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टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक महासंघ की बड़ी बैठक आज, आंदोलन की रणनीति पर होगा मंथन

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को लेकर शिक्षक संगठनों का विरोध तेज हो गया है। इसी कड़ी में अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ आज (गुरुवार को) एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने जा रहा है। इस बैठक में आगामी बड़े आंदोलन की रूपरेखा और रणनीति तय की जाएगी।

​शिक्षक महासंघ लखनऊ बैठक टीईटी अनिवार्यता विरोध

​सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कानूनी विमर्श

​बैठक में केवल आंदोलन ही नहीं, बल्कि कानूनी पहलुओं पर भी गंभीरता से चर्चा होगी। महासंघ के पदाधिकारी सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय की समीक्षा करेंगे और इसके विधिक व प्रशासनिक पक्षों पर विचार-विमर्श कर आगे की कानूनी लड़ाई का खाका तैयार करेंगे।

​संकट में 25 लाख शिक्षकों का भविष्य

​महासंघ के प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान ने टीईटी की अनिवार्यता पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा: ​"टीईटी को अनिवार्य किए जाने के आदेश से न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के शिक्षकों में भारी आक्रोश और भय का माहौल है। इस फैसले के कारण देश के करीब 25 लाख और अकेले उत्तर प्रदेश के लगभग 1.86 लाख शिक्षक परिवारों के सामने अचानक गहरा आर्थिक संकट और सेवा सुरक्षा का खतरा खड़ा हो गया है।"

​बैठक के मुख्य बिंदु:

  • आंदोलन की तैयारी: टीईटी अनिवार्यता के विरोध में देशव्यापी और राज्यव्यापी आंदोलन के चरणों का निर्धारण।
  • कानूनी विकल्पों की तलाश: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका या अन्य विधिक रास्तों पर वकीलों से राय-मशविरा।
  • प्रशासनिक घेराव: सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी मांगों को मजबूती से रखने की योजना।

​शिक्षक महासंघ का साफ कहना है कि वे अपने हक की लड़ाई के लिए पीछे नहीं हटेंगे और जब तक शिक्षकों के हितों की रक्षा नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब देखना यह होगा कि आज होने वाली इस बैठक से आंदोलन क्या नया मोड़ लेता है।