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"तुम्हारे जैसे 1000 पति..." ताने ने ली जान, MP हाई कोर्ट का सजा पर बड़ा फैसला

Sir Ji Ki Pathshala

"तुम्हारे जैसे एक हजार पति रख सकती हूं": एक ताने ने ली जान, हाई कोर्ट ने आजीवन कारावास को 7 साल की सजा में बदला

​मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए माना कि कभी-कभी शब्द, तलवार से भी ज्यादा गहरे घाव दे जाते हैं। पत्नी की हत्या के एक मामले में मानवीय और कानूनी दृष्टिकोण अपनाते हुए, हाई कोर्ट ने छिंदवाड़ा जिले के एक दोषी पति की आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया है और इसे सात साल के सश्रम कारावास में परिवर्तित कर दिया है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला: पत्नी की हत्या मामले में सजा कम

क्या था पूरा मामला और विवाद की जड़?

​यह पूरी दर्दनाक घटना मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में स्थित कुलबहेरी नदी घाट पर घटी थी। जानकारी के अनुसार, वहां पति और पत्नी के बीच अचानक किसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया था। यह बहस इतनी बढ़ गई कि पत्नी ने तैश (गुस्से) में आकर अपने पति से एक चुभने वाली बात कह दी- "तुम्हारे जैसे एक हजार पति रख सकती हूं"।

अपमानजनक टिप्पणी बनी हत्या की वजह

​इस प्रकरण की सुनवाई न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने की। युगलपीठ ने स्पष्ट रूप से माना कि पत्नी द्वारा की गई यह टिप्पणी अत्यंत अपमानजनक और तीव्र उकसावे वाली (provocative) थी। इसी अपमानजनक बात को सुनकर आरोपित पति अपना आपा खो बैठा और उसने आवेश में आकर वहीं पड़ा एक पत्थर उठाया तथा अपनी पत्नी पर वार कर दिया, जिससे उसकी जान चली गई।

हाई कोर्ट का तर्क: अपराध पूर्व नियोजित नहीं था

​हाई कोर्ट ने अपने फैसले में इस बात पर विशेष जोर दिया कि अपराध का मूल्यांकन उसकी परिस्थितियों के आधार पर होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जब कोई अपराध पूर्व नियोजित (pre-planned) न होकर अचानक उकसावे के कारण घटित होता है, तो उसे उसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए। कानूनी रिकॉर्ड में ऐसा कोई भी साक्ष्य या सबूत नहीं मिला जिससे यह सिद्ध हो सके कि पति ने हत्या की पहले से कोई योजना बनाई थी या वह किसी गलत इरादे से वहां पहुंचा था।

आरोपी के आचरण ने सजा कम करने में निभाई अहम भूमिका

​इस निर्णय का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू आरोपित का घटना के तुरंत बाद का व्यवहार भी रहा। पत्नी की हत्या के बाद, आरोपित मौके से भागा नहीं। इसके बजाय, उसने स्वयं पुलिस को और अपनी पत्नी के स्वजनों (रिश्तेदारों) को फोन करके पूरी घटना की जानकारी दी। हाई कोर्ट ने आरोपित के इस आचरण को एक बहुत ही महत्वपूर्ण संकेत माना।

​इन्हीं सभी तथ्यों—अचानक हुए विवाद, उकसावे वाली टिप्पणी और घटना के बाद आरोपी के सकारात्मक आचरण—को देखते हुए, कोर्ट ने हत्या के इस मामले में सजा को कम करने का यह अहम फैसला सुनाया।

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