बनवाने हो या जमीन से जुड़े अन्य सरकारी कार्य, अब ग्रामीणों को लेखपाल को ढूढ़ने के लिए तहसील या उनके घरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश ने एक अहम फैसला लेते हुए निर्देश दिया है कि अब सभी लेखपाल अनिवार्य रूप से अपने निर्धारित 'ग्राम सचिवालय' में ही बैठेंगे। राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव, श्रीमती कंचन वर्मा ने 25 जून 2026 को प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में सख्त शासनादेश जारी कर दिया है।

UP Rajasva Parishad order for Lekhpal duty in Gram Sachivalaya

क्यों पड़ी इस नई व्यवस्था की जरूरत?

​इस नई व्यवस्था को लागू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य आम जनता की सहूलियत है। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में ग्राम सचिवालयों में पंचायत सहायकों के माध्यम से राजस्व विभाग की 10 महत्वपूर्ण सेवाएं ऑनलाइन प्रदान की जा रही हैं। इनमें जाति, आय, अधिवास, हैसियत प्रमाण पत्र और खतौनी की नकल जैसी जन-सुविधाएं शामिल हैं। इन सभी कार्यों के निस्तारण में लेखपाल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसके बावजूद, ग्राम पंचायत स्तर पर लेखपालों के बैठने का कोई तय स्थान न होने के कारण आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता था। जनता की इसी परेशानी को दूर करने के लिए लेखपालों का ग्राम सचिवालय में बैठना अनिवार्य किया गया है।

तैयार होगा लेखपालों की उपस्थिति का रोस्टर

​लेखपालों के पास केवल प्रमाण पत्र बनाने की ही जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि वे प्रशासनिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक कड़ी होते हैं। पत्र में जिक्र किया गया है कि तहसील दिवस, थाना दिवस, वरासत, स्वामित्व योजना, किसान सम्मान निधि, रियल टाइम खतौनी, आपदा राहत, भू-नक्शा मिलान, कृषि एवं आवासीय पट्टा, फसल बीमा, निर्वाचन, अवैध कब्जा हटाना और राशन वितरण सत्यापन जैसे दर्जनों अहम कार्य लेखपालों के जिम्मे होते हैं। किसी भी सरकारी योजना के क्रियान्वयन के लिए लेखपाल की स्थलीय रिपोर्ट अनिवार्य होती है। कार्यों के इसी दबाव और जनता की सुविधा को देखते हुए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे लेखपालों के बैठने के लिए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराएं। साथ ही, उनकी उपस्थिति का एक स्पष्ट रोस्टर तैयार किया जाए, ताकि ग्रामीणों को पहले से पता हो कि उनके गांव का लेखपाल किस दिन सचिवालय में मिलेगा।

1 जुलाई 2026 से पूरी तरह लागू होगी व्यवस्था

​राजस्व परिषद ने इस व्यवस्था के क्रियान्वयन के लिए सख्त समय-सीमा निर्धारित की है। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि यह नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू कर दी जाए। परिषद ने अल्टीमेटम देते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी जनपद में इस व्यवस्था को लागू करने में कोई व्यावहारिक समस्या है, तो 30 जून 2026 तक परिषद को अवगत करा दिया जाए। यदि निर्धारित तिथि तक कोई सूचना प्राप्त नहीं होती है, तो यह मान लिया जाएगा कि 1 जुलाई से उस जिले में यह व्यवस्था पूरी तरह से लागू हो गई है।

​इस नई पहल से ग्रामीण प्रशासन में जबरदस्त पारदर्शिता आएगी और ग्राम सचिवालय सही मायनों में गांव की 'मिनी सरकार' के रूप में कार्य कर सकेंगे।

ग्राम सचिवालय में लेखपालों के बैठने के संबंध में राजस्व परिषद का शासनादेश 2026

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