यूपी में आंगनवाड़ी केंद्रों का कायाकल्प: सीएम योगी ने रखी आधुनिक 'बालवाटिका' और नए मानकों की रूपरेखा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बाल विकास और पोषण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए नए और आधुनिक मानकों की आवश्यकता पर बल दिया है। राज्य सरकार अब पारंपरिक आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक बालवाटिका (प्री-प्राइमरी स्कूलों) के रूप में विकसित कर रही है, ताकि ग्रामीण और वंचित वर्ग के बच्चों को भी कॉन्वेंट स्कूलों जैसी बुनियादी सुविधाएं और शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आंगनवाड़ी भवनों की निर्माण लागत की समीक्षा करने और 'टेक होम राशन' (THR) की व्यवस्था को और व्यावहारिक बनाने का अनुरोध किया है।
72 हजार आंगनवाड़ी केंद्र बने 'बालवाटिका'
उत्तर प्रदेश में बच्चों के शुरुआती विकास और शिक्षा (ECCEs) को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा बदलाव किया गया है। सीएम योगी ने बताया कि राज्य में लगभग 72,000 आंगनवाड़ी केंद्रों को बालवाटिका यानी प्री-प्राइमरी स्कूलों के रूप में सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। यहाँ खेल-खेल में बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर ध्यान दिया जा रहा है, जिससे सरकारी स्कूलों में प्राथमिक शिक्षा का आधार मजबूत हो सके।
2,000 वर्गफीट में बनेंगे आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्र
यूपी सरकार ने बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को सुधारने के लिए एक नया और आधुनिक मॉडल तैयार किया है।
- नया प्रतिमान (Model): आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्र अब 2,000 वर्गफीट के बड़े दायरे में बनाए जा रहे हैं।
- लागत में अंतर: केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए ₹11.84 लाख की राशि निर्धारित की गई है, जबकि बेहतर और आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए राज्य सरकार अपने स्तर से ₹30.22 लाख की लागत से इनका निर्माण करा रही है।
बजट व्यवस्था को आसान बनाने का प्रस्ताव
वर्तमान में आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण और रखरखाव के लिए कई अलग-अलग विभागों के बजट को मिलाकर (समेकित मद व्यवस्था) खर्च किया जाता है। इसमें प्रशासनिक जटिलताएं आती हैं।सीएम योगी ने सुझाव दिया है कि इस जटिल व्यवस्था को खत्म करके, आंगनवाड़ी से जुड़े सभी खर्चों का वहन केवल एक मद—महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा ही किया जाना चाहिए। इससे बजट जारी होने और काम पूरा होने में तेजी आएगी।
'टेक होम राशन' (THR) को थोक मूल्य सूचकांक से जोड़ने की वकालत
गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों के लिए दी जाने वाली 'टेक होम राशन' व्यवस्था पर भी मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण बिंदु उठाया।- आखिरी संशोधन 2017 में: टेक होम राशन की लागत की दरों में आखिरी बार बदलाव वर्ष 2017 में हुआ था। पिछले 9 वर्षों में महंगाई काफी बढ़ चुकी है।
- थोक मूल्य सूचकांक (WPI) से जुड़ाव: मुख्यमंत्री ने मांग की है कि राशन की लागत को थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index) से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि महंगाई के अनुपात में बजट खुद-ब-खुद संशोधित होता रहे और बच्चों व महिलाओं को मिलने वाले पोषण की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।


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