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यूपी में प्रशासनिक फेरबदल: 206 PPS और 3 PCS अफसरों के तबादले, देखें पूरी ट्रांसफर लिस्ट

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और शासन तंत्र को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने प्रशासनिक और पुलिस महकमे में एक बहुत बड़ा फेरबदल किया है। शासन द्वारा जारी ताजा आदेश के तहत प्रदेश में व्यापक स्तर पर 206 प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) अधिकारियों और 3 प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर दिया गया है। इस बड़े प्रशासनिक कदम के बाद राजधानी लखनऊ समेत राज्य के कई प्रमुख जिलों, पुलिस कमिश्नरेटों और पीएसी (PAC) वाहिनियों के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। जानकारों का मानना है कि यह फेरबदल आगामी प्रशासनिक चुनौतियों को देखते हुए शासन की कार्यकुशलता बढ़ाने का एक बड़ा प्रयास है।

यूपी प्रशासनिक फेरबदल (UP Administrative Shuffle)

​मुख्यमंत्री सुरक्षा और लखनऊ कमिश्नरेट में बड़े बदलाव

​इस फेरबदल का सबसे बड़ा असर राजधानी लखनऊ और मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था पर देखने को मिला है। वीवीआईपी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई अनुभवी चेहरों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इसके तहत विकास कुमार जायसवाल को लखनऊ कमिश्नरेट से हटाकर मुख्यमंत्री सुरक्षा की कमान सौंपी गई है। वहीं मुख्यमंत्री सुरक्षा में तैनात रहे जितेंद्र कुमार को अब फील्ड में भेजते हुए शाहजानकारी (शाहजहांपुर) की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा मुख्यमंत्री सुरक्षा से वाराणसी भेजे गए राजेश कुमार सिंह की एक बार फिर वापसी हुई है और उन्हें लखनऊ कमिश्नरेट में नई तैनाती मिली है।

​राजधानी लखनऊ में अनुभवी चेहरों की एंट्री

​प्रशासन ने लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में नए और अनुभवी सहायक पुलिस आयुक्तों (ACP) की तैनाती पर विशेष जोर दिया है। गोरखपुर में तैनात उदय प्रताप सिंह (द्वितीय) को लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में ACP बनाया गया है। महोबा के गौरव उपाध्याय और अंबेडकरनगर के शुभम कुमार को भी लखनऊ कमिश्नरेट में ACP के पद पर भेजा गया है। अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियों में कासगंज से शाहिदा नसरीन, रामपुर से अतुल कुमार पांडेय, और कानपुर से अभिषेक कुमार पांडेय को लखनऊ भेजा गया है। इनके साथ ही रंजीत कुमार, प्रतीक दहिया और महेश त्यागी को भी लखनऊ कमिश्नरेट में अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं।

​दूसरी तरफ लखनऊ से कुछ अधिकारियों की विदाई भी हुई है। लखनऊ में तैनात रहे ACP अभय कुमार मल्ल को बलरामपुर, सतीश कुमार राय को मेरठ में पीएसी की 6वीं वाहिनी और शिप्रा पांडेय को डीजीपी मुख्यालय में आईजी कानून-व्यवस्था कार्यालय भेजा गया है। वहीं अभिनव यादव (द्वितीय) को लखनऊ से हटाकर एटीएस (Anti-Terrorism Squad) जैसी संवेदनशील विंग में भेजा गया है।

​जिलों और PAC वाहिनियों में हुए अन्य महत्वपूर्ण तबादले

​राजधानी के बाहर भी बड़े पैमाने पर अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है। महिला अधिकारियों में अनुष्का को स्थानीय पुलिस से अब चतुर्थ वाहिनी PAC, प्रयागराज भेजा गया है। सुरेंद्र शर्मा को आठवीं वाहिनी PAC, बरेली में नई तैनाती मिली है। वीरेंद्र विक्रम को कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि विनय कुमार द्विवेदी को मुजफ्फरनगर ट्रांसफर किया गया है। इसके अलावा राजकुमार सिंह (द्वितीय) को प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट भेजा गया है और अनिद्य विक्रम सिंह को गाजीपुर में नई जिम्मेदारी दी गई है।

​तीन वरिष्ठ PCS अधिकारियों को भी मिली नई जिम्मेदारी

​पुलिस महकमे के साथ-साथ शासन ने प्रशासनिक स्तर पर भी सुधार करते हुए तीन महत्वपूर्ण पीसीएस (PCS) अधिकारियों का तबादला किया है। सृष्टि धवन को उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय में उप निदेशक (Deputy Director) के पद पर नियुक्त किया गया है। संतोष कुमार राय को चित्रकूट धाम मंडल का अपर आयुक्त (Additional Commissioner) बनाया गया है। वहीं आनंद मोहन उपाध्याय को कानपुर नगर जैसे बड़े और औद्योगिक जिले का अपर जिलाधिकारी (ADM) नियुक्त किया गया है।

​प्रशासनिक दृष्टिकोण: क्यों जरूरी था यह फेरबदल?

​प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इस स्तर के तबादले रूटीन प्रक्रिया का हिस्सा होने के साथ-साथ शासन की नई प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं। एक ही स्थान पर लंबे समय से जमे अधिकारियों को बदलने से कार्यप्रणाली में नई ऊर्जा आती है। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे बड़े कमिश्नरेटों में नई नियुक्तियों से जमीनी स्तर पर अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी। इसके अलावा एटीएस, डीजीपी मुख्यालय और फील्ड के बीच अधिकारियों का यह संतुलन राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगा।

209 अधिकारियों के इस महा-तबादले से साफ है कि यूपी सरकार आगामी समय में प्रशासनिक कसावट को लेकर बेहद गंभीर है। अब देखना यह होगा कि नई तैनाती पाने वाले ये अधिकारी जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं और शासन की नीतियों को जमीन पर कितना प्रभावी ढंग से लागू कर पाते हैं।