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उत्तर प्रदेश में बुनियादी शिक्षा को नई उड़ान: अब कक्षा 5 तक बढ़ाया गया ‘निपुण भारत मिशन’ का दायरा

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों की नींव को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से संचालित 'निपुण भारत मिशन' का विस्तार अब कक्षा 5 तक करने का निर्णय लिया गया है।

​उत्तर प्रदेश में 'निपुण भारत मिशन' अब कक्षा 5 तक लागू

​इस महत्वपूर्ण पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (Foundational Literacy and Numeracy - FLN) को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। इसके तहत अब बच्चों को केवल रटाने के बजाय उनके सीखने की वास्तविक क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

​चार मुख्य विषयों पर रहेगा फोकस, तय होंगी नई दक्षताएं

​मिशन के विस्तार के साथ ही अब पढ़ाई के तौर-तरीकों और मूल्यांकन में भी बदलाव देखने को मिलेगा। इसके तहत निम्नलिखित चार प्रमुख विषयों के लिए नए अधिगम लक्ष्य (Learning Outcomes) और दक्षताएं निर्धारित की जा रही हैं:

  • ​हिंदी
  • ​गणित
  • ​अंग्रेजी
  • ​पर्यावरण अध्ययन (EVS)

20 जून तक मिलेगी मंजूरी: शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के अनुसार, इन नए लक्ष्यों और दक्षताओं के प्रारूप को अंतिम रूप देकर 20 जून तक अनुमोदन (Approval) के लिए भेज दिया जाएगा। मंजूरी मिलते ही इसे सभी विद्यालयों में सख्ती से लागू किया जाएगा।

कक्षा 1-2 से आगे बढ़कर अब कक्षा 3 से 5 तक विस्तार

​आपको बता दें कि अब तक निपुण भारत मिशन मुख्य रूप से कक्षा 1 और 2 के छोटे बच्चों पर ही केंद्रित था। लेकिन अक्सर यह देखा गया कि शुरुआती कक्षाओं के बाद बच्चों की सीखने की निरंतरता टूट जाती थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए अब कक्षा 3, 4 और 5 को भी इस मिशन से जोड़ा जा रहा है, ताकि प्राथमिक स्तर को पार करने तक बच्चों का शैक्षणिक आधार पूरी तरह फौलादी हो सके।

​हाल ही में विभाग के उच्च अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें मिशन के विस्तार, शिक्षकों से परामर्श की प्रक्रिया और इसे जमीन पर उतारने की रणनीति की गहन समीक्षा की गई है।

​हिंदी और गणित का खाका तैयार, अंग्रेजी-EVS की बारी

​शिक्षा विभाग ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। मिशन के अंतर्गत हिंदी और गणित विषयों के प्रारंभिक अधिगम लक्ष्य (Format) तैयार कर लिए गए हैं। अगले चरण में जल्द ही अंग्रेजी और पर्यावरण अध्ययन (EVS) के लक्ष्य भी तय कर दिए जाएंगे। इन मानकों से यह साफ हो सकेगा कि किस कक्षा के बच्चे को कितना ज्ञान और समझ होनी अनिवार्य है।

​ खास है यह कदम?

​शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से प्राथमिक स्तर पर सरकारी स्कूलों की साख बदलेगी। कक्षा 3 से 5 तक के छात्रों की सीखने की प्रगति पर अब लगातार नज़र रखी जाएगी और जहाँ भी बच्चे कमजोर पाए जाएंगे, वहाँ सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। इससे न सिर्फ ड्राप-आउट रेट कम होगा, बल्कि बच्चे आगे की ऊंची कक्षाओं (जैसे छठी से आठवीं) के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार हो सकेंगे।