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स्मार्टफोन से दूरी, किताबों से दोस्ती: परिषदीय स्कूलों में शुरू होगा 'डियर' (DEAR) कैंपेन

Sir Ji Ki Pathshala

परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के भीतर पढ़ने की आदत (रीडिंग कल्चर) को विकसित करने के लिए एक बेहद सकारात्मक पहल की जा रही है। अब स्कूलों में 'सब कुछ छोड़ो और पढ़ो' की तर्ज पर नया अभियान शुरू होने जा रहा है, जिसका मकसद बच्चों को मोबाइल की दुनिया से निकालकर किताबों की रोचक दुनिया में वापस लाना है।

परिषदीय स्कूलों में सब कुछ छोड़ो और पढ़ो (DEAR) कैंपेन

​आज के डिजिटल युग में बच्चों का अधिकतर समय मोबाइल स्क्रीन पर बीत रहा है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने यह तय किया है कि बच्चों को मोबाइल का इस्तेमाल कम करने और केवल जरूरत पड़ने पर ही करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

​इस नई मुहिम की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

1. 'सब कुछ छोड़ो और पढ़ो' (DEAR Campaign)

स्कूलों में हर सप्ताह 'डियर' (DEAR - Drop Everything and Read) यानी 'सब कुछ छोड़ो और पढ़ो' अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत सप्ताह में कोई एक दिन ऐसा होगा, जहां आधे से एक घंटे की विशेष क्लास केवल किताबें पढ़ने के लिए लगाई जाएगी। इस दौरान पढ़ाई का माहौल ऐसा होगा कि न केवल छात्र, बल्कि शिक्षक भी अपने रोजमर्रा के काम छोड़कर अपनी रुचि की किताबें पढ़ेंगे और बाद में उस पर एक-दूसरे से चर्चा करेंगे।

2. अब घर ले जाने के लिए मिलेंगी लाइब्रेरी की किताबें

अक्सर यह देखने में आता था कि शिक्षक किताबें फटने या खराब होने के डर से बच्चों को लाइब्रेरी की किताबें घर के लिए इश्यू नहीं करते थे। अब इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए सख्त निर्देश दिए गए हैं कि छात्रों को घर पर पढ़ने के लिए किताबें अनिवार्य रूप से दी जाएं। जब बच्चा किताब वापस करने आएगा, तो शिक्षक उससे चर्चा करेंगे कि उसने उस किताब से क्या नया सीखा। इससे बच्चों में किताबें पढ़ने की ललक और समझ दोनों बढ़ेगी।

3. समाचार पत्र और प्रिंट-रिच माहौल पर जोर

किताबों के साथ-साथ बच्चों को नियमित रूप से समाचार पत्र (Newspaper) पढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि उनका सामान्य ज्ञान (GK) मजबूत हो सके और वे देश-दुनिया से अपडेट रहें। इसके अलावा, छात्रों की लेखन क्षमता को निखारने पर भी विशेष काम किया जाएगा।

4. बच्चों की पहुंच में होगी शिक्षण सामग्री

स्कूल के वातावरण को पूरी तरह से बाल-अनुकूल बनाने की तैयारी है। विद्यालयों की दीवारों पर जो भी प्रिंट-रिच सामग्री (चार्ट्स, पोस्टर, कविताएं) लगाई जाएगी, वह बिल्कुल बच्चों की पहुंच और नजर के सामने होगी, ताकि वे चलते-फिरते भी आसानी से उन्हें पढ़ और सीख सकें।

निष्कर्ष:

शिक्षा विभाग की यह मुहिम निश्चित रूप से बच्चों के बौद्धिक और मानसिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी। 'सब कुछ छोड़ो और पढ़ो' अभियान बच्चों को न सिर्फ एक बेहतर पाठक बनाएगा, बल्कि उनके सोचने-समझने की क्षमता को भी एक नई उड़ान देगा।

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