लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (दिव्यांग छात्रों) को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश के विद्यालयों में विशेष शिक्षकों के कुल 5352 पदों को चिन्हांकित किया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण में, संविदा पर कार्यरत 434 स्पेशल एजुकेटरों का विशेष शिक्षकों के नियमित पदों पर समायोजन सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
आउटसोर्स शिक्षकों के लिए खुले रास्ते, TET होगी अपेक्षित योग्यता
इसी क्रम में अब बेसिक शिक्षा विभाग शेष बचे हुए पदों के सापेक्ष आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कार्यरत स्पेशल एजुकेटरों को भी विशेष शिक्षक के रूप में चयनित करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है।
बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 5 मई को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में, संविदा कर्मियों के अतिरिक्त आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से नियुक्त स्पेशल एजुकेटरों को विशेष शिक्षक के पद पर चयनित करने पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इस चयन प्रक्रिया की शुचिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए टीईटी (TET - Teacher Eligibility Test) को डिजायरेबल (अपेक्षित) योग्यता माना जाएगा।


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